सऊदी अरब की घेराबंदी में जुटे हूती विद्रोही! बंदरगाह शहर मोचा पर किया कब्जा
मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारे में भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन अचानक पूरी तरह डगमगा गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर तट पर स्थित ऐतिहासिक और सामरिक रूप से अति-महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोचा (Al-Mokha) पर भीषण जमीनी हमले के बाद पूरी तरह कब्जा जमाने का दावा किया है।
सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं, स्थानीय यमनी सरकारी बलों और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक पहरेदारों को चकमा देकर हूती लड़ाकों ने जिस तेजी से मोचा के रिहायशी, सैन्य और बंदरगाह परिसरों पर नियंत्रण किया है, उसने रियाद से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। इस अप्रत्याशित सैन्य बढ़त के बाद सऊदी अरब समर्थित 'नेशनल रेसिस्टेंस फोर्सेज' के लड़ाकों को अपनी चौकियों को छोड़कर दक्षिण की ओर पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बाब-अल मंडेब के मुहाने पर पहुंचे विद्रोही: सऊदी अरब की तेल सप्लाई लाइन पर सीधा खतरा
मोचा शहर केवल एक सामान्य तटीय इलाका नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे संकरे और रणनीतिक चोकपॉइंट बाब-अल मंडेब (Bab el-Mandeb Strait) से मात्र 70 से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मोचा पर काबिज होते ही हूती लड़ाकों को तटीय रडार लगाने, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें तैनात करने और विस्फोटक आत्मघाती ड्रोन लॉन्च करने के लिए एक मजबूत और सीधा लॉन्चपैड मिल गया है। फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले से बने तनाव के बाद सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के एक बड़े हिस्से को पश्चिमी देशों तक पहुंचाने के लिए लाल सागर के तटवर्ती बंदरगाहों (जैसे यानबू और जेद्दा) पर निर्भर था। अब मोचा से बाब-अल मंडेब तक हूतियों की सीधी मिसाइल जद बनने से सऊदी अरब का यह वैकल्पिक सुरक्षित रूट भी पूरी तरह उनके निशाने पर आ गया है, जिससे सऊदी तेल निर्यात की जीवनरेखा पर तलवार लटक गई है।
'इस्लामिक नाटो' और पश्चिमी नौसैनिक टास्क फोर्स की रणनीति फेल
हूतियों की इस जमीनी जीत ने सऊदी अरब की अगुवाई वाले इस्लामिक सैन्य गठबंधन (जिसे अक्सर 'इस्लामिक नाटो' कहा जाता है) और लाल सागर में तैनात अमेरिका-ब्रिटेन के साझा नौसैनिक टास्क फोर्स की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अरबों डॉलर के अत्याधुनिक अमेरिकी व पश्चिमी रक्षा उपकरणों, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और आधुनिक फाइटर जेट्स के बावजूद गठबंधन सेनाएं जमीनी स्तर पर हूतियों के गुरिल्ला तंत्र को रोकने में नाकाम साबित हुई हैं। सऊदी गठबंधन के भीतर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और स्थानीय समर्थक गुटों के बीच उपजे अंतर्विरोध और जमीन पर सैनिकों के बीच समन्वय की भारी कमी का पूरा फायदा उठाते हुए हूतियों ने बिजली की तेजी से यह ऑपरेशन पूरा किया। विश्लेषकों का मानना है कि हवाई हमलों के दम पर जमीनी जंग जीतने