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September 03 2026 01:03 pm

पुतिन ने भारत को 5 और स्क्वाड्रन के साथ Su-57 स्टील्थ फाइटर और S-500 प्रोमेथियस का दिया मेगा ऑफर

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भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल रूस निर्मित S-400 'सुदर्शन' एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम द्वारा वास्तविक अभियानों में दिखाए गए असाधारण और अभेद्य प्रदर्शन के बाद मॉस्को ने नई दिल्ली के लिए अपने सबसे उन्नत और घातक सैन्य हथियारों का खजाना पूरी तरह खोल दिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के समक्ष केवल 5 और S-400 स्क्वाड्रन की आपूर्ति का ही औपचारिक प्रस्ताव नहीं रखा है, बल्कि 5वीं पीढ़ी के सबसे खतरनाक 'Su-57 फेलन' स्टील्थ फाइटर जेट और अंतरिक्ष तक मार करने में सक्षम अगली पीढ़ी के 'S-500 प्रोमेथियस' एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद का मेगा ऑफर भी टेबल पर रख दिया है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई उच्चस्तरीय रणनीतिक वार्ताओं के बाद सामने आए इस प्रस्ताव ने वैश्विक रक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जहां एक तरफ चीन और पाकिस्तान के बढ़ते स्टील्थ लड़ाकू विमानों के खतरे के बीच भारत अपनी वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ रूस ने तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन की पेशकश के साथ भारत को अपनी ओर आकर्षित करने का बड़ा कूटनीतिक दांव चला है।

S-400 'सुदर्शन' के दबदबे के बाद रूस की बड़ी पेशकश: 5 नई स्क्वाड्रन के साथ ₹50,000 करोड़ का प्रस्ताव

भारत ने साल 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर के ऐतिहासिक समझौते के तहत पांच S-400 एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों का सौदा किया था। इनमें से चार स्क्वाड्रन पहले ही भारतीय वायुसेना के अग्रिम बेड़ों में तैनात होकर देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर अभेद्य सुरक्षा कवच बना चुकी हैं, जबकि पांचवीं स्क्वाड्रन की डिलीवरी भी अंतिम चरण में है। हालिया रणनीतिक चुनौतियों और सैन्य अभियानों के दौरान S-400 की 400 किलोमीटर की लंबी रेंज, मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के खिलाफ अचूक क्षमता ने साबित कर दिया कि यह दुनिया का सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम है।

विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को सीमा पार ही निष्प्रभावी करने के इस शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों के लिए टेंडर जारी किया था। इसके जवाब में रूस के रक्षा मंत्रालय और सरकारी हथियार निर्यातक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (Rosoboronexport) ने भारत को ₹50,000 करोड़ से अधिक के अनुमानित मूल्य पर पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन देने का विस्तृत और औपचारिक प्रस्ताव सौंप दिया है। प्रस्तावित समझौते के अनुसार, डील साइन होने के करीब तीन साल के भीतर इन प्रणालियों की डिलीवरी शुरू करने का वादा किया गया है, जिससे भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क आने वाले दशकों के लिए पूरी तरह सील हो जाएगा।

आसमान का नया सिकंदर: भारत को 5वीं पीढ़ी के Su-57 'फेलन' स्टील्थ फाइटर का सीधा ऑफर

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस नए डिफेंस पैकेज का सबसे बड़ा आकर्षण 5वीं पीढ़ी का 'Su-57 फेलन' (Sukhoi Su-57 Felon) स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर जेट है। भारतीय वायुसेना इस समय अपने फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या (स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले करीब 29 स्क्वाड्रन) और पुराने होते मिग व जगुआर विमानों के रिटायरमेंट की गंभीर चुनौती से जूझ रही है।

दूसरी ओर, पड़ोसी देश चीन ने अपने 500 से अधिक 5वीं पीढ़ी के 'J-20 माइटी ड्रैगन' स्टील्थ फाइटर तैनात कर लिए हैं और नया 'J-35' स्टील्थ जेट विकसित कर रहा है, जिसे वह पाकिस्तान को भी निर्यात करने की तैयारी में है। भारत का अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट प्रगति पर है, लेकिन उसके पूर्ण पैमाने पर उत्पादन और वायुसेना में शामिल होने में अभी 8 से 10 वर्षों (2035 के आसपास) का समय लगने की संभावना है। इसी 'स्टील्थ गैप' (Stealth Gap) को पाटने के लिए रूस ने भारत को Su-57 की पेशकश की है। रूस न केवल इन विमानों की सीधी बिक्री के लिए तैयार है, बल्कि वह भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर स्थानीय असेंबली, सोर्स कोड शेयरिंग और तकनीकी हस्तांतरण (ToT) पर भी बातचीत करने को राजी है। इसके साथ ही रूस ने अपने हल्के सिंगल-इंजन स्टील्थ फाइटर 'Su-75 चेकमेट' में भी भारत को सह-विकास भागीदार बनने का निमंत्रण दिया है।

