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September 11 2026 06:20 pm

हरतालिका तीज 2026: पूजा शुरू करने से पहले घर ले आएं ये जरूरी चीजें, यहां देखें संपूर्ण पूजन सामग्री की चेकलिस्ट

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सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज का महापर्व सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए निर्जला व निराहार रखा जाता है। इस पावन अवसर पर भगवान देवाधिदेव महादेव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की बालू या काली मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का षोडशोपचार विधि से चार प्रहर पूजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा अत्यंत नियमबद्ध और विस्तृत होती है, जिसमें किसी भी एक आवश्यक सामग्री का अभाव पूजा के संकल्प में व्यवधान डाल सकता है। इसलिए पूजा का शुभ मुहूर्त आरंभ होने से पहले ही सभी जरूरी सामग्रियां एकत्रित कर लेना आवश्यक होता है।

भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा निर्माण की आवश्यक सामग्री

हरतालिका तीज पर बाजार से लाई गई धातु या पत्थर की मूर्तियों के स्थान पर स्वयं अपने हाथों से बनाई गई पार्थिव प्रतिमाओं के पूजन का विशेष विधान है। इस कार्य के लिए किसी पवित्र नदी, सरोवर या किसी साफ-सुथरे स्थान की शुद्ध बालू रेत अथवा चिकनी काली मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही चौकी पर बिछाने के लिए बिना कटा-फटा पीला या लाल सूती कपड़ा, गंगाजल, प्रतिमाओं को स्थापित करने के लिए लकड़ी की एक साफ चौकी या पाटा, कलश स्थापना के लिए तांबे या मिट्टी का नया कलश, जटा वाला नारियल और आम अथवा अशोक के 5 या 7 ताजे पत्ते पूजा से पूर्व अवश्य घर लाकर रख लें।

माता पार्वती के लिए संपूर्ण 16 श्रृंगार और सुहाग पिटारी

हरतालिका तीज का मुख्य उद्देश्य अखंड सौभाग्य की कामना है, इसलिए माता गौरी को समर्पित की जाने वाली सुहाग पिटारी का पूर्ण होना अनिवार्य माना गया है। इस पिटारी में हरे या लाल रंग की कांच की चूड़ियां, कुमकुम, सिंदूर, बिंदी, आलता (महावर), मेहंदी का कोन, काजल, बिछिया (चांदी या गिलट की), कंघी, शीशा, सुगंधित तेल, लाल रिबन, नेलपॉलिश, इत्र की शीशी और माता के लिए लाल चुनरी या जरीदार साड़ी अवश्य सम्मिलित होनी चाहिए। सुहाग के इन सभी द्रव्यों को एक बांस की डलिया या सुहाग पिटारी में सजाकर पूजा वेदी के समक्ष रखा जाता है।

भगवान शिव और श्री गणेश के अभिषेक व अर्पण की सामग्री

भगवान भोलेनाथ और विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा के लिए ताजे बेलपत्र (जो कहीं से कटे या सूखे न हों), शमी पत्र, धतूरा, भांग की पत्तियां, सफेद आंकड़े (मदार) के फूल, जनेऊ का जोड़ा (भगवान शिव और गणेश जी के लिए अलग-अलग), चंदन (सफेद और पीला), भस्म, अक्षत (अखंडित चावल), मौली (कलावा), और अभिषेक के लिए पंचामृत की सामग्री जैसे गाय का कच्चा दूध, शुद्ध दही, देसी घी, शहद और गंगाजल का प्रबंध पहले से कर लें। भगवान गणेश जी के लिए दूर्वा घास और सिंदूर की आवश्यकता विशेष रूप से होती है।

मंडप, फुलेरा और नेवेद्य-प्रसाद की जरूरी सूची

हरतालिका तीज की पूजा में चौकी के ऊपर फूलों का एक सुंदर मंडप तैयार किया जाता है जिसे 'फुलेरा' कहा जाता है। इसे सजाने के लिए विभिन्न रंगों के ताजे मौसमी फूल, केले के चार खंभे या केले के पत्ते, आम के पल्लव और रंग-बिरंगे धागे आवश्यक होते हैं। भोग और प्रसाद के लिए पांच प्रकार के मौसमी फल (विशेषकर केला, सेब, अनार, नाशपाती और अमरूद), खीरे का फल, पान के पत्ते, साबुत सुपारी, लौंग, छोटी इलायची, बताशे, कपूर, धूपबत्ती, शुद्ध घी, दीपक के लिए रुई की बत्तियां और भोग के लिए पारंपरिक रूप से बनने वाली गुझिया, मठरी, पेड़ा या हलवा तैयार करने की सामग्री समय रहते एकत्रित कर लेनी चाहिए।

पूजन शुरू करने से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान

पूजा सामग्री लाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी फल, पत्ता या फूल बासी अथवा खंडित न हो। पूजा से एक दिन पूर्व ही सभी सामग्रियों को अलग-अलग थालियों में व्यवस्थित करके रख लें ताकि चार प्रहर की रात्रि पूजा के दौरान किसी भी वस्तु की खोज में ध्यान भंग न हो। साथ ही हरतालिका तीज की व्रत कथा की पुस्तक और आरती की थाली पहले से तैयार रखें ताकि पूजा पूरे विधि-विधान और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।