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July 31 2026 08:20 am

PoK में बगावत की सजा सीधे 'मौत'! 4 कश्मीरी नेताओं पर 1-1 करोड़ का इनाम; जानें क्यों सुलग रहा है पूरा इलाका

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मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस वक्त चीख-पुकार मची हुई है और हालात पूरी तरह से गृहयुद्ध (Civil War) जैसे हो चुके हैं। बुनियादी अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ आंदोलन अब कश्मीरी जनता और पाकिस्तानी फौज के बीच सीधे महासंग्राम में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत इस कदर बौखला गई है कि उसने आंदोलन की कमान संभाल रहे 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के 4 प्रमुख नेताओं के सिर पर 1-1 करोड़ रुपये (पाकिस्तानी) का इनाम रख दिया है। वहीं, फौज की अंधाधुंध गोलीबारी में अब तक 100 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।

आसमान से बरसीं गोलियां: घर की छत पर खड़े डॉक्टर और महिला की मौत

मीरपुर विजन (मीरपुर, भिंबर और कोटली जिले) से शुरू हुआ प्रदर्शनकारियों का मार्च जैसे ही मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ा, पाकिस्तानी दंगा रोधी पुलिस और रेंजर्स ने उन पर हिंसक हमला बोल दिया। सबसे भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाली झड़पें कोटली शहर में हुईं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फौज की ओर से की गई सीधी फायरिंग में एक स्थानीय डॉक्टर और एक महिला समेत कई लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उक्त डॉक्टर महज अपने घर की छत पर खड़े होकर स्थिति देख रहे थे, तभी पाकिस्तानी जवानों ने उन्हें निशाना बना दिया। इस खूनी संघर्ष में अब तक 400 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

कश्मीरी नेताओं पर देशद्रोह का केस, 'हेड मनी' के तौर पर करोड़ों का इनाम

PoK के गृह विभाग ने दमनकारी रुख अपनाते हुए JAAC के शीर्ष नेताओं— शौकत नवाज मीर (मुजफ्फराबाद) और मेहरान अरशद ख्वाजा (मीरपुर) के खिलाफ सीधे देशद्रोह (Treason) का मुकदमा दर्ज कर दिया है। इन नेताओं पर अपने वीडियो और भाषणों के जरिए जनता को पाकिस्तान के खिलाफ भड़काने का आरोप है। इसके साथ ही, आंदोलन का चेहरा बन चुके चार प्रमुख कश्मीरी नेताओं— शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, ख्वाजा मेहरान अरशद और सरदार अमान खान की गिरफ्तारी के लिए 'हेड मनी' (सिर की कीमत) के रूप में 1-1 करोड़ रुपये के इनाम का आधिकारिक एलान किया गया है।

इंटरनेट पूरी तरह ठप, वकीलों ने किया अदालतों का बहिष्कार

दुनिया के सामने अपनी बर्बरता को छिपाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे PoK में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। मुजफ्फराबाद, मीरपुर और कोटली जैसे शहरों में कंपलीट शटडाउन है। बाजार, बैंक, परिवहन और यहां तक कि मेडिकल स्टोर भी पूरी तरह बंद हैं। इस बीच, JAAC के कोर मेंबर और वरिष्ठ वकील अमजद अली खान की अवैध गिरफ्तारी के विरोध में PoK के सभी वकीलों ने न्यायिक कामकाज का पूरी तरह बहिष्कार करते हुए अदालतों में ताला लगा दिया है।

'विदेशी ताकतों' का बहाना और हथियारों की बरामदगी का दावा

अपनी इस हिंसक कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने मुजफ्फराबाद से पांच संदिग्धों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। सरकारी समाचार एजेंसी (APP) के मुताबिक, इन संदिग्धों के पास से 7 स्वचालित राइफल्स, हैंड ग्रेनेड और सैन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। पाकिस्तान का दावा है कि ये लोग विदेशी खुफिया एजेंसियों (इशारा भारत की तरफ) के संपर्क में थे और क्षेत्र में अशांति फैलाना चाहते थे, जिसे स्थानीय कश्मीरी जनता पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी बता रही है।

क्यों सुलग रहा है PoK? जानिए विवाद की असली जड़

PoK में भड़की इस बगावत की सबसे बड़ी और मुख्य वजह 27 जुलाई को होने वाले विधायी चुनाव हैं। पाकिस्तान सरकार ने कुल 45 विधानसभा सीटों में से 12 सीटें 'शरणार्थियों' (रिफ्यूजी) के लिए आरक्षित कर दी हैं। नागरिक समाज और JAAC का आरोप है कि इन 12 सीटों का इस्तेमाल इस्लामाबाद में बैठी सरकारें PoK में अपनी मर्जी की 'कठपुतली सरकार' चुनने और धांधली करने के लिए करती हैं, क्योंकि इन सीटों पर वोट देने वाले लोग वास्तव में PoK में रहते ही नहीं हैं। इसके अलावा स्थानीय जनता लंबे समय से बिजली संकट, रिकॉर्डतोड़ महंगाई, बेरोजगारी, अपने ही प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और खुद पर 'आतंकी' होने का ठप्पा लगाए जाने के खिलाफ आक्रोशित है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर घिराव, भारत ने दी पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी

PoK के इस भयावह मंजर पर एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) और ह्यूमन राइट्स कमिशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने गहरी चिंता जताते हुए मनमानी गिरफ्तारियों और इंटरनेट शटडाउन को तुरंत खत्म करने की मांग की है।

वहीं, भारत सरकार ने कश्मीरी नागरिकों पर हो रहे इस जुल्म के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी सेना की कड़ी निंदा करते हुए वैश्विक मंच पर कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके इस गंभीर मानवाधिकार हनन, ज्यादतियों और दुष्कर्मों के लिए कड़ाई से जवाबदेह ठहराएगा।" इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ता दिख रहा है।