TMC में बड़ा बिखराव: पूर्व सीएम ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेता ने ही पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

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India News Live,Digital Desk :पश्चिम बंगाल की सत्ता से बेदखल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के अंदर से ही ममता बनर्जी के खिलाफ बागी सुर तेज हो गए हैं। ताजा मामला असम टीएमसी चीफ रहे अभिजीत मजूमदार के इस्तीफे का है, जिन्होंने पार्टी छोड़ते ही ममता बनर्जी और टीएमसी की नीतियों पर तीखे प्रहार किए हैं।

सांप्रदायिक होने का आरोप, पार्टी से मोहभंग

पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे अभिजीत मजूमदार ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे 'सांप्रदायिक' करार दिया है। उन्होंने कहा, "मैंने असम में पार्टी को खड़ा करने के लिए अपना सब कुछ दिया, लेकिन आज मुझे यह कहते हुए बेहद दुख हो रहा है कि टीएमसी ने अपना असली विजन खो दिया है। यह पार्टी अब सर्व-समावेशी न रहकर केवल एक मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने वाली संस्था बन गई है।"

असम को नजरअंदाज करने का दर्द

ममता बनर्जी के 'राष्ट्रीय पार्टी' होने के दावे पर सवाल उठाते हुए मजूमदार ने कहा कि टीएमसी केवल बंगाल तक सीमित एक क्षेत्रीय पार्टी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने लगातार असम और वहां के बंगाली हिंदुओं की अनदेखी की है। अभिजीत ने आगे कहा, "एक हिंदू बंगाली नेता के तौर पर मैंने अपने समुदाय के हितों की रक्षा के लिए बार-बार आवाज उठाई, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने हमेशा मेरी बातों को नजरअंदाज किया। पार्टी के फैसले अक्सर मेरे समुदाय के खिलाफ रहे, जिससे मेरा दम घुटने लगा था।"

लगातार झटकों से जूझ रही ममता बनर्जी

अभिजीत मजूमदार का इस्तीफा टीएमसी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि वे पार्टी के उन पुराने चेहरों में से थे जिन्होंने नींव रखने में मदद की थी। पश्चिम बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद से ही टीएमसी का बिखरना जारी है:

दिग्गजों का पलायन: हाल ही में ममता बनर्जी की बेहद करीबी कोकाली घोष दास्तीदार ने भी तृणमूल महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।

बढ़ता असंतोष: राज्य के कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ रहे हैं या बागी तेवर अपनाए हुए हैं।

सत्ता के गलियारों में खलबली: पार्टी के कई बड़े दिग्गजों का अपने ही बूथों पर हारना और पार्टी के अंदर से ही ममता बनर्जी को हटाने की मांग उठना, टीएमसी के लिए गहरे संकट का संकेत है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता जाने के बाद से टीएमसी के अंदर भरोसे का जो संकट पैदा हुआ है, वह अब ममता बनर्जी के लिए नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ा कर रहा है।