बैंक जांच में खाते में मिले सिर्फ 3 रुपये; अयोध्या राम मंदिर में फर्जी दान और चेक बाउंस का सनसनीखेज मामला सामने आने से मचा हड़कंप

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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से देश-विदेश से रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन और दान के लिए पहुंच रहे हैं। रामलला के चरणों में श्रद्धा भाव से सोने-चांदी, आभूषण, नकदी और ऑनलाइन माध्यमों से दिल खोलकर समर्पण निधि अर्पित की जा रही है। लेकिन इसी बीच अयोध्या स्थित 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के कार्यालय में एक ऐसा हैरतअंगेज और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। एक अज्ञात व्यक्ति ने रामलला के नाम पर 10 हजार रुपये और मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों के कल्याण के लिए पूरे 4 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चेक दान के रूप में सौंप दिया। जब ट्रस्ट ने सामान्य प्रक्रिया के तहत इस चेक को क्लीयरेंस और सत्यापन के लिए बैंक भेजा, तो बैंक की जांच रिपोर्ट देखकर सभी के होश उड़ गए। जिस बैंक खाते से 4 करोड़ रुपये का चेक काटा गया था, उसमें कुल जमा राशि मात्र तीन रुपये (₹3) दर्ज थी।

कर्मचारियों में बंटा चेक और बैंक में खुली पोल: जानिए क्या है पूरा घटनाक्रम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह संदिग्ध व्यक्ति राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय में एक सामान्य श्रद्धालु की तरह पहुंचा। उसने खुद को एक बड़ा व्यापारी और राम भक्त बताते हुए पहले रामलला की पूजा-अर्चना और मंदिर व्यवस्था के लिए 10 हजार रुपये के सहयोग की बात कही। इसके बाद उसने परिसर में दिन-रात सेवा दे रहे सुरक्षाकर्मियों, पुजारियों और सफाई कर्मचारियों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह इन कर्मचारियों के कल्याण और उनके लिए विशेष सहायता राशि देना चाहता है। इसके बाद उसने सीधे 4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का चेक काटकर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को थमा दिया।

शुरुआत में इतनी बड़ी राशि का चेक देखकर कर्मचारियों और ट्रस्ट के अकाउंट विभाग को सुखद आश्चर्य हुआ। चेक की कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जब इसे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्थानीय शाखा में इनकैश कराने और खाते की जांच के लिए भेजा गया, तो बैंक के तकनीकी सिस्टम ने तुरंत अलर्ट जारी कर दिया। बैंक के रिकॉर्ड में पाया गया कि जिस खाते का यह चेक था, वह खाता लंबे समय से न्यूनतम लेनदेन पर चल रहा था और उसमें उस वक्त केवल 3 रुपये का बैलेंस बचा हुआ था।

ठगी, मानसिक सनक या वित्तीय षड्यंत्र? ट्रस्ट और पुलिस को अब इन 4 बातों की आशंका

इतने बड़े पैमाने पर राम मंदिर के नाम पर फर्जी चेक जारी किए जाने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और अयोध्या पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। शुरुआती जांच के बाद मामले में कई गंभीर पहलुओं पर आशंकाएं जताई जा रही हैं:

1. पब्लिसिटी स्टंट और सोशल मीडिया हाइप: जांच अधिकारियों का मानना है कि कई बार लोग केवल मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर खुद को 'महादानी' साबित करने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसे खोखले चेक सौंप देते हैं, ताकि अखबारों और इंटरनेट पर उनका नाम चमक सके।

2. मानसिक असंतुलन या सनक: एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि संबंधित व्यक्ति किसी मानसिक भ्रम या सनक का शिकार हो सकता है, जिसने बिना किसी वित्तीय क्षमता के इतनी बड़ी रकम का चेक काट दिया।

3. ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और बैंक सिस्टम की रेकी: सुरक्षा विशेषज्ञों को यह भी संदेह है कि कहीं यह ट्रस्ट के बैंकिंग चैनल, चेक क्लीयरेंस टाइमिंग और वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल को परखने (Test Run) की कोई सोची-समझी चाल तो नहीं थी, ताकि भविष्य में किसी बड़े साइबर या चेक क्लोनिंग फ्रॉड को अंजाम दिया जा सके।

