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September 09 2026 03:29 am

पाकिस्तानी दिग्गजों का फूटा गुस्सा, पूर्व हेड कोच ने पीसीबी की बदहाली और मनमानी पर लगाई जोरदार लताड़

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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के अंदरूनी विवाद, कप्तानी की खींचतान और बोर्ड की लचर नीतियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय खेल जगत में बड़ा भूचाल ला दिया है। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार शर्मनाक पराजय झेल रही पाकिस्तानी टीम के पतन को लेकर अब देश के पूर्व दिग्गज क्रिकेटरों और विदेशी कोचिंग स्टाफ ने मोर्चा खोल दिया है। पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने पूर्व कप्तान बाबर आजम की नेतृत्व शैली पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि बाबर ने अपने कप्तानी कार्यकाल के दौरान कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के करियर को अधर में लटका दिया और मुश्किल वक्त में उनका साथ देने के बजाय उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के पूर्व मुख्य कोच (हेड कोच) ने भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए बोर्ड के आलाकमान को टीम के मौजूदा विनाश का असली गुनहगार ठहराया है। इन दोनों तरफ से आए बयानों ने पाकिस्तान क्रिकेट की चरमराती व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

'मुश्किल वक्त में खिलाड़ियों का साथ नहीं दिया': बाबर आजम की कप्तानी पर दिग्गजों का तीखा वार

पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज क्रिकेटरों का मानना है कि एक सफल और महान कप्तान की पहचान यह होती है कि वह अपने खिलाड़ियों के खराब फॉर्म के दौरान उनके पीछे चट्टान की तरह खड़ा रहे। लेकिन बाबर आजम के कप्तानी दौर में ऐसा देखने को नहीं मिला। पूर्व दिग्गजों ने दावा किया कि बाबर ने केवल अपने कुछ खास और पसंदीदा खिलाड़ियों के कोर ग्रुप को ही लगातार मौके दिए, जबकि घरेलू क्रिकेट में लगातार पसीना बहाकर राष्ट्रीय टीम में पहुंचे युवा और होनहार खिलाड़ियों को एक या दो मैच में विफलता के बाद सीधे टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

दिग्गजों का आरोप है कि बाबर आजम मैदान पर और ड्रेसिंग रूम के भीतर संवाद स्थापित करने में पूरी तरह नाकाम रहे। जब किसी खिलाड़ी को टीम से ड्रॉप किया जाता था, तो उसे यह तक नहीं बताया जाता था कि उसकी तकनीकी कमी क्या है या उसे सुधार के लिए क्या करना चाहिए। खिलाड़ियों को बिना किसी स्पष्ट संवाद के अधर में छोड़ देने की इस कार्यशैली ने टीम के भीतर असुरक्षा की गहरी भावना पैदा कर दी। पूर्व क्रिकेटरों ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई स्पिनर्स और मध्यक्रम के बल्लेबाजों को अंतरराष्ट्रीय डेब्यू कराने के तुरंत बाद दरकिनार कर दिया गया, जिससे उनका आत्मविश्वास हमेशा के लिए चकनाचूर हो गया। एक कप्तान के रूप में बाबर पर यह सबसे बड़ा दाग माना जा रहा है कि वे अपनी कप्तानी में एक भी नया मैच विनर तैयार नहीं कर सके।

पूर्व हेड कोच का पीसीबी पर सीधा हमला: 'बोर्ड की अदूरदर्शिता ने डुबोई क्रिकेट की नैया'

बाबर आजम पर उठ रहे सवालों के बीच पाकिस्तान टीम के पूर्व मुख्य कोच ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के शीर्ष अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई है। पूर्व हेड कोच ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया साक्षात्कार में बेबाकी से कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट की बर्बादी के लिए केवल खिलाड़ियों या कप्तानों को दोष देना पूरी तरह गलत और बेईमानी है, क्योंकि असली खराबी बोर्ड के प्रशासनिक ढांचे में बैठी है। उन्होंने कहा कि पीसीबी एक ऐसी संस्था बन चुका है जो दीर्घकालिक योजना और पेशेवर रवैये के बजाय सिर्फ सोशल मीडिया के ट्रेंड्स और तात्कालिक जनभावनाओं के आधार पर फैसले लेता है।

