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September 11 2026 04:49 pm

अपनी ही सरकार, फिर भी खफा मंत्री संजय निषाद; लखनऊ के बाद गोंडा सर्किट हाउस में बैठे धरने पर

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बेहद असहज और दुर्लभ स्थिति देखने को मिल रही है, जहां सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रमुख सहयोगी और योगी सरकार में मत्स्य पालन कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद अपनी ही पुलिस और प्रशासन के खिलाफ खुलेआम मोर्चा खोले हुए हैं। गोंडा जिले के परसपुर निवासी बर्तन कारोबारी और निषाद समाज के एक्टिविस्ट विनोद साहनी की बेरहमी से हत्या के बाद मंत्री का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

गुरुवार को लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) स्थित मॉर्च्युरी के बाहर जमीन पर कई घंटे धरने पर बैठने के बाद, डॉ. संजय निषाद शुक्रवार सुबह सीधे गोंडा पहुंच गए। लखनऊ में विपक्षी नेताओं के साथ धरने पर बैठने के बाद जब वे गोंडा पहुंचे, तो कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस के बाहर उनके समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। मंत्री ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि जब तक पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ नहीं मिलता और लापरवाह अफसरों पर गाज नहीं गिरती, उनका आंदोलन थमेगा नहीं।

पुलिस फोर्स की भारी तैनाती देख भड़के मंत्री: 'क्या निषाद समाज के लोग गुंडा-बदमाश हैं?'

शुक्रवार सुबह जब डॉ. संजय निषाद का काफिला लखनऊ से गोंडा की सीमा में दाखिल हुआ, तो प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते बॉर्डर और शहर के प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था। गोंडा सर्किट हाउस पहुंचते ही चारों तरफ पीएसी (PAC) और कई थानों की फोर्स देखकर मंत्री का पारा और चढ़ गया।

उन्होंने मौके पर मौजूद आला प्रशासनिक और पुलिस अफसरों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा सवाल दागा, "क्या निषाद समाज के लोग कोई गुंडा-बदमाश या अपराधी हैं, जो उन्हें रोकने के लिए इतनी छावनी बनाई गई है? अगर इतनी ही पुलिस फोर्स उस दिन तैनात होती, तो आज विनोद साहनी जिंदा होते।" इसके बाद मंत्री अपने समर्थकों के साथ सर्किट हाउस में ही धरने पर बैठ गए, जहां जिलाधिकारी (DM) प्रियंका निरंजन और पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक के साथ बंद कमरे में कई दौर की तीखी बातचीत हुई।

'बुलडोजर चले और एनकाउंटर हो': मंत्री ने रखीं चार प्रमुख मांगें

अपनी ही सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद डॉ. संजय निषाद ने प्रशासन के सामने विपक्षी तेवर अपनाते हुए चार स्पष्ट शर्तें रखीं:

आरोपियों पर सख्त एक्शन और बुलडोजर कार्रवाई: मंत्री ने कहा कि हत्यारों पर केवल सामान्य धाराएं न लगाई जाएं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई हो और उनकी अवैध संपत्तियों पर सरकार का बुलडोजर चले।

दोषी पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी: उन्होंने मांग की कि मामले में लीपापोती करने और समय पर मदद न पहुंचाने वाले थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को केवल निलंबित न किया जाए, बल्कि उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए।

सरकारी नौकरी और 50 लाख मुआवजा: पीड़ित परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए मृतक की पत्नी या आश्रित को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता दी जाए।

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम: गांव में मृतक के परिजनों और गवाहों की जान की सुरक्षा के लिए स्थायी पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।

बैकफुट पर आया प्रशासन: 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 3 आरोपी सलाखों के पीछे

मंत्री के आक्रामक रुख और गोंडा से लेकर लखनऊ तक मचे सियासी घमासान को देखते हुए गोंडा पुलिस प्रशासन को तत्काल बैकफुट पर आना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए परसपुर के थानाध्यक्ष कमल शंकर चतुर्वेदी, शाहपुर चौकी प्रभारी अंकित सिंह और संबंधित बीट सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और विभागीय जांच बैठा दी।

इसके साथ ही पुलिस ने मुख्य आरोपी शुभम सिंह उर्फ गोलू समेत तीन नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि बाकी अज्ञात हमलावरों की तलाश के लिए विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

गठबंधन के भीतर दरार या कोर वोट बैंक साधने की मजबूरी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय निषाद का यह रुख केवल एक घटना का विरोध नहीं, बल्कि अपने कोर निषाद वोट बैंक को एकजुट रखने की सोची-समझी रणनीति भी है। पिछले लोकसभा चुनावों में निषाद बहुल सीटों पर आए नतीजों और समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' दांव के चलते संजय निषाद पर अपने समाज के मुद्दों को लेकर आक्रामक होने का भारी दबाव है।

लखनऊ में केजीएमयू के बाहर जब वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और सपा नेता राजपाल कश्यप उनके धरने में आकर बैठे, तो संदेश साफ हो गया कि अगर संजय निषाद ने मुखरता नहीं दिखाई, तो विपक्षी दल निषाद समाज की सहानुभूति बटोर ले जाएंगे। यही वजह है कि सरकार में रहते हुए भी वे सड़कों पर उतरकर यह जताना चाहते हैं कि वे सत्ता की कुर्सी से ज्यादा अपने समाज के साथ खड़े हैं।