2027 की तैयारी: यूपी में भाजपा का 'विधायक रिपोर्ट कार्ड' अभियान, सर्वे से तय होगा टिकट का गणित

Post

India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को परखने के लिए जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर सर्वे शुरू किया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता के बीच विधायकों की पकड़ और उनकी सक्रियता की हकीकत सामने लाई जा सके, ताकि जरूरत पड़ने पर जिताऊ चेहरों को मौका दिया जा सके।

दो एजेंसियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

पार्टी हाईकमान ने इस सर्वे के लिए दो स्वतंत्र बाहरी एजेंसियों को जिम्मेदारी दी है। इनकी टीमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जनता से सीधा संवाद कर रही हैं। सर्वे के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

विधायकों का रिपोर्ट कार्ड: विधायकों का जनता के प्रति व्यवहार, क्षेत्र में उनकी मौजूदगी और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों का आकलन।

नए दावेदारों की खोज: जिन सीटों पर जनता में विधायकों के प्रति नाराजगी देखी जा रही है, वहां नए और प्रभावशाली चेहरों की तलाश की जा रही है।

जातीय और सामाजिक प्रभाव: संभावित नए उम्मीदवारों की लोकप्रियता और उनके जातीय समीकरणों का गहन विश्लेषण।

मुरादाबाद मंडल पर विशेष फोकस

यद्यपि भाजपा पूरे प्रदेश में सर्वे करा रही है, लेकिन मुरादाबाद मंडल पार्टी की चिंता का केंद्र बना हुआ है। 2017 में इस मंडल की 27 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा की सीटें 2022 में घटकर 10 रह गई थीं। इस नुकसान की भरपाई के लिए पार्टी इस मंडल की प्रत्येक सीट पर बेहद सावधानी से उम्मीदवार चुनने की रणनीति बना रही है।

योगी सरकार के कामकाज का फीडबैक

सर्वे का दायरा केवल विधायकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें योगी आदित्यनाथ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और बीते नौ वर्षों के कामकाज का प्रभाव भी जांचा जा रहा है। पार्टी यह समझना चाहती है कि किस क्षेत्र में सरकार की 'ब्रांडिंग' मजबूत है और कहां 'एंटी-इनकंबेंसी' (सरकार विरोधी लहर) का असर है। इन आंकड़ों के आधार पर ही 2027 के चुनाव की अंतिम रणनीति तैयार की जाएगी।

टिकट वितरण की प्रक्रिया

भाजपा इस बार टिकट वितरण में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती:

एजेंसी रिपोर्ट: बाहर से चुनी गई दो एजेंसियों की फीडबैक रिपोर्ट।

संगठन का आकलन: जिला और क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी संगठन द्वारा तैयार की गई संभावित लिस्ट।

रायशुमारी: स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सुझावों को भी इसमें अहमियत दी जाएगी।

अंतिम निर्णय: एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा; जिन नामों पर सहमति बनेगी, उन्हीं को टिकट मिलने की संभावना अधिक है।

अन्य दलों की हलचल

भाजपा की इस सक्रियता के बीच विपक्ष भी पीछे नहीं है। समाजवादी पार्टी आंतरिक सर्वे के जरिए उम्मीदवार छांट रही है, बहुजन समाज पार्टी ने कई सीटों पर प्रभारी घोषित कर दिए हैं, और कांग्रेस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संभावित चेहरों की पहचान के लिए निजी एजेंसियों का सहारा ले रही है। चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी भी अन्य दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी है।

साफ है कि 2027 के चुनावी दंगल में वही दल बाजी मारेगा, जो टिकट के गणित, जातीय समीकरणों और सर्वे रिपोर्ट के बीच सही संतुलन बिठा पाएगा।