Iran Crisis: मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं या मारे गए? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किया बड़ा खुलासा
अंतरराष्ट्रीय डेस्क: इस साल फरवरी के महीने में ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से ही ईरान के नए सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की सलामती को लेकर दुनिया भर में सस्पेंस बना हुआ था। अब इस रहस्य पर से अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने पूरी तरह पर्दा उठा दिया है।
सीनेट की फॉरेन रिलेशन कमिटी (Senate Foreign Relations Committee) के सामने गवाही देते हुए मार्को रुबियो ने आधिकारिक पुष्टि की है कि मोजतबा खामेनेई न सिर्फ जिंदा हैं, बल्कि वे व्हीलचेयर या बेड पर होने के बावजूद ईरान के बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसलों में सक्रिय रूप से भूमिका निभा रहे हैं।
क्यों उड़ी थीं मोजतबा खामेनेई की मौत की अफवाहें?
दरअसल, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर घुसकर एक ऐतिहासिक और भीषण सैन्य हमला किया था। इस हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जबकि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए थे।
इस हमले में अली खामेनेई के बेटे और उनके उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई भी बुरी तरह जख्मी हो गए थे। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में उनके एक पैर में गहरी चोट आई थी। तब से लेकर आज तक मोजतबा खामेनेई को किसी भी सार्वजनिक मंच या वीडियो में नहीं देखा गया था। वे केवल लिखित बयान (Written Statements) जारी कर रहे थे, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह अफवाहें उड़ने लगी थीं कि मोजतबा की या तो मौत हो चुकी है या वे कोमा में हैं।
अमेरिकी सांसदों को रुबियो ने दिया खुफिया इनपुट
इन अटकलों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिकी सीनेटरों को बताया, "हमारे इंटेलिजेंस और जमीनी इनपुट्स से ऐसे पुख्ता संकेत मिले हैं जिससे यह साबित होता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं। वे ठीक हो रहे हैं और इस युद्ध के दौर में देश के सभी रणनीतिक और सैन्य फैसलों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।"
क्या अब भी है ईरान संग 'मेगा डील' की गुंजाइश? अमेरिका की 3 कड़ी शर्तें
भले ही खाड़ी क्षेत्र में बारूद सुलग रहा हो, लेकिन मार्को रुबियो ने साफ किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता (Deal) करने के लिए अब भी तैयार है। रुबियो ने कहा, "यह डील आज, कल या अगले हफ्ते कभी भी फाइनल हो सकती है, बशर्ते तेहरान को अमेरिका की इन शर्तों को घुटने टेककर मानना होगा:"
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना: ईरान को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खुला रखना होगा।
जहाजों पर हमले बंद करना: ईरान और उसके समर्थित गुटों को लाल सागर और फारस की खाड़ी से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और कार्गो शिप्स पर ड्रोन व मिसाइल हमले तुरंत रोकने होंगे।
परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक: ईरान को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को हमेशा के लिए सीमित करना होगा और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की गतिविधियों को पूरी तरह ठप करना होगा।
रुबियो ने स्पष्ट लहजे में कहा कि अगर ईरान इन शर्तों पर दस्तखत करता है, तभी वाशिंगटन की तरफ से उसे आर्थिक प्रतिबंधों (Economic Sanctions) से बड़ी राहत दी जाएगी।
बढ़ गया तनाव: ईरान (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी बेसों पर दागीं मिसाइलें
एक तरफ जहां अमेरिका समझौते की शर्तें गिनवा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बुधवार तड़के खाड़ी देशों में युद्ध की आग और भड़क गई है। डील की बातचीत के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत, इराक, बहरीन और एरबिल में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर एक साथ कई घातक मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए।
सटीक मिसाइल हमले का दावा: IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरान का दावा है कि उन्होंने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपनी सटीक मिसाइलों (Precision Missiles) से निशाना बनाया है।
केशम द्वीप का बदला: ईरानी सेना के अनुसार, यह हमला असल में पिछले दिनों अमेरिकी वायुसेना द्वारा ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'केशम द्वीप' (Qeshm Island) पर की गई बमबारी का सीधा और करारा जवाब है।
इस ताजा सैन्य टकराव के बाद कुवैत और बहरीन के एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट पर हैं। मध्य पूर्व की यह स्थिति दर्शाती है कि कूटनीतिक बातचीत के समानांतर दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा टला नहीं है।