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July 23 2026 05:51 pm

RBI makes major changes to BSBD accounts : अब मिलेगी ज्यादा सुविधाएँ, कम पड़ेंगे बैंकिंग चार्जेस

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India News Live,Digital Desk : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) खाते में अहम बदलाव किए हैं, जिससे आम ग्राहकों को राहत मिली है। इन बदलावों में असीमित मासिक जमा, बिना किसी नवीनीकरण शुल्क के मुफ़्त एटीएम या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल, प्रति वर्ष कम से कम 25 पन्नों की मुफ़्त चेकबुक, इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग और पासबुक या मासिक स्टेटमेंट शामिल हैं। रिजर्व बैंक ने बैंकों को BSBD में बदलाव करने के लिए सात दिन का समय दिया है।

अब निःशुल्क निकासी की सीमा क्या होगी?

बैंकों को अपने एटीएम और अन्य बैंकों से किए गए लेनदेन सहित, प्रति माह कम से कम चार मुफ़्त निकासी की अनुमति देनी होगी। इस नए नियम के तहत, यूपीआई, आईएमपीएस, एनईएफटी और आरटीजीएस जैसे डिजिटल भुगतान लेनदेन को निकासी नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि इन डिजिटल लेनदेन के लिए उपयोगकर्ताओं से अलग से शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मौजूदा बीएसबीडी खाताधारक नई शुरू की गई सुविधाओं का अनुरोध कर सकते हैं, जबकि नियमित बचत खाताधारक अपने खातों को बीएसबीडी खातों में बदल सकते हैं, बशर्ते उनका पहले से किसी अन्य बैंक में खाता न हो। ये नए बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे, हालाँकि बैंक अपने विवेकानुसार इन्हें पहले भी अपना सकते हैं। आरबीआई ने अपने उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण दिशानिर्देश, 2025 को अद्यतन करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इससे बैंकों द्वारा पेश किए जाने वाले बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (बीएसबीडी) खातों की रूपरेखा में आधिकारिक रूप से बदलाव आएगा।

बदलावों पर एक नज़र

  • महीने में कम से कम चार बार पैसा निकालने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • कार्ड स्वाइप (PoS), NEFT, RTGS, UPI और IMPS जैसे डिजिटल भुगतान चार बार की सीमा में नहीं गिने जाएंगे।
  • प्रति वर्ष कम से कम 25 पृष्ठों वाली चेकबुक, निःशुल्क इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग, तथा निःशुल्क पासबुक या मासिक विवरण भी उपलब्ध होगा।
  • एटीएम और डेबिट कार्ड बिना किसी वार्षिक शुल्क के उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस परिवर्तन का उद्देश्य क्या है?

इन बदलावों को लागू करने का उद्देश्य बीएसबीडी खातों तक लोगों की पहुँच बढ़ाना है ताकि लोग इसके लाभों को समझ सकें। ये नए नियम स्थानीय क्षेत्र के बैंकों, ग्रामीण सहकारी बैंकों, शहरी सहकारी बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों सहित सभी बैंकों पर लागू होंगे।