'तबाह कर देंगे!' पुतिन ने यूक्रेन पर महा-हमले के दिए खौफनाक संकेत; कीव पर मंडराया बैलिस्टिक मिसाइल का साया
रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष अब अपने सबसे खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच चुका है। यूक्रेन के भीतर जारी भीषण बमबारी के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि मॉस्को अब किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। राजधानी कीव समेत यूक्रेन के प्रमुख शहरों पर बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों के बड़े हमले का साया मंडरा रहा है। हालिया घंटों में रूस ने यूक्रेन के कई बड़े शहरों पर मिसाइलों और 'कामिकेज़' ड्रोनों से बैक-टू-बैक हमले किए हैं। कीव में गूंजते हवाई सायरनों और भीषण धमाकों की आवाजों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिन यूक्रेन के सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे के लिए बेहद भारी साबित होने वाले हैं।
कीव और 9 प्रमुख शहरों पर भीषण प्रहार: ऊर्जा और सैन्य ठिकाने बने निशाना
रूस के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के नौ प्रमुख शहरों में मौजूद रणनीतिक ठिकानों पर समन्वित मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक परिसर, तेल रिफाइनरियों, हथियार डिपो, लॉजिस्टिक्स हब और बंदरगाहों को पूरी तरह पंगु बनाना था।
जमीनी स्तर पर इन हमलों ने भारी तबाही मचाई है। दक्षिणी जापोरिज्जिया और उत्तरी खारकीव में रिहायशी इमारतों और नागरिक ठिकानों को भी गंभीर क्षति पहुंची है, जहां मौतों और दर्जनों लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। यूक्रेनी वायुसेना ने कई ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन मिसाइलों की अत्यधिक संख्या और गति के कारण एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह भेद दिया गया। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि रूस अपनी युद्ध क्षमता और मिसाइल उत्पादन में लगातार भारी निवेश कर रहा है, जिसका मुकाबला करने के लिए पश्चिमी देशों से तत्काल अतिरिक्त सुरक्षा पैकेज की आवश्यकता है।
पुतिन का खुला संदेश: 'पेंडोरा बॉक्स' खुल चुका है, पलटवार होगा विनाशकारी
क्रेमलिन के शीर्ष नेतृत्व का यह आक्रामक रुख अचानक नहीं आया है। पिछले कुछ हफ्तों में यूक्रेनी सेना ने रूस के सीमावर्ती और गहरे अंदरूनी इलाकों में ड्रोन हमलों के जरिए रिफाइनरियों, गैस टर्मिनलों और ई-कॉमर्स वेयरहाउसों जैसे आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया था। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस पर बेहद सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि यूक्रेन ने आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाकर 'पेंडोरा बॉक्स' (मुसीबतों का पिटारा) खोल दिया है, जिसका माकूल जवाब दिया जाएगा।
पुतिन के हालिया बयानों और सैन्य तैनाती से स्पष्ट है कि रूस अब यूक्रेन के ऊर्जा नेटवर्क और रक्षा निर्माण केंद्रों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की रणनीति पर काम कर रहा है। रूसी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि सर्दियों के करीब आने से पहले यूक्रेन की ग्रिड और हीटिंग क्षमता को ध्वस्त करना मॉस्को का प्रमुख सामरिक लक्ष्य बन गया है।
बैलिस्टिक मिसाइल का बढ़ता खतरा: पैट्रियट सिस्टम की कमी से जूझता यूक्रेन
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक पहलू यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइलों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की आशंका है। रूस के पास इस्कंदर-एम (Iskander-M), किंजल (Kinzhal) और अत्याधुनिक 'ओरेश्निक' (Oreshnik) जैसी घातक मिसाइलों का भंडार है। ओरेश्निक जैसी इंटरमीडिएट-रेंज हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलें 12,000 से 13,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ती हैं और एमआईआरवी (MIRV) तकनीक से लैस होती हैं, जिससे एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक वार कर सकती है।
यूक्रेन के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि उसके पास इन बैलिस्टिक खतरों को रोकने के लिए अमेरिका निर्मित पैट्रियट (Patriot) मिसाइल डिफेंस सिस्टम और उनके इंटरसेप्टर की भारी कमी हो गई है। रूसी सेना रणनीति के तहत पहले सैकड़ों सस्ते 'शाहेद' ड्रोन भेजकर यूक्रेनी एयर डिफेंस के रडार और मिसाइल स्टॉक को खाली कराती है (Saturation Tactic), और उसके ठीक पीछे अचूक बैलिस्टिक मिसाइलें दाग देती है। इसी वजह से यूक्रेन के प्रमुख शहरों के ऊपर आसमान लगभग असुरक्षित होता जा रहा है।
क्या परमाणु हथियारों का खतरा वास्तविक है?
रूसी हमलों के तेज होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह बहस भी छिड़ गई है कि क्या युद्ध के किसी नाजुक मोड़ पर रूस सामरिक (टैक्टिकल) परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है? हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मॉस्को की तरफ से फिलहाल सीधे परमाणु हमले के कोई ठोस प्रमाण या संकेत नहीं मिले हैं।
कार्नेगी रूस यूरेशिया सेंटर जैसे प्रतिष्ठित थिंक टैंकों के अनुसार, रूस अपने पारंपरिक हथियारों (Conventional Weapons), भारी ग्लाइड बमों और उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों के दम पर ही जमीन पर बढ़त बनाने में सक्षम है, इसलिए उसे परमाणु जोखिम उठाने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, भारत और चीन जैसी वैश्विक शक्तियों ने भी युद्ध में किसी भी प्रकार के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या धमकियों के खिलाफ बेहद स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है।
पर्दे के पीछे की कूटनीति: शांति वार्ताओं की सुगबुगाहट बनाम जमीनी जंग
एक तरफ जहां रणभूमि में बारूद बरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बंद कमरों में हलचल भी जारी है। अमेरिका और पश्चिमी देश युद्ध विराम के लिए बैकचैनल संपर्कों की बात तो कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनयिक दूतों के मॉस्को दौरों की खबरें सामने आई हैं, लेकिन क्षेत्रीय दावों और नाटो विस्तार की शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई बेहद चौड़ी है।
यूक्रेन किसी भी सूरत में अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है, जबकि रूस अपने कब्जे वाले चार यूक्रेनी क्षेत्रों और क्रीमिया पर नियंत्रण को अपनी पहली शर्त मानता है। जब तक कूटनीतिक मेज पर कोई साझा सहमति नहीं बनती, तब तक पुतिन का संदेश साफ है कि सैन्य दबाव ही रूस की मुख्य भाषा होगी।
आगे क्या? यूक्रेन और यूरोपीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी
आने वाले हफ्तों में यूक्रेन में युद्ध की तीव्रता और बढ़ने की पूरी आशंका है। यदि रूस ने अपनी पूरी बैलिस्टिक ताकत झोंक दी, तो कीव, ल्विव, ओडेसा और निप्रो जैसे शहरों में बिजली, पानी और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। यह संकट केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पोलैंड, रोमानिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी यूरोपीय देशों के हवाई क्षेत्र और सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा करेगा। जेलेंस्की जहां यूरोप से अतिरिक्त एयर डिफेंस पैकेज और लंबी दूरी के हथियारों की गुहार लगा रहे हैं, वहीं पुतिन की आक्रामक रणनीति ने साफ कर दिया है कि जंग का यह नया दौर पहले से कहीं अधिक खूनी और विनाशकारी होने वाला है।