राम मंदिर विवाद में नया मोड़: चढ़ावा चोरी के बाद अब जमीन खरीद की भी जांच करेगी SIT, संजय सिंह ने सौंपे 600 पन्नों के दस्तावेज
अयोध्या/राजनीति डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर में करीब 80 लाख रुपये के चढ़ावा चोरी प्रकरण (Ram Mandir Donation Theft Case) की आंच अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब जमीन खरीद घोटाला (Land Purchase Dispute) का जिन्ना एक बार फिर बाहर आ गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' द्वारा खरीदी गई जमीनों के सौदों को भी इसमें शामिल कर लिया है.
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) द्वारा एसआईटी अध्यक्ष को 11 संदिग्ध भू-सौदों से जुड़े करीब 600 पन्नों के अहम दस्तावेज सौंपने के बाद प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है.
SIT खंगालेगी जमीनों के कागज, गवाहों और विक्रेताओं से होगी पूछताछ
एसआईटी अब मंदिर प्रबंधन द्वारा खरीदी गई जमीनों के सरकारी दस्तावेजों, स्टांप ड्यूटी और बैंक ट्रांजैक्शंस की बारीकी से तहकीकात करेगी.
गवाहों पर गहराया शक: इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि जमीनों के ज्यादातर सौदों में सिर्फ दो व्यक्ति ही मुख्य गवाह के रूप में दर्ज हैं. एसआईटी इन गवाहों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
सर्किल रेट और बाजार मूल्य में जमीन-आसमान का अंतर: आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के विकास के लिए मंदिर के आसपास की जो जमीनें सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देकर खरीदीं, उनकी तुलना में ट्रस्ट ने कई गुना अधिक (महंगे) दामों पर जमीनें खरीदीं. एसआईटी अब जमीन बेचने वाले विक्रेताओं को समन भेजकर भुगतान की रकम और आपसी सहमति की सच्चाई का पता लगाएगी.
सांसद संजय सिंह का दावा: '9 करोड़ की जमीन ₹55 करोड़ में खरीदी'
गुरुवार को पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 'आप' सांसद संजय सिंह ने लखनऊ में एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत से मुलाकात की और करीब आधे घंटे की बैठक में बिंदुवार 11 सेट दस्तावेज प्रस्तुत किए. मीडिया से बात करते हुए संजय सिंह ने ट्रस्ट पर तीखे आरोप लगाए:
"भगवान श्रीराम के नाम पर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई का चंदा आस्था के साथ दिया, लेकिन उस पवित्र चंदे और जनविश्वास के साथ धोखा किया गया है. करोड़ों रुपये के चंदे का उपयोग बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर जमीन खरीदने में हुआ."
दस्तावेजों में दर्ज संदिग्ध सौदों का गणित:
केस 1: दान में मिली एक जमीन को पहले औने-पौने दाम (करीब 1 करोड़) में किसी और को ट्रांसफर किया गया और बाद में उसे ही करोड़ों में ट्रस्ट को बेचा गया.
केस 2: लगभग 9 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली जमीन को ट्रस्ट ने 55 करोड़ 47 लाख रुपये में खरीदा.
केस 3: लगभग 3 करोड़ रुपये मूल्य की एक अन्य जमीन को 24 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि देकर खरीदा गया.
नजूल की जमीन खरीदने और बीजेपी नेताओं के रिश्तेदारों पर आरोप
संजय सिंह ने एसआईटी को सौंपे गए दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि ट्रस्ट ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐसी 'नजूल भूमि' (सरकारी जमीन) को भी चंदे का पैसा देकर खरीद लिया, जिसे कानूनी रूप से न तो बेचा जा सकता है और न ही खरीदा जा सकता है.
इसके अलावा, उन्होंने अयोध्या के तत्कालीन भाजपा महापौर ऋषिकेश उपाध्याय के रिश्तेदार दीप नारायण से जुड़े संदिग्ध भूमि सौदों के दस्तावेज भी एसआईटी को सौंपे हैं. आरोप है कि इन कड़ियों के जरिए चंदे के पैसे का निजी लाभ के लिए बंदरबांट किया गया और ट्रस्ट को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया.
बढ़ सकती हैं मुश्किलें: हाल ही में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद, जमीन खरीद के इस मामले में एसआईटी की एंट्री ने राम मंदिर ट्रस्ट और इससे जुड़े लोगों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं.