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May 06 2026 04:33 pm

ट्रंप का यू-टर्न 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर फिलहाल लगा ब्रेक, क्या ईरान के साथ होने वाली है बड़ी पीस डील?

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India News Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने होर्मुज में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को फिलहाल रोकने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला तब आया है जब ईरान ने यूएई (UAE) के तेल ठिकानों पर हमला कर तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था।

'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप का दावा: "ईरान के साथ समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति"

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक 'फाइनल समझौते' (Final Agreement) को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा:"ईरान के प्रतिनिधियों के साथ शानदार प्रगति हुई है। पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर, और हमारी सैन्य अभियान की जबरदस्त सफलता को देखते हुए, हमने आपसी सहमति से एक फैसला लिया है। हम 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को थोड़े समय के लिए रोक रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि क्या ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करता है या नहीं।"

हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भले ही रेस्क्यू ऑपरेशन रुका हो, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी (Blockade) पूरी तरह जारी रहेगी।

क्या था 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' और क्यों पैदा हुआ विवाद?

बता दें कि बीते सोमवार को ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग में फंसे 87 देशों के लगभग 23,000 नाविकों को बचाने के लिए इस ऑपरेशन की घोषणा की थी।

अमेरिकी तैयारी: इस मिशन के लिए 15,000 सैनिक, गाइडेड मिसाइल और 100 से ज्यादा विमान तैनात किए गए थे।

ईरान की चेतावनी: ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार देते हुए साफ कहा था कि वह किसी भी जहाज को यहाँ से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। इसके बाद ईरान ने यूएई के तेल ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी आक्रामकता दिखा दी थी, जिसके बाद ट्रंप को कूटनीतिक कारणों से पीछे हटना पड़ा है।

चीन की शरण में ईरान: विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बीजिंग दौरा

तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची चीन के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के बढ़ते दबाव के बीच ईरान कूटनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश में है।

चीन का रुख: 28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद से ही चीन ने बेहद संतुलित रुख अपनाया है। हालांकि उसने ईरान पर हमलों की निंदा की थी, लेकिन वह सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल होने से बच रहा है।

मुलाकात का एजेंडा: अराघची अपने चीनी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्र में जारी 'सैन्य नाकाबंदी' को लेकर चर्चा करेंगे।

आगे क्या?

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता पर टिकी हैं। अगर ईरान और अमेरिका के बीच किसी समझौते पर सहमति बनती है, तो यह मिडिल ईस्ट के लिए बड़ी राहत होगी। लेकिन अगर यह बातचीत विफल रही, तो 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर लगा यह ब्रेक केवल एक बड़े तूफान से पहले की शांति साबित हो सकता है।