BREAKING:
July 15 2026 04:48 pm

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा: कोलकाता से होगी शुरुआत, क्वाड बैठक पर टिकी हैं निगाहें

Post

India News Live,Digital Desk : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार, 23 मई से चार दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में विदेश विभाग की कमान संभालने के बाद रूबियो की यह पहली भारत यात्रा है। इस दौरे की सबसे खास बात उनकी कोलकाता यात्रा है, जो कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कोलकाता क्यों है दौरे का केंद्र?

अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता जाना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व रखता है।

ऐतिहासिक विरासत: कोलकाता में स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास दुनिया के सबसे पुराने दूतावासों में से एक है, जिसकी स्थापना 1792 में हुई थी।

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत पर नजर: यह दूतावास न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि बिहार, झारखंड, सिक्किम और पूरे पूर्वोत्तर भारत (7 सिस्टर्स) के 11 राज्यों में अमेरिकी वाणिज्यिक हितों की निगरानी का मुख्य केंद्र है।

लंबा अंतराल: हिलेरी क्लिंटन के 2012 के दौरे के बाद, एक दशक से अधिक समय में कोलकाता जाने वाले रूबियो पहले अमेरिकी विदेश मंत्री होंगे। राज्य में हालिया राजनीतिक बदलावों और नई सरकार के गठन के बीच यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

क्वाड (QUAD) की अहम बैठक और भारत का महत्व

अपनी यात्रा के अंतिम चरण में, 26 मई को रूबियो 'क्वाड' (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बैठक के लिए ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भी नई दिल्ली पहुंच रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा 'मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र' (Free and Open Indo-Pacific) है। सदस्य देश पिछले वर्ष वॉशिंगटन में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे और निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे:

सुरक्षा सहयोग: क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और साझा चुनौतियों का सामना करना।

आपूर्ति श्रृंखला: महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना।

बहुपक्षीय एजेंडा: मौजूदा क्वाड पहलों की प्रगति की समीक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा।

द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा

रूबियो अपनी इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। साथ ही, उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करने की संभावना है। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, रूबियो की यह यात्रा ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-अमेरिका की साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में, जहाँ वैश्विक स्तर पर समीकरण बदल रहे हैं, क्वाड की यह बैठक भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अमेरिका के साथ उसके बढ़ते भरोसे को और मजबूती देगी।