'साई सुदर्शन नहीं, देवदत्त पडिक्कल ही हैं पहली पसंद...': न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज से पहले रविचंद्रन अश्विन का बड़ा बयान

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भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज ऑफ स्पिनर और दुनिया के सबसे चतुर क्रिकेटिंग माइंड्स में गिने जाने वाले रविचंद्रन अश्विन ने आगामी टेस्ट सीजन और घरेलू सीरीज को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम और बैकअप बल्लेबाजों के चयन को लेकर चल रही बहसों के बीच अश्विन ने युवा सनसनी साई सुदर्शन के ऊपर कर्नाटक के बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल का खुला समर्थन किया है। अश्विन का मानना है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज में टीम संयोजन और पेकिंग ऑर्डर (वरीयता क्रम) के लिहाज से देवदत्त पडिक्कल को ही टीम में मौका मिलना चाहिए। अश्विन का यह बयान इसलिए भी काफी चर्चा में आ गया है क्योंकि साई सुदर्शन तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं और घरेलू क्रिकेट व टीएनपीएल में अश्विन के बेहद करीबी माने जाते हैं, इसके बावजूद अश्विन ने राज्य या क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर विशुद्ध रूप से प्रथम श्रेणी अनुभव और टेस्ट ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर अपनी बेबाक राय रखी है।

अश्विन का बेबाक विश्लेषण: साई सुदर्शन के ऊपर देवदत्त पडिक्कल को क्यों मिलनी चाहिए प्राथमिकता?

रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल और क्रिकेट विश्लेषण सत्र के दौरान भारतीय टीम के बैटिंग लाइन-अप और बैकअप स्लॉट्स पर खुलकर चर्चा की। अश्विन ने तर्क दिया कि जब कोई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करता है और अपने पहले ही मैच में दबाव की परिस्थितियों में परिपक्व अर्धशतक जड़ता है, तो उसे बिना किसी ठोस वजह के लाइन में पीछे नहीं धकेला जाना चाहिए। इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला में खेले गए अपने डेब्यू टेस्ट मैच में देवदत्त पडिक्कल ने नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हुए शानदार 65 रनों की पारी खेली थी। उस पारी में जिस आत्मविश्वास, टाइमिंग और संयम के साथ पडिक्कल ने अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों का सामना किया था, उसने टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं का दिल जीत लिया था।

अश्विन के अनुसार, भारतीय क्रिकेट का बेंच स्ट्रेंथ कल्चर हमेशा से निरंतरता और सम्मान पर आधारित रहा है। यदि किसी खिलाड़ी ने अपने मिले मौके को भुनाया है, तो वह अगली सीरीज में चयन की पहली कतार में खड़ा होने का हकदार है। अश्विन ने स्पष्ट किया कि साई सुदर्शन निस्संदेह एक असाधारण प्रतिभा हैं और उनका भविष्य बेहद उज्ज्वल है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में जब रेड-बॉल अनुभव और टेस्ट मैच टेम्परामेंट की बात आती है, तो पडिक्कल फिलहाल सुदर्शन से एक कदम आगे खड़े नजर आते हैं।

अपने ही राज्य के खिलाड़ी से आगे पडिक्कल को तरजीह: अश्विन की निष्पक्षता की चौतरफा तारीफ

अश्विन के इस बयान की क्रिकेट पंडितों और प्रशंसकों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है क्योंकि उन्होंने किसी भी प्रकार के स्थानीय पूर्वाग्रह को अपने क्रिकेटिंग आकलन के बीच में नहीं आने दिया। साई सुदर्शन तमिलनाडु क्रिकेट के सबसे बड़े उभरते हुए सितारे हैं और उन्होंने हाल ही में काउंटी क्रिकेट (सरे) और घरेलू दलीप ट्रॉफी में भी शतकीय पारियां खेलकर अपनी योग्यता साबित की है। अश्विन खुद तमिलनाडु से आते हैं और उन्होंने सुदर्शन के खेल को बहुत करीब से संवारा और देखा है।

