Jyeshtha Ekadashi 2026 : अधिकमास के कारण 2 की जगह रखे जाएंगे 4 एकादशी व्रत
India News Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 का ज्येष्ठ महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ मास में 'अधिकमास' (पुरुषोत्तम मास) का शुभ संयोग बन रहा है, जिसकी वजह से इस महीने में व्रतों की संख्या बढ़ गई है। आमतौर पर एक महीने में दो एकादशी आती हैं, लेकिन इस बार भक्तों को ज्येष्ठ के दो महीनों के दौरान कुल 4 एकादशी व्रत रखने का पुण्य प्राप्त होगा। इसमें साल की सबसे कठिन और फलदायी मानी जाने वाली 'निर्जला एकादशी' भी शामिल है।
अधिकमास ने बढ़ाई ज्येष्ठ की अवधि, 29 जून तक चलेगा महीना
इस साल ज्येष्ठ महीने की शुरुआत 2 मई 2026 से हो चुकी है, जो 29 जून 2026 तक जारी रहेगी। इस लंबी अवधि का मुख्य कारण 17 मई से 15 जून तक रहने वाला अधिकमास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन एकादशी व्रतों को करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
1. अपरा एकादशी (13 मई 2026, बुधवार)
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा या अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है।
तिथि: एकादशी तिथि 12 मई दोपहर 02:52 बजे से शुरू होकर 13 मई दोपहर 01:30 बजे तक रहेगी।
व्रत व पारण: उदयातिथि के अनुसार व्रत 13 मई को रखा जाएगा। व्रत का पारण 14 मई की सुबह 06:04 से 08:41 बजे के बीच होगा। यह व्रत अनजाने में हुई गलतियों के प्रायश्चित के लिए उत्तम माना जाता है।
2. पद्मिनी एकादशी (27 मई 2026, बुधवार)
अधिकमास के दौरान आने वाली कृष्ण पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं।
तिथि: यह तिथि 26 मई की रात 10:24 बजे से शुरू होकर 27 मई की देर रात 12:44 बजे तक रहेगी।
व्रत व पारण: 27 मई को व्रत रखा जाएगा और इसका पारण 28 मई की सुबह 05:25 से 08:08 बजे के बीच किया जाएगा।
3. परमा एकादशी (11 जून 2026, गुरुवार)
अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'परमा एकादशी' कहा जाता है।
महत्व: यह व्रत विशेष रूप से दरिद्रता दूर करने और आर्थिक कष्टों से मुक्ति के लिए किया जाता है।
तिथि: इस साल यह व्रत 11 जून को रखा जाएगा और 12 जून को विधि-विधान से इसका पारण होगा।
4. निर्जला एकादशी (25 जून 2026, गुरुवार)
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी माना जाता है। इसे 'भीमसेनी एकादशी' भी कहते हैं।
कठिन नियम: इस व्रत में जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती, इसलिए इसे निर्जला कहते हैं। माना जाता है कि मात्र इस एक एकादशी के व्रत से साल भर की सभी 24 एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
तिथि: एकादशी तिथि 24 जून शाम 06:12 बजे शुरू होकर 25 जून रात 08:09 बजे समाप्त होगी।
व्रत व पारण: 25 जून को मुख्य व्रत होगा और पारण 26 जून की सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच किया जाएगा।