'ट्रंप तीसरी बार बनेंगे राष्ट्रपति': प्रोफेसर जियांग की नई भविष्यवाणी से मचा अंतरराष्ट्रीय हड़कंप; 2024 की जीत और ईरान युद्ध का दावा हो चुका है सच

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वाशिंगटन/काठमांडू: अपनी सटीक भू-राजनीतिक गणनाओं और भविष्यवाणियों के लिए दुनिया भर में 'चीन के नास्त्रेदमस' के नाम से चर्चित प्रोफेसर जियांग श्यूचिन (Professor Jiang Xueqin) ने अमेरिकी राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। प्रोफेसर जियांग का दावा है कि वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने के बाद एक बार फिर सत्ता के शीर्ष पर काबिज होंगे और तीसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे। यह भविष्यवाणी ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस का केंद्र बन गई है जब खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 'Trump 2028' लिखी हुई कैप पहनकर "वी आर गोइंग टू विन" का संदेश साझा किया है। अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति पद के लिए अधिकतम दो कार्यकालों की सख्त पाबंदी होने के बावजूद प्रोफेसर जियांग का दावा है कि कानूनी लूपहोल्स या असाधारण भू-राजनीतिक परिस्थितियों के जरिए ट्रंप का तीसरा कार्यकाल संभव हो सकता है।

'चीन के नास्त्रेदमस' प्रोफेसर जियांग कौन हैं? गेम थ्योरी और 'प्रेडिक्टिव हिस्ट्री' का मॉडल

येल यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त प्रोफेसर जियांग श्यूचिन दर्शनशास्त्र, इतिहास और भू-राजनीतिक मामलों के जाने-माने विश्लेषक हैं। वे अपनी भविष्यवाणियों को किसी अलौकिक या ज्योतिषीय विद्या के बजाय पूरी तरह से वैज्ञानिक व विश्लेषणात्मक ढांचे पर आधारित बताते हैं। प्रोफेसर जियांग इसे 'प्रेडिक्टिव हिस्ट्री' (Predictive History) और 'गेम थ्योरी' (Game Theory) का संगम कहते हैं।

इस पद्धति के अंतर्गत पिछले 500 वर्षों के ऐतिहासिक पैटर्न, वैश्विक आर्थिक रुझानों, राजनीतिक नेताओं के व्यक्तिगत व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन की रणनीतिक प्राथमिकताओं का गणितीय और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। प्रोफेसर जियांग का मानना है कि इतिहास अपने मूलभूत ढांचों को दोहराता है और यदि किसी नेता के मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल और देश की आंतरिक व्यवस्था का सही अध्ययन किया जाए, तो भविष्य के बड़े फैसलों का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

2024 की वापसी और ईरान टकराव: प्रोफेसर जियांग की पिछली कौन सी भविष्यवाणियां हुईं सच?

प्रोफेसर जियांग की इस नई भविष्यवाणी को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषक इसलिए भी गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि मई 2024 में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान की गई उनकी पिछली दो भविष्यवाणियां काफी हद तक सटीक साबित हुई हैं।

उनकी पहली प्रमुख भविष्यवाणी यह थी कि नवंबर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप अप्रत्याशित और ऐतिहासिक राजनीतिक वापसी करेंगे और फिर से व्हाइट हाउस पहुंचेंगे। यह दावा सच साबित हुआ जब ट्रंप ने चुनाव जीतकर जनवरी 2025 में 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

उनकी दूसरी भविष्यवाणी यह थी कि ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंचेगा और अमेरिका-ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव देखने को मिलेगा। 2025 और 2026 के दौरान खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक तनाव, ड्रोन हमलों और सैन्य झड़पों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने उनकी इस भविष्यवाणी को भी सुर्खियों में ला दिया। इसके अलावा, उनकी तीसरी चेतावनी यह है कि यदि अमेरिका मध्य पूर्व के जटिल और पहाड़ी युद्धक्षेत्र में पूरी तरह उलझता है, तो यह एक लंबी और थका देने वाली 'वॉर ऑफ एट्रिशन' (War of Attrition) साबित हो सकती है, जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवस्था में भारी बदलाव आएगा।

अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन: क्या कोई व्यक्ति तीसरी बार बन सकता है राष्ट्रपति?