अंतरिक्ष तक मार करने वाला S-500 'प्रोमेथियस': एयर डिफेंस के अगले चरण की तैयारी

रूस के प्रस्तावों की सूची यहीं खत्म नहीं होती; मास्को ने भारत को अपनी सबसे नवीनतम और गुप्त एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली 'S-500 प्रोमेथियस' (S-500 Prometheus / 55R6M Triumfator-M) की पेशकश भी कर दी है। S-500 को दुनिया की पहली ऐसी वायु रक्षा प्रणाली माना जाता है जो न केवल 600 किलोमीटर की दूरी तक हाइपरसोनिक मिसाइलों और 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ एयरक्राफ्ट को मार गिरा सकती है, बल्कि पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में घूम रहे सैन्य जासूसी उपग्रहों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) को भी अंतरिक्ष में ही नष्ट करने में सक्षम है।

रूस इसे भारत-रूस रणनीतिक एयर डिफेंस सहयोग के अगले चरण (Next Generation Collaboration) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पहले से ही अपने स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम (फेज-1 और फेज-2) और डीआरडीओ (DRDO) के 'प्रोजेक्ट कुशा' (Project Kusha) के तहत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित कर रहा है। इसलिए S-500 की खरीद पर फैसला लेते समय भारत अपनी स्वदेशी क्षमताओं और वित्तीय प्राथमिकताओं का गहराई से आकलन करेगा।

सुखोई-30MKI का 'सुपर सुखोई' अपग्रेड और फ्रांसीसी राफेल MRFA डील का गणित

रूस के इस आक्रामक रक्षा ऑफर के बीच भारतीय वायुसेना अपनी फ्लीट के आधुनिकीकरण के लिए बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रही है। भारतीय वायुसेना की रीढ़ वर्तमान में 260 से अधिक रूसी मूल के सुखोई-30MKI (Su-30MKI) लड़ाकू विमान हैं। भारत पहले ही अपने पूरे सुखोई बेड़े को अत्याधुनिक 'सुपर सुखोई' स्टैंडर्ड में अपग्रेड करने के ₹65,000 करोड़ के प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहा है, जिसके तहत विमानों में स्वदेशी 'उत्तम' एईएसए (AESA) रडार, नए मिशन कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट्स और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें लगाई जा रही हैं।

वहीं दूसरी तरफ, भारतीय वायुसेना 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) टेंडर के तहत फ्रांस के डसॉल्ट एविएशन से राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। हालांकि, हाल ही में फ्रांसीसी निर्माता द्वारा अगली पीढ़ी के 'राफेल-F5' स्टैंडर्ड को 2035 तक टालने और किसी अन्य देश को निर्यात न करने की घोषणा के बाद भारतीय योजनाकारों के सामने तात्कालिक विकल्प तलाशने का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में रूसी Su-57 का विकल्प भारतीय रणनीतिकारों के लिए एक विचारणीय बिंदु बन गया है, भले ही वायुसेना विभिन्न देशों के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के रखरखाव और लॉजिस्टिक्स के बोझ को लेकर सतर्क रुख अपना रही हो।

भारत के सामने रणनीतिक संतुलन की चुनौती: आत्मनिर्भर भारत बनाम त्वरित रक्षा जरूरतें

रूस के इस विशाल डिफेंस पैकेज पर अंतिम निर्णय लेना नई दिल्ली के लिए केवल एक सैन्य सौदा नहीं, बल्कि एक बेहद संवेदनशील भू-राजनीतिक और रणनीतिक संतुलन का विषय है। भारत वर्तमान में अमेरिका, फ्रांस और पश्चिमी देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को तेजी से गहरा कर रहा है, जहां अमेरिकी प्रतिबंध कानून (CAATSA) जैसी कूटनीतिक चुनौतियां भी मौजूद हैं।

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' रक्षा विनिर्माण की सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता है। भारत किसी भी विदेशी हथियार प्रणाली को सीधे खरीदने के बजाय उसके देश में निर्माण और 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर दे रहा है। रूस द्वारा 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन, Su-57 फाइटर जेट और S-500 का यह खुला ऑफर यह साबित करता है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बावजूद मास्को के लिए भारत उसका सबसे भरोसेमंद और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझीदार बना हुआ है। आने वाले महीनों में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) इस पर क्या रुख अपनाती है, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।