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May 12 2026 05:40 pm

Alakshmi story : कौन हैं मां लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी? जानें दरिद्रता की देवी की पौराणिक कथा

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India News Live, Digital Desk:हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकी एक बड़ी बहन भी हैं, जिनका नाम 'अलक्ष्मी' है? जहां मां लक्ष्मी सुख और समृद्धि लाती हैं, वहीं अलक्ष्मी को दरिद्रता, कलह, रोग और दुर्भाग्य की देवी माना जाता है।

पौराणिक कथाओं में देवी अलक्ष्मी का स्वरूप मां लक्ष्मी से बिल्कुल विपरीत बताया गया है। गंदे वस्त्र, दुर्बल शरीर और लोहे के आभूषण धारण करने वाली अलक्ष्मी का वास वहीं होता है जहां गंदगी और अधर्म हो। आइए जानते हैं उनकी उत्पत्ति और विवाह से जुड़ी रोचक कथा।

समुद्र मंथन से हुई अलक्ष्मी की उत्पत्ति

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तब मां लक्ष्मी के प्रकट होने से ठीक पहले देवी अलक्ष्मी बाहर निकली थीं। उनके हाथ में मदिरा का पात्र था। चूंकि वे लक्ष्मी जी से पहले प्रकट हुई थीं, इसलिए उन्हें मां लक्ष्मी की बड़ी बहन माना जाता है।

जब मां लक्ष्मी समुद्र से बाहर आईं, तो उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में चुना। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, छोटी बहन का विवाह बड़ी बहन से पहले नहीं हो सकता था। देवी लक्ष्मी इस बात पर अड़ गईं कि जब तक उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का विवाह नहीं हो जाता, तब तक वे भगवान विष्णु से विवाह नहीं करेंगी।

उद्दालक ऋषि से हुआ देवी अलक्ष्मी का विवाह

देवी अलक्ष्मी का स्वरूप कुरूप और स्वभाव अशांत होने के कारण कोई भी उनसे विवाह करने को तैयार नहीं था। तब माता लक्ष्मी के आग्रह पर भगवान विष्णु ने ऋषि उद्दालक से अलक्ष्मी से विवाह करने का अनुरोध किया। ऋषि ने आज्ञा मानकर अलक्ष्मी से विवाह कर लिया और उन्हें अपने आश्रम ले गए।

पवित्र स्थान पर प्रवेश से किया इनकार

जब ऋषि उद्दालक उन्हें आश्रम लेकर पहुंचे, तो अलक्ष्मी ने प्रवेश करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, "हे ऋषि! जहां हवन की सुगंध हो, पवित्रता हो और साफ-सफाई हो, वहां मैं नहीं रह सकती।" जब ऋषि ने उनके रहने योग्य स्थान के बारे में पूछा, तो अलक्ष्मी ने बताया कि उनका वास वहीं हो सकता है:

जहां हमेशा गंदगी और दुर्गंध रहती हो।

जहां लोग आपस में क्लेश और लड़ाई-झगड़ा करते हों।

जहां मांस, मदिरा और अधर्म का बोलबाला हो।

जहां लोग सदैव झूठ बोलते हों।

पीपल के पेड़ के नीचे क्यों रहती हैं अलक्ष्मी?

ऋषि उद्दालक अलक्ष्मी के लिए ऐसा स्थान खोजने निकले, लेकिन वे वापस नहीं लौटे। काफी समय तक ऋषि का इंतजार करने के बाद अलक्ष्मी दुखी होकर रोने लगीं। तब भगवान विष्णु ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि पीपल का पेड़ उनका (विष्णु जी का) ही स्वरूप है। उन्होंने अलक्ष्मी को पीपल के पेड़ के नीचे वास करने की अनुमति दी।

यही कारण है कि शनिवार के दिन पीपल की पूजा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जो व्यक्ति पीपल की पूजा करता है, उसे अलक्ष्मी (दरिद्रता) कभी परेशान नहीं करतीं। घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए हमेशा साफ-सफाई और सात्विक वातावरण रखने की सलाह दी जाती है ताकि अलक्ष्मी का प्रवेश न हो सके।