ईरान पर ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' खत्म अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा ऐलान
India News Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में पिछले कई हफ्तों से जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 28 फरवरी 2026 को इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ शुरू किया गया सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रुबियो ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में अमेरिकी कांग्रेस को सूचित कर दिया है। अमेरिका अब इस सैन्य अध्याय को बंद मान रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।
क्या था ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी'?
यह ऑपरेशन 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने तेहरान सहित कई ईरानी शहरों पर भीषण हवाई हमले किए थे।
नतीजे: इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए थे।
ईरानी पलटवार: जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों की झड़ी लगा दी थी।
संघर्षविराम: करीब डेढ़ महीने के खूनी संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था, जिसके बाद अब इसे पूरी तरह समाप्त घोषित किया गया है।
अब 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के जरिए समुद्र पर नजर
भले ही सीधा सैन्य हमला रुक गया हो, लेकिन अमेरिका ने अपनी मौजूदगी कम नहीं की है। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिकी सेना अब 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
मकसद: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना, समुद्री सुरंगों (Mines) को हटाना और ईरान द्वारा वसूले जा रहे अवैध टोल को रोकना।
कड़ी चेतावनी: रुबियो ने ईरान को सचेत करते हुए कहा, "हम पहले हमला नहीं करेंगे, लेकिन अगर हमें उकसाया गया तो हमारा जवाब बेहद प्रभावी और घातक होगा। ईरान हमारे धैर्य की परीक्षा न ले।"
कूटनीति बनाम दबाव: ईरान का रुख
अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की नीति पर चल रहे हैं। अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसकी शर्त है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह और जांच योग्य तरीके से छोड़ने का ठोस आश्वासन दे।
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका शांति की बात करता है और दूसरी तरफ नाकेबंदी कड़ा कर धमकियां देता है। पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी कीमत पर एकतरफा शर्तें स्वीकार नहीं करेगा।
दुनिया ने ली राहत की सांस
11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद दुनिया को किसी बड़े खतरे का डर सता रहा था। हालांकि, ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के खत्म होने के इस आधिकारिक ऐलान ने वैश्विक शेयर बाजारों और तेल की कीमतों में स्थिरता की उम्मीद जगा दी है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' शांति का रास्ता बनेगा या तनाव की एक नई वजह।