मंगल का कर्क राशि में गोचर 18 सितंबर से: गुरु-मंगल की युति से बनेगा नीचभंग राजयोग
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के सेनापति मंगल का राशि परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है। साहस, पराक्रम, भूमि, रक्त और ऊर्जा के कारक मंगल देव 18 सितंबर को अपनी नीच राशि कर्क में गोचर करने जा रहे हैं। कर्क राशि में देवगुरु बृहस्पति पहले से ही उच्च अवस्था या शुभ स्थिति में गोचरस्थ रहेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में प्रवेश करता है और उस भाव के स्वामी या उच्च ग्रह के साथ युति बनाता है, तो वहां अत्यंत शुभकारी 'नीचभंग राजयोग' का निर्माण होता है। मंगल और गुरु का यह दुर्लभ मिलन आगामी दो महीनों तक बना रहेगा। गुरु ज्ञान, विस्तार, धर्म और समृद्धि के प्रतीक हैं, वहीं मंगल शक्ति, पराक्रम और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के कारक हैं। जब यह दोनों बड़े ग्रह एक साथ आते हैं, तो जातक के जीवन में धन, पद-प्रतिष्ठा और करियर में युगांतरकारी बदलाव देखने को मिलते हैं। इस गोचर का प्रभाव वैसे तो सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनकी सोई हुई किस्मत जागने वाली है।
मंगल का नीच राशि में प्रवेश और नीचभंग राजयोग का प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के मूल सिद्धांतों के अनुसार मंगल देव मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी हैं तथा मकर राशि में उच्च और कर्क राशि में नीच के माने जाते हैं। सामान्यतः नीच राशि में ग्रहों के बल में कमी आ जाती है, परंतु देवगुरु बृहस्पति के साथ होने से मंगल का नीचत्व समाप्त हो जाता है और वह विपरीत फल देने के बजाय अत्यंत शुभ राजयोगकारी बन जाता है। इस युति को धर्म-कर्म और पराक्रम का अनूठा संगम कहा जाता है। दो महीने की यह अवधि व्यापार विस्तार, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, रियल एस्टेट कारोबारियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत जातकों के लिए स्वर्ण काल की तरह सिद्ध होगी। अचानक धन लाभ के योग बनेंगे और लंबे समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
मेष राशि: मान-सम्मान और अचल संपत्ति में भारी वृद्धि
मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल देव हैं और यह युति आपके चतुर्थ भाव में बनने जा रही है। चतुर्थ भाव सुख, माता, भूमि, भवन और वाहन का कारक होता है। गुरु और मंगल का एक साथ बैठना मेष राशि के जातकों को पैतृक संपत्ति से बड़ा लाभ दिलाएगा। यदि आप नया मकान, फ्लैट या वाहन खरीदने का विचार कर रहे थे, तो इन दो महीनों में आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। कार्यक्षेत्र में आपके पराक्रम और सूझबूझ की सराहना होगी। वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा, जिससे पदोन्नति के मजबूत आसार बनेंगे। व्यापारियों के लिए नया निवेश लाभकारी रहेगा। पारिवारिक वातावरण सुखद और सौहार्दपूर्ण रहेगा तथा माता के स्वास्थ्य में सुधार आएगा।
कर्क राशि: केंद्र भाव में लग्न का प्रभाव और जबरदस्त करियर ग्रोथ
कर्क राशि में ही यह गोचर हो रहा है, अतः मंगल और गुरु की युति आपकी कुंडली के प्रथम यानी लग्न भाव में होगी। लग्न भाव में नीचभंग राजयोग बनने से आपके व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण और आत्मविश्वास देखने को मिलेगा। जो जातक अब तक अनिर्णय की स्थिति में थे, वे अब अपने करियर को लेकर ठोस और लाभकारी निर्णय लेंगे। समाज में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। व्यापार में साझेदारी के नए प्रस्ताव मिल सकते हैं जो भविष्य में भारी मुनाफा देंगे। अविवाहित जातकों के लिए विवाह के उत्तम प्रस्ताव आ सकते हैं। जीवनसाथी के भाग्य से भी धन आगमन के नए स्रोत बनेंगे और आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में कई गुना अधिक सुदृढ़ होगी।
वृश्चिक राशि: भाग्य का पूरा साथ और धार्मिक कार्यों से प्रतिष्ठा
वृश्चिक राशि के स्वामी भी मंगल हैं और यह युति आपकी राशि से नवम भाव यानी भाग्य भाव में बनेगी। नवम भाव में गुरु-मंगल की युति का बनना किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। पिछले कई महीनों से जिन कार्यों में रुकावटें आ रही थीं, वे अब भाग्य के सहयोग से स्वतः ही सुलझने लगेंगे। उच्च शिक्षा की दिशा में प्रयासरत छात्रों को मनचाहे संस्थान में दाखिला मिल सकता है। विदेश यात्रा या लंबी दूरी की धार्मिक यात्राओं के मजबूत योग बन रहे हैं। पैतृक कारोबार में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। इस दौरान किया गया कोई भी वित्तीय निवेश लंबे समय तक आपको लाभ देता रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ेगी, जिससे आपका मान-सम्मान कई गुना बढ़ेगा।
मीन राशि: संतान सुख, आकस्मिक धन लाभ और बौद्धिक विजय
मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं और यह युति आपके पंचम भाव यानी ज्ञान, बुद्धि, संतान और प्रेम के भाव में बनने जा रही है। पंचम भाव में मंगल और गुरु का संयोग मीन राशि के जातकों के लिए धन की वर्षा कराने वाला सिद्ध हो सकता है। शेयर बाजार, सट्टा, लॉटरी या किसी पुराने निवेश से आकस्मिक धन लाभ होने की प्रबल संभावनाएं हैं। जो जातक रचनात्मक क्षेत्र, शिक्षा, परामर्श, कानून या मीडिया से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय मील का पत्थर साबित होगा। संतान की ओर से कोई बड़ी सुखद खबर मिल सकती है जिससे परिवार का गौरव बढ़ेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों को सफलता प्राप्त होगी और बौद्धिक क्षमता में गजब की स्पष्टता आएगी।
मंगल के गोचर काल में इन सावधानियों और उपायों का रखें ध्यान
यद्यपि यह युति नीचभंग राजयोग के चलते अपार धन और सौभाग्य देने वाली है, परंतु मंगल अग्नि तत्व का ग्रह है और कर्क जल तत्व की राशि है। जल और अग्नि के इस मिलन के कारण कुछ जातकों में अचानक क्रोध, मानसिक उद्वेग या रक्तचाप से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। क्रोध और अहंकार पर नियंत्रण रखना इस गोचर काल की सबसे बड़ी कुंजी है। शुभ प्रभावों को और अधिक बढ़ाने के लिए प्रत्येक मंगलवार को भगवान श्री हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें तथा हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। गुरुवार के दिन केसर का तिलक लगाएं और चने की दाल व गुड़ का दान करें। वाणी में मधुरता बनाए रखने से गुरु और मंगल दोनों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होगा।