प्रोफेसर जियांग के इस नए दावे के सामने सबसे बड़ा सवाल अमेरिकी संविधान और उसकी कानूनी सीमाओं का उठता है। अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन (22nd Amendment) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति पद के लिए 'निर्वाचित' (Elected) नहीं हो सकता।

यह संशोधन 1951 में उस समय लाया गया था जब फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट लगातार चार बार राष्ट्रपति चुने गए थे। इसके बाद अमेरिका में यह परंपरा कानून बन गई कि कोई भी नागरिक केवल दो कार्यकाल (कुल 8 वर्ष) ही राष्ट्रपति रह सकता है। चूंकि डोनाल्ड ट्रंप 2016 में पहली बार और 2024 में दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं, ऐसे में सामान्य चुनावी प्रक्रिया के तहत 2028 में उनके दोबारा सीधे राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने पर संवैधानिक रोक लगी हुई है।

संवैधानिक लूपहोल और इमरजेंसी वॉर पावर्स: कैसे संभव हो सकता है तीसरा कार्यकाल?

प्रोफेसर जियांग ने अपने विश्लेषण में उन कानूनी और रणनीतिक रास्तों का उल्लेख किया है, जिनके जरिए यह अप्रत्याशित परिदृश्य साकार हो सकता है:

22वें संशोधन का भाषाई लूपहोल: प्रोफेसर जियांग के अनुसार, संविधान का 22वां संशोधन कहता है कि कोई व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति 'चुना' नहीं जा सकता, लेकिन यह नहीं कहता कि वह किसी अन्य संवैधानिक पद के जरिए राष्ट्रपति के रूप में 'कार्य' नहीं कर सकता। उदाहरण के लिए, यदि ट्रंप 2028 में किसी अन्य नेता (जैसे जेडी वेंस) के टिकट पर उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनते हैं और चुनाव जीतने के बाद राष्ट्रपति स्वेच्छा से पद से इस्तीफा दे देते हैं, तो उत्तराधिकार कानून (Line of Succession) के तहत ट्रंप पुनः राष्ट्रपति का पद संभाल सकते हैं।

युद्धकालीन आपातकालीन अधिकार (Emergency War Powers): जियांग का दूसरा तर्क यह है कि यदि अमेरिका मध्य पूर्व या किसी अन्य मोर्चे पर बड़े पैमाने के अंतरराष्ट्रीय युद्ध में शामिल होता है, तो असाधारण परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आपातकालीन शक्तियों का हवाला देकर चुनावों या सत्ता हस्तांतरण को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित या पुनर्परिभाषित किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का वैचारिक संतुलन: विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा कोई संवैधानिक विवाद उत्पन्न होता है, तो मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा, जहां कंजर्वेटिव जजों के मजबूत बहुमत के चलते कानूनी व्याख्याओं पर नए सिरे से बहस छिड़ सकती है।

ट्रंप का '2028' कैप वाला पोस्ट: राजनीतिक हलकों में क्यों तेज हुई सुगबुगाहट?

इस भविष्यवाणी को हवा तब मिली जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे 'Trump 2028' लिखी हुई लाल टोपी पहने नजर आए। हालांकि, कुछ ही दिन पहले मैरीलैंड के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने स्वीकार किया था कि 22वें संशोधन का कानून बहुत सख्त है और वे चुनाव लड़ना पसंद करेंगे लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं देता।

राजनीतिक पंडितों के अनुसार, ट्रंप के इस प्रकार के बयानों और पोस्ट्स के दो पहलू हो सकते हैं। पहला, यह अपने राजनीतिक विरोधियों और डेमोक्रेटिक पार्टी को मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव में रखने और अपने कोर 'मागा' (MAGA) समर्थकों में ऊर्जा बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। दूसरा, यह अमेरिकी जनमानस में एक विमर्श खड़ा करने का प्रयास हो सकता है ताकि भविष्य की परिस्थितियों में किसी भी वैकल्पिक राजनीतिक मार्ग के लिए जमीन तैयार रखी जा सके।

वैश्विक व्यवस्था और अमेरिकी लोकतंत्र पर इस बहस का क्या होगा असर?

प्रोफेसर जियांग की इस भविष्यवाणी ने न केवल अमेरिका के घरेलू राजनीतिक गलियारों में बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। यदि अमेरिका में राष्ट्रपति पद के कार्यकालों की संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर कोई बड़ा विवाद खड़ा होता है, तो इसका असर अमेरिकी लोकतंत्र की साख, संस्थागत स्थिरता और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ना तय है।

यूरोपीय सहयोगियों से लेकर एशियाई शक्तियों तक सभी देश वाशिंगटन के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, अधिकांश अमेरिकी संवैधानिक कानून विशेषज्ञ मानते हैं कि 22वें संशोधन की सीमाओं को तोड़ना या बायपास करना कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद कठिन और अभूतपूर्व संकट को जन्म देने वाला कदम होगा। आने वाले वर्षों में 2028 के चुनाव की दिशा और ट्रंप प्रशासन के कूटनीतिक फैसले ही यह तय करेंगे कि प्रोफेसर जियांग का यह विश्लेषण केवल एक काल्पनिक सिद्धांत बनकर रह जाता है या फिर इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।