राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं: सिखों पर टिप्पणी मामले में सुनवाई पूरी, 6 जून को आएगा कोर्ट का फैसला
India News Live,Digital Desk : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा अमेरिका में सिखों को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी का मामला अब निर्णायक मोड़ पर है। वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले में सुनवाई पूरी हो गई है और अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में 6 जून 2026 को फैसला सुनाया जा सकता है।
मामला क्या है?
यह पूरा विवाद राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था। तिलमापुर सारनाथ क्षेत्र के पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्र ने इस बयान के खिलाफ वाराणसी की अदालत में वाद दाखिल किया था। शुरुआती दौर में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) चतुर्थ की अदालत ने इस वाद को खारिज कर दिया था। इसके बाद, नागेश्वर मिश्र ने अपने अधिवक्ता अलख नारायण राय के जरिए विशेष सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में निगरानी याचिका दायर की। अदालत ने इस याचिका पर राहुल गांधी को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया था, लेकिन उनकी ओर से कोई हाजिर नहीं हुआ। अंततः, न्यायालय ने नोटिस तामीला को पर्याप्त मानते हुए शनिवार को मामले की सुनवाई पूरी कर ली।
हिंदू महासभा की नई मांग
एक तरफ वाराणसी में सिखों पर टिप्पणी का मामला कोर्ट में है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी के खिलाफ एक और मोर्चा खुल गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस पर की गई एक अन्य टिप्पणी को लेकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी है। उनका आरोप है कि 20 मई को अमेठी में आयोजित एक सभा में राहुल गांधी ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। पुलिस ने इस तहरीर पर जांच शुरू कर दी है और शिकायतकर्ता से वीडियो साक्ष्य (Video Evidence) मांगे गए हैं।
राजनीतिक बवाल और कानूनी चुनौतियां
राहुल गांधी के बयानों को लेकर यह दोहरा कानूनी दबाव उनकी राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा सकता है:
न्यायिक निगरानी: वाराणसी कोर्ट का 6 जून को आने वाला फैसला यह तय करेगा कि सिखों पर टिप्पणी के मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही किस दिशा में जाएगी।
साक्ष्य की मांग: लखनऊ में हिंदू महासभा द्वारा दी गई तहरीर के बाद पुलिस की जांच इस बात पर निर्भर करेगी कि मुहैया कराए गए वीडियो साक्ष्य कितने पुष्ट हैं।
राहुल गांधी के खिलाफ एक के बाद एक बढ़ रही कानूनी आपत्तियां आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रस्साकशी का कारण बन सकती हैं।