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August 19 2026 02:43 am

सावन सोमवार 2026: काशी विश्वनाथ के 4 अलौकिक स्वरूपों में होंगे दर्शन, जानें किस दिन होगा कौन सा खास शृंगार?

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ धाम में सावन के पावन महीने को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। आज 30 जुलाई 2026 से सावन का शुभारंभ हो चुका है और पूरी काशी शिवमय हो गई है। शिवभक्तों के लिए इस बार का सावन बेहद खास होने वाला है, क्योंकि पूरे महीने में पड़ने वाले चार सोमवार को बाबा विश्वनाथ चार अलग-अलग और अलौकिक स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर प्रशासन द्वारा इन दिव्य शृंगारों की भव्य तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। आइए जानते हैं कि पहले सोमवार से लेकर सावन पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक बाबा किन-किन स्वरूपों में भक्तों का कल्याण करेंगे।

पहला सोमवार (3 अगस्त 2026): भव्य शंकर स्वरूप

सावन के पहले सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में बाबा का अति मनमोहक 'शंकर स्वरूप' में शृंगार किया जाएगा। इस खास दिन गर्भगृह में बाबा की एक अस्थायी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे विभिन्न प्रकार के सुगंधित और दुर्लभ फूलों से सजाया जाएगा। शिवभक्त इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन मंदिर की प्रसिद्ध सप्तऋषि आरती के बाद ही कर सकेंगे, जिसका इंतजार काशीवासी और श्रद्धालु पूरे साल बेसब्री से करते हैं।

दूसरा सोमवार (10 अगस्त 2026): गौरी शंकर का दुर्लभ शृंगार

सावन के दूसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ का शृंगार 'गौरी शंकर' स्वरूप में होगा। यह शृंगार अपने आप में बेहद अद्भुत और निराला माना जाता है, जिसमें भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती के एक साथ दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पूरे वर्ष में केवल इसी दिन बाबा इस विशेष गौरी शंकर स्वरूप में दर्शन देते हैं, इसलिए इस दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

तीसरा सोमवार (17 अगस्त 2026): अलौकिक अर्धनारीश्वर रूप

तीसरे सोमवार को शिव और शक्ति के मिलन का सबसे भव्य रूप यानी 'अर्धनारीश्वर स्वरूप' का शृंगार किया जाएगा। इस स्वरूप में बाबा का आधा हिस्सा शिव का और आधा हिस्सा माता पार्वती का होता है। काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिव्य और अलौकिक शृंगार को लेकर तैयारियां काफी पहले से शुरू कर दी जाती हैं ताकि भक्तों को एक अविस्मरणीय अनुभव मिल सके।

चौथा सोमवार (24 अगस्त 2026): 5 लाख रुद्राक्षों से महाशृंगार

सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को बाबा का 'रुद्राक्ष स्वरूप' शृंगार किया जाएगा, जो देखने में बेहद भव्य होता है। इस दिन लगभग 5 लाख पवित्र रुद्राक्ष के दानों का उपयोग करके ज्योतिर्लिंग और गर्भगृह को सजाया जाता है। दर्शन के बाद, बाबा पर अर्पित किए गए इन सिद्ध रुद्राक्षों को श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है, जिसे भक्त अपने घरों में सुख-समृद्धि के लिए स्थापित करते हैं।

रक्षाबंधन (27-28 अगस्त 2026): सपरिवार दिव्य झूला शृंगार

सावन माह के अंतिम दिन यानी सावन पूर्णिमा के अवसर पर, जिस दिन देशभर में रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा, बाबा विश्वनाथ का मनमोहक 'झूला शृंगार' किया जाएगा। इस दिन महादेव माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ अपने पूरे परिवार के संग एक भव्य झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। यह दृश्य हर शिवभक्त के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं होता है।