4. टैक्स और फर्जी दावों का खेल: कई मामलों में जालसाज मंदिर ट्रस्ट को बड़े चेक सौंपने की रसीद या पावती (Acknowledgment Slip) हासिल कर लेते हैं और उसका इस्तेमाल अन्य लोगों को ठगने या फर्जी वित्तीय साख दिखाने के लिए करते हैं।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के साथ पहले भी हो चुकी है चेक क्लोनिंग की कोशिश

यह पहला मौका नहीं है जब राम मंदिर के बैंक खातों और चेकों को लेकर सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास हुआ हो। इससे पहले भी साल 2020 में जालसाजों ने 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के बैंक खाते से क्लोन चेक के जरिए लाखों रुपये निकालने की साजिश रची थी। उस समय जालसाजों ने लखनऊ और अन्य शहरों में फर्जी चेक लगाकर 6 लाख रुपये निकाल लिए थे, लेकिन जैसे ही 9.86 लाख रुपये का तीसरा क्लोन चेक बैंक में प्रस्तुत किया गया, बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रस्ट के सचिव चंपत राय को सीधे फोन कर पुष्टि की और इस बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। उस कड़वे अनुभव के बाद से ट्रस्ट ने किसी भी बड़े चेक के सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली (Three-Tier Verification Protocol) लागू कर रखी है।

ट्रस्ट ने बढ़ाई सतर्कता: अब बड़े दानों के लिए रियल-टाइम वेरिफिकेशन अनिवार्य

इस ताजा घटना के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने अपने दान काउंटर और अकाउंट्स सेक्शन के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त कर दिया है:

तात्कालिक बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन: किसी भी व्यक्ति द्वारा दिए गए बड़े चेक (विशेषकर 1 लाख रुपये से ऊपर) को स्वीकार करने से पहले जारीकर्ता के बैंक और खाते की स्थिति का त्वरित ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा।

पहचान पत्रों की अनिवार्य प्रति: बड़े दानदाताओं से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की प्रति अनिवार्य रूप से ली जा रही है।

डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता: ट्रस्ट श्रद्धालुओं से चेक या ड्राफ्ट के बजाय सीधे यूपीआई (UPI), एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS) या आधिकारिक वेबसाइट के गेटवे के जरिए डिजिटल दान करने की अपील कर रहा है, जिससे किसी भी तरह के चेक बाउंस या फर्जीवाड़े की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाए।

संदिग्ध व्यक्ति की तलाश में जुटी पुलिस: सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे

अयोध्या पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस उस संदिग्ध व्यक्ति की पहचान के लिए राम मंदिर परिसर, ट्रस्ट कार्यालय और आसपास लगे सुरक्षा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जिस बैंक शाखा का चेक दिया गया था, उसके माध्यम से खाताधारक का मूल पता और मोबाइल नंबर जुटाया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कृत्य न केवल 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' (धारा 138) के तहत चेक बाउंस का अपराध है, बल्कि यदि इसमें किसी सुनियोजित धोखाधड़ी या आपराधिक षड्यंत्र का पहलू सामने आता है, तो आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आस्था के केंद्र पर फर्जीवाड़े की कोई जगह नहीं

राम जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की अटूट आस्था और समर्पण का सर्वोच्च केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थान पर इस प्रकार का गैर-जिम्मेदाराना आचरण और भ्रामक चेक सौंपना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का खुला अनादर भी है।

ट्रस्ट की तत्परता और बैंक की सतर्कता से यह मामला समय रहते पकड़ में आ गया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी तंत्र के जरिए किसी भी तरह के वित्तीय छलावे को नाकाम किया जा सकता है। अयोध्या प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और केवल अधिकृत ट्रस्ट काउंटरों पर ही अपना समर्पण दर्ज कराएं।