बावजूद इसके, अश्विन ने सार्वजनिक मंच पर यह स्वीकार किया कि टेस्ट क्रिकेट की कठिन परिस्थितियों में पहले किसे मौका मिलना चाहिए। अश्विन ने कहा कि साई सुदर्शन ने सीमित ओवरों के क्रिकेट और भारत ए के दौरों पर जबरदस्त खेल दिखाया है, लेकिन उन्हें अभी प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कुछ और मैच खेलकर अपनी लाल गेंद तकनीक को और ज्यादा निखारना चाहिए। वहीं पडिक्कल पिछले दो-तीन घरेलू सत्रों से रणजी ट्रॉफी और इंडिया ए के लिए लगातार लंबी पारियां खेल रहे हैं और वे तकनीकी रूप से किसी भी टेस्ट आक्रमण का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी: भारतीय मध्यक्रम में चयन की जंग

भारतीय टेस्ट टीम का आगामी शेड्यूल बेहद चुनौतीपूर्ण है, जहां टीम को घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है और उसके तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी पिचों पर पांच टेस्ट मैचों की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हिस्सा लेना है। इस व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए मुख्य कोच और कप्तान एक ऐसा बैकअप मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज चाहते हैं जो शीर्ष क्रम और मध्यक्रम दोनों जगह सहजता से बल्लेबाजी कर सके।

भारतीय मध्यक्रम में इस समय विराट कोहली, सरफराज खान, केएल राहुल और शुभमन गिल जैसे स्थापित नाम मौजूद हैं। ऐसे में 15 सदस्यीय स्क्वॉड में बैकअप बल्लेबाज के तौर पर एक बाएं हाथ के बल्लेबाज की मौजूदगी टीम को विविधता प्रदान करती है। देवदत्त पडिक्कल का लंबा कद, स्पिन के खिलाफ आगे निकलकर खेलने की तकनीक और तेज गेंदबाजों के खिलाफ बैकफुट पंच उन्हें विदेशी और घरेलू दोनों तरह की पिचों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है। अश्विन का मानना है कि न्यूजीलैंड के स्पिन आक्रमण—मिचेल सेंटनर और एजाज पटेल के खिलाफ एक बाएं हाथ का तकनीकी रूप से सक्षम बल्लेबाज टीम इंडिया के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकता है।

देवदत्त पडिक्कल का घरेलू रिकॉर्ड और फिटनेस: लंबी रेस का घोड़ा साबित होने की क्षमता

देवदत्त पडिक्कल ने पिछले दो वर्षों में अपनी बल्लेबाजी और फिटनेस पर जबरदस्त काम किया है। पेट की गंभीर बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में रनों का अंबार लगाया था। कर्नाटक के लिए खेलते हुए उन्होंने दबाव भरे मैचों में कई संकटमोचक पारियां खेली हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे गेंद को लेट खेलते हैं और क्रीज का पूरा इस्तेमाल करते हैं, जो टेस्ट क्रिकेट में एक सफल बल्लेबाज बनने की बुनियादी शर्त है।

दलीप ट्रॉफी और ईरानी कप जैसे टूर्नामेंट्स में भी पडिक्कल ने अपनी निरंतरता से चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है। अश्विन ने जोर देकर कहा कि चयन प्रक्रिया में 'प्रक्रिया' (Process) का सम्मान होना चाहिए। जब आप एक खिलाड़ी को टेस्ट कैप सौंपते हैं और वह पहली ही पारी में मैच जिताने में अहम भूमिका निभाता है, तो उसके बाद उसे बाहर बैठाना उसके आत्मविश्वास को चोट पहुंचा सकता है। इसलिए न्यूजीलैंड सीरीज में पडिक्कल को स्क्वॉड में बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर प्लेइंग 11 में शामिल करना भारतीय टेस्ट ढांचे की मजबूती को दर्शाता है।

अश्विन का यह विश्लेषण भारतीय चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर और टीम मैनेजमेंट के लिए भी एक स्पष्ट मार्गदर्शन की तरह है। साई सुदर्शन का समय निश्चित रूप से आएगा और वे भविष्य में भारत के तीनों प्रारूपों के प्रमुख स्तंभ बनेंगे, लेकिन मौजूदा टेस्ट चक्र (WTC) के महत्वपूर्ण पड़ाव पर देवदत्त पडिक्कल को प्राथमिकता देना ही भारतीय क्रिकेट के संतुलन और निष्पक्षता के हक में सबसे सही फैसला नजर आता है।