केदारनाथ में गोल नहीं, बल्कि त्रिकोणीय है शिवलिंग,जानें इसके पीछे की बेहद रोचक पौराणिक कथा
India News Live, Digital Desk: उत्तराखंड की हसीन वादियों में स्थित केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। केदारनाथ मंदिर अपनी वास्तुकला और आध्यात्मिकता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां की सबसे अनोखी बात भगवान शिव का 'शिवलिंग' है। आमतौर पर मंदिरों में शिवलिंग गोल आकार के होते हैं, लेकिन केदारनाथ में शिवलिंग का आकार त्रिकोणीय (Triangular) है और यह एक विशाल शिला के रूप में है।
आखिर केदारनाथ में शिवलिंग त्रिकोणीय क्यों है? इसके पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक बहुत ही दिलचस्प पौराणिक कथा है। आइए जानते हैं क्या है वह रहस्य।
पांडवों को क्यों दर्शन नहीं देना चाहते थे महादेव?
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों पर अपने ही भाइयों (कौरवों) और गुरुओं की हत्या का पाप (गोत्र हत्या और ब्रह्म हत्या) लगा था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडव भगवान शिव के दर्शन करने निकले। भगवान शिव पांडवों से नाराज थे क्योंकि उन्होंने युद्ध में अधर्म का साथ देने वालों का वध किया था, इसलिए वे उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे।
जब भोलेनाथ ने लिया बैल का रूप
पांडव शिव को ढूंढते हुए केदारनाथ पहुंचे। महादेव ने उन्हें आता देख एक बैल का रूप धारण कर लिया और वहां मौजूद अन्य पशुओं के झुंड में शामिल हो गए। लेकिन भीम ने भगवान शिव को पहचान लिया। भीम ने अपने पैर दो पहाड़ियों पर फैला दिए ताकि पशु उनके पैरों के नीचे से निकलें। सभी पशु तो निकल गए, लेकिन भगवान शिव रूपी बैल वहां से नहीं हिला।
ऐसे बना त्रिकोणीय शिवलिंग
जब भीम बैल को पकड़ने के लिए झपटे, तो भगवान शिव जमीन में समाने लगे। भीम ने फुर्ती दिखाते हुए बैल की त्रिकोणीय पीठ (कूबड़ वाला हिस्सा) पकड़ ली। पांडवों की इस अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प को देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर पापों से मुक्त कर दिया।
माना जाता है कि बैल की पीठ का जो हिस्सा भीम ने पकड़ा था, वही हिस्सा वहीं रह गया और वह हमेशा के लिए एक त्रिकोणीय शिवलिंग के रूप में वहां स्थापित हो गया। इसी कारण आज भी केदारनाथ में शिवलिंग की पूजा बैल की पीठ के रूप में की जाती है।
पशुपतिनाथ से जुड़ा है केदारनाथ का रहस्य
कहा जाता है कि जब भगवान शिव बैल के रूप में जमीन में समाए, तो उनके शरीर के अन्य हिस्से अलग-अलग जगहों पर प्रकट हुए:
मुख: नेपाल के पशुपतिनाथ में प्रकट हुआ।
भुजाएं: तुंगनाथ में।
नाभि: मदमहेश्वर में।
जटाएं: कल्पेश्वर में।
मध्य भाग: रुद्रनाथ में। इन पांच स्थानों को 'पंच केदार' के नाम से जाना जाता है।
भक्तों की आस्था का केंद्र
केदारनाथ का यह त्रिकोणीय शिवलिंग न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि यह भक्तों को यह भी संदेश देता है कि सच्चे मन से की गई पुकार ईश्वर तक जरूर पहुंचती है। आज भी लाखों श्रद्धालु इस अद्भुत और रहस्यमयी शिवलिंग के दर्शन के लिए दुर्गम रास्तों को पार कर केदारनाथ पहुंचते हैं।