शाहबाज शरीफ 'फेल', पुतिन की 'एंट्री'! क्या रूसी राष्ट्रपति रुकवाएंगे ईरान-अमेरिका महाजंग

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया (West Asia) के सुलगते हालातों के बीच दुनिया की नजरें अब मॉस्को की ओर मुड़ गई हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल होने के बाद अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस विनाशकारी जंग को रोकने की कमान संभाल ली है। सोमवार को सेंट पीटर्सबर्ग में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और पुतिन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मीटिंग ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर फिरा पानी, ईरान ने उठाए सवाल

बीते दिनों इस्लामाबाद में शहबाज शरीफ सरकार की देखरेख में हुई 'पीस टॉक' किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। खबर है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और ईरानी दल के बीच भरोसे की भारी कमी देखी गई। ईरान ने तो यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान एक पड़ोसी के तौर पर अच्छा हो सकता है, लेकिन मध्यस्थ के रूप में वह पूरी तरह 'भरोसेमंद' नहीं है। ईरानी सांसदों का आरोप है कि पाकिस्तान चाहकर भी अमेरिका के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल पा रहा है, जिससे शांति वार्ता पटरी से उतर गई।

पुतिन का बड़ा ऐलान: ईरान और खाड़ी देशों के हितों की करेंगे रक्षा

पाकिस्तान की विफलता के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने मोर्चा संभाल लिया। अराघची के साथ बैठक में पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस, ईरान के साथ अपने 'रणनीतिक संबंधों' (Strategic Partnership) को और मजबूत करेगा। पुतिन ने कहा:

"रूस खाड़ी क्षेत्र में शांति के लिए हर संभव प्रयास करेगा। हमें अयातुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई का संदेश मिला है और हम ईरान की संप्रभुता के साथ खड़े हैं।"

पुतिन ने अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा बताया है।

रूस का 'मास्टर प्लान': यूरेनियम अपने पास रखने का ऑफर

इस युद्ध की सबसे बड़ी जड़ ईरान का 'परमाणु कार्यक्रम' है। रूस ने इस मसले को सुलझाने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। पुतिन ने पेशकश की है कि ईरान अपना सारा 'यूरेनियम भंडार' रूस को सौंप दे, ताकि अमेरिका और इजरायल के पास हमले का कोई बहाना न रहे। हालांकि, वॉशिंगटन फिलहाल इस प्रस्ताव को मानने से हिचकिचा रहा है, लेकिन पुतिन की इस 'एंट्री' ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

क्या पुतिन बचा पाएंगे ईरान को?

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने साफ कर दिया कि ईरान दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति (अमेरिका) के सामने झुकने वाला नहीं है, लेकिन रूस जैसे दोस्तों का साथ उसे मजबूती दे रहा है। अब सवाल यह है कि क्या पुतिन की मध्यस्थता को डोनाल्ड ट्रंप स्वीकार करेंगे या पश्चिम एशिया में बारूद की गंध और गहरी होगी? पूरी दुनिया की नजरें अब रूस के अगले कदम पर टिकी हैं।