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September 05 2026 10:04 am

दलीप ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी के मुरीद हुए सीनियर बल्लेबाज रजत पाटीदार; 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने वाली पारी पर कह दी दिल छू लेने वाली बात

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भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित लाल गेंद टूर्नामेंट 'दलीप ट्रॉफी' में इन दिनों एक ऐसे 15 वर्षीय किशोर के नाम की गूंज सुनाई दे रही है, जिसने बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय और अनुभवी गेंदबाजों के होश उड़ा रखे हैं। बिहार के समस्तीपुर से निकले बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मैदान पर सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में जिस बेखौफ अंदाज में 81 गेंदों पर 92 रनों की काउंटर-अटैकिंग पारी खेली, उसने पूरे क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया है। वैभव की इस बल्लेबाजी के मुरीद सिर्फ दर्शक और चयनकर्ता ही नहीं हुए, बल्कि मैच के दौरान विपक्षी टीम का हिस्सा रहे भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और सेंट्रल जोन के स्टार बल्लेबाज रजत पाटीदार भी खुद को इस युवा सनसनी की तारीफ करने से नहीं रोक पाए।

मैच के बाद एक खेल बातचीत के दौरान रजत पाटीदार ने वैभव सूर्यवंशी की तकनीक, मानसिकता और खेल के प्रति दृष्टिकोण पर खुलकर बात की। पाटीदार ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय करियर में कई प्रतिभाशाली युवाओं को देखा है, लेकिन 15 साल 175 दिन की उम्र में किसी बल्लेबाज के भीतर ऐसी परिपक्वता, शांत चित्त और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाजों पर हावी होने का ऐसा आत्मविश्वास उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। पाटीदार के अनुसार, वैभव केवल एक आक्रामक हिटर नहीं हैं, बल्कि उनके पास खेल की वह गहरी समझ है जो सामान्यतः 25-26 साल के मंझे हुए बल्लेबाजों में देखने को मिलती है।

'वो दबाव को महसूस ही नहीं करता': रजत पाटीदार ने बताई वैभव की सबसे अलग खूबी

रजत पाटीदार ने वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी का तकनीकी और मानसिक विश्लेषण करते हुए बताया कि आखिर क्यों यह खिलाड़ी समकालीन युवा पीढ़ी से बिल्कुल अलग नजर आता है। पाटीदार ने कहा, "जब आप प्रथम श्रेणी (First-Class) क्रिकेट में लाल गेंद के सामने उतरते हैं, तो विरोधी टीम आपके ऊपर स्लिप्स, गली और शॉर्ट लेग लगाकर मानसिक शिकंजा कसती है। अधिकांश युवा बल्लेबाज ऐसी परिस्थितियों में संकोच में पड़ जाते हैं और अपनी स्वाभाविक शैली भूलकर रक्षात्मक हो जाते हैं। लेकिन वैभव सूर्यवंशी के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। वह जब क्रीज पर उतरता है, तो ऐसा लगता है मानो वह पार्क में अपने दोस्तों के साथ बेफिक्र होकर खेल रहा हो।"

पाटीदार ने रेखांकित किया कि वैभव की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'लेंथ को बहुत जल्दी भांपने' (Early Length Picking) की क्षमता है। 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले तेज गेंदबाजों के खिलाफ वैभव के पास बैकफुट पर जाने और शॉट खेलने के लिए पर्याप्त समय होता है। पाटीदार ने कहा कि जब सेंट्रल जोन के गेंदबाजों ने ऑफ स्टंप के बाहर गेंदें डालकर उन्हें ललचाने की कोशिश की, तो वैभव ने बिना किसी जल्दबाजी के या तो उन्हें लीव किया या फिर पूरी ताकत से कवर और प्वाइंट के ऊपर से कट शॉट जड़ दिए। यह स्पष्ट दिखाता है कि इस लड़के का हेड पोजिशन और हैंड-आई कोऑर्डिनेशन किसी प्राकृतिक प्रतिभा (Natural Talent) का उपहार है।

81 गेंदों में 92 रन और 57 साल पुराने रिकॉर्ड का संहार: जब चेपॉक से पहले बेंगलुरु में आया तूफान

सेंट्रल जोन के खिलाफ खेले गए उस सेमीफाइनल मुकाबले को याद करते हुए रजत पाटीदार ने स्वीकार किया कि वैभव की पहली पारी ने पूरे मैच का रुख एकतरफा पलट दिया था। ईस्ट जोन की टीम जब शुरुआती झटकों के बाद दबाव में थी, तब वैभव सूर्यवंशी ने काउंटर-अटैक करने का साहसिक फैसला लिया। उन्होंने मैदान के चारों तरफ मैदान मारते हुए महज 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 81 गेंदों पर 7 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के जड़ते हुए 92 रन ठोक डाले।

इस तूफानी पारी के साथ ही वैभव ने दलीप ट्रॉफी के 57 साल पुराने इतिहास को नेस्तनाबूद कर दिया। वह इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में अर्धशतक जड़ने वाले भारत के सबसे युवा बल्लेबाज बन गए। उन्होंने 1969 में लक्ष्मण सिंह (16 वर्ष 23 दिन) द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया। पाटीदार ने कहा, "हम फील्डिंग कर रहे थे और हम हर गेंद के बाद रणनीति बदल रहे थे, लेकिन वैभव हमारे हर प्लान से एक कदम आगे था। स्पिनरों के खिलाफ उसका क्रीज से बाहर निकलकर सीधे साइटस्क्रीन के ऊपर छक्का लगाना यह साबित करता है कि उसे अपनी टाइमिंग पर 100 प्रतिशत भरोसा है। वह शतक से महज 8 रन दूर बदकिस्मती से आउट जरूर हुआ, लेकिन उस पारी का प्रभाव शतक से कहीं अधिक बड़ा था।"

लाल गेंद से लेकर सफेद गेंद तक: बिहार के छोटे से गांव से भारतीय क्रिकेट के शिखर तक का सफर

वैभव सूर्यवंशी की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड स्थित एक छोटे से गांव में पले-बढ़े वैभव को उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने बचपन से ही कड़ा अभ्यास कराया। सीमित संसाधनों, कंक्रीट की टूटी पिचों और गांव के खेतों में प्लास्टिक व लेदर की गेंदों से अभ्यास करते हुए वैभव ने अपनी कला को तराशा। महज 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने बिहार के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी और कूच बिहार ट्रॉफी में रनों का अंबार लगा दिया था।

इसके बाद भारतीय अंडर-19 टीम में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने यूथ टेस्ट में सबसे तेज शतकों में से एक जड़कर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। वर्तमान में लाल गेंद से दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने के साथ-साथ वैभव को आगामी अफगानिस्तान टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज और जापान में होने वाले सुजुकी कप व एशियन गेम्स के संभावित स्क्वॉड में भी शामिल किया गया है। यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है कि वह खेल के तीनों प्रारूपों में समान अधिकार के साथ बल्लेबाजी करने का दम रखते हैं।

सीनियर क्रिकेटरों की सलाह: 'जल्दबाजी में उम्मीदों का बोझ न लादें, इस हीरे को स्वाभाविक चमकने दें'

रजत पाटीदार ने वैभव की जमकर तारीफ करने के साथ-साथ एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ क्रिकेटर के रूप में मीडिया, प्रशंसकों और सिस्टम को एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी। पाटीदार ने कहा कि भारत में जब भी कोई 14-15 साल का लड़का असाधारण प्रदर्शन करता है, तो तुरंत उसकी तुलना सचिन तेंदुलकर या पृथ्वी शॉ से की जाने लगती है। सोशल मीडिया और भारी प्रचार का यह माहौल कई बार युवा खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव बना देता है।

पाटीदार ने आग्रह करते हुए कहा, "वैभव एक दुर्लभ प्रतिभा है, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन हमें उसे एक सामान्य युवा की तरह खुलकर सांस लेने और अपनी गलतियों से सीखने का पूरा स्पेस देना होगा। वह अभी सिर्फ 15 साल का है; उसके करियर में उतार-चढ़ाव भी आएंगे। टीम प्रबंधन, कोच और बीसीसीआई को उसका वर्कलोड और मेंटल वेलबीइंग बहुत संवेदनशीलता के साथ मैनेज करना चाहिए। यदि इस हीरे को सही मार्गदर्शन और सुरक्षा मिली, तो आने वाले एक दशक तक यह लड़का दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की ताकत रखता है।"

रजत पाटीदार के इस बयान ने घरेलू क्रिकेट हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी खेमे के एक स्थापित सीनियर बल्लेबाज द्वारा इतनी सहजता और खुले दिल से 15 साल के प्रतिद्वंद्वी की प्रतिभा को स्वीकार करना खेल भावना की मिसाल तो है ही, साथ ही यह इस बात का भी पक्का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर वैभव सूर्यवंशी के रूप में एक ऐसा नया सितारा उग चुका है, जिसकी रोशनी को लंबे समय तक रोके रखना किसी के लिए मुमकिन नहीं होगा।