पूर्व कोच ने खुलासा किया कि पाकिस्तान क्रिकेट में काम करना किसी भी पेशेवर कोच के लिए सबसे कठिन चुनौती है क्योंकि यहां हर दो से तीन महीने में बोर्ड अध्यक्ष, चयन समिति के सदस्य और कप्तान बदल दिए जाते हैं। जब बोर्ड में बैठे नीति-निर्माताओं को ही अपनी कुर्सी का भरोसा नहीं होता, तो वे पूरी व्यवस्था में केवल अस्थिरता और भ्रम पैदा करते हैं। कोच ने कहा कि आधुनिक क्रिकेट में टीमों को तैयार करने के लिए तीन से चार साल का समय, स्पष्ट विजन और बैकअप प्लान चाहिए होता है, लेकिन पीसीबी में हर एक मैच की हार के बाद 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'ऑपरेशन क्लीन' जैसे ड्रामे शुरू कर दिए जाते हैं, जिससे पूरी टीम का मनोबल रसातल में चला जाता है।

ड्रेसिंग रूम की गुटबाजी और असुरक्षा का माहौल: खिलाड़ियों में भरोसे का भारी अभाव

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम इस समय भारी तनाव और गुटबाजी की चपेट में है। पूर्व दिग्गजों के अनुसार, जब टीम में खिलाड़ियों को यह महसूस होने लगे कि उनका चयन प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि कप्तानों या बोर्ड अधिकारियों से नजदीकियों के आधार पर हो रहा है, तो टीम भावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है। बाबर आजम, शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान के इर्द-गिर्द बने अलग-अलग खेमों ने टीम को टुकड़ों में बांट दिया है।

मैदान पर खेलते समय खिलाड़ी एक-दूसरे की सफलता पर जश्न मनाने से कतराते हैं और दबाव के पलों में एक संगठित इकाई के रूप में लड़ने के बजाय अपनी व्यक्तिगत जगह बचाने के लिए रक्षात्मक मानसिकता में चले जाते हैं। पूर्व कोच ने बोर्ड को आईना दिखाते हुए कहा कि जब तक ड्रेसिंग रूम के भीतर एक स्वस्थ, पारदर्शी और भयमुक्त वातावरण नहीं बनाया जाएगा, तब तक कोई भी विदेशी या स्थानीय कोच टीम के प्रदर्शन में सुधार नहीं ला सकता। खिलाड़ियों को यह भरोसा होना चाहिए कि खराब दौर में मैनेजमेंट उनके साथ खड़ा रहेगा, न कि उन्हें मीडिया के सामने बलि का बकरा बना दिया जाएगा।

घरेलू ढांचे की बदहाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोज होते खिलाड़ी

पूर्व हेड कोच और पाकिस्तानी दिग्गजों ने देश के घरेलू क्रिकेट ढांचे पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान के फर्स्ट क्लास क्रिकेट (कायदे-आजम ट्रॉफी) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के स्तर में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। घरेलू स्तर पर बेजान और सपाट पिचों पर रन बनाने वाले बल्लेबाज और औसत गति से विकेट लेने वाले गेंदबाज जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या भारत जैसी मजबूत टीमों का सामना करते हैं, तो वे पूरी तरह असहाय नजर आते हैं।

बोर्ड ने घरेलू क्रिकेट के प्रारूप को पिछले पांच सालों में कई बार बदला है—कभी विभागीय (डिपार्टमेंटल) क्रिकेट को बंद किया गया, तो कभी फिर से शुरू किया गया। इन लगातार प्रयोगों ने घरेलू क्रिकेटरों की आर्थिक और मानसिक स्थिरता को नष्ट कर दिया है। जब जमीनी स्तर पर मजबूत तकनीक और अनुशासन वाले खिलाड़ी तैयार नहीं होंगे, तो अंतरराष्ट्रीय टीम में बदलाव करने से कोई जादुई नतीजा नहीं निकलने वाला है।

क्या कभी बदलेगी पाकिस्तान क्रिकेट की तस्वीर? सुधार के लिए कड़े कदमों की दरकार

इस चौतरफा आलोचना के बाद पीसीबी नेतृत्व पर सुधार के ठोस और कड़े कदम उठाने का भारी दबाव है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए सबसे पहले कप्तानी और चयन प्रक्रिया को राजनीति से पूरी तरह मुक्त करना होगा। बाबर आजम जैसे स्टार खिलाड़ियों को अपनी प्राथमिक भूमिका यानी विशुद्ध बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने की छूट देनी चाहिए ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त कप्तानी के दबाव के अपनी खोई हुई फॉर्म हासिल कर सकें।

साथ ही, बोर्ड को एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और दीर्घकालिक थिंक टैंक तैयार करना होगा जो अगले 4-5 वर्षों के लिए एक स्थिर नीति बनाए। यदि पीसीबी ने अब भी इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया और अपनी मनमानी तथा खिलाड़ियों को अधर में लटकाने की नीति जारी रखी, तो पाकिस्तान क्रिकेट का हाल आने वाले समय में और भी बदतर हो जाएगा।