बांग्लादेश सीमा पर 'सुरक्षा कवच': फेंसिंग शुरू होते ही सीमावर्ती गांवों में लौटी शांति, ग्रामीणों में खुशी की लहर
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने पदभार संभालते ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। राज्य के सीमावर्ती इलाकों में दशकों से चली आ रही बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ की समस्या पर नकेल कसते हुए, प्रशासन ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। फांसीदेवा इलाके में बाड़ लगाने की तस्वीरें सामने आने के बाद वहां के निवासियों ने इसे 'ऐतिहासिक राहत' करार दिया है।
'खौफनाक था पहले का माहौल'
सीमावर्ती इलाकों के निवासियों ने इस पहल का भावुक स्वागत किया है। स्थानीय निवासी अनिल घोष ने बताया, "पहले यहां सुरक्षा का नामोनिशान नहीं था। माहौल इतना डरावना था कि शब्दों में बयां करना मुश्किल है। पहले हम पशुपालन तक नहीं कर सकते थे, क्योंकि यह बांग्लादेशियों और घुसपैठियों के सामने अपनी संपत्ति सौंप देने जैसा था। यह केवल बंगाल नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा का मुद्दा था।"
एक अन्य निवासी नारायण साहा ने बताया कि वर्षों से सीमा पर बाड़ लगाने की मांग की जा रही थी, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा, "आज जब शुभेंदु अधिकारी ने BSF को जमीन हस्तांतरित करने का कड़ा फैसला लिया, तो हमें लगा कि अब हम खुलकर सांस ले सकते हैं।"
BSF को मिली 27 किलोमीटर जमीन
इस सुरक्षा बदलाव के पीछे मुख्य आधार शुभेंदु सरकार का वह निर्णय है जिसके तहत BSF को सीमा के निकट 27 किलोमीटर लंबी जमीन सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने फेंसिंग के लिए जमीन देने में लगातार असहयोग किया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी। नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही स्पष्ट कर दिया था कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी, ताकि BSF तेजी से बाड़ लगाने का काम पूरा कर सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्राथमिकता
स्थानीय निवासी शिवम मोदक के अनुसार, यह केवल स्थानीय बाड़ का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न है। उन्होंने कहा, "पहले हमें आपसी दुश्मनी और घुसपैठ के कारण हमेशा असुरक्षित महसूस होता था। अब हमें लगता है कि हम चैन से सो सकेंगे।"
विशेषज्ञों का मानना है कि सिलीगुड़ी सब-डिवीजन के इस इलाके में बाड़ लगने से अवैध तस्करी और घुसपैठ की गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी। स्थानीय प्रशासन और BSF के बीच बढ़ रहे तालमेल को देखते हुए, सीमावर्ती गांवों में अब एक नई उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित और व्यवस्थित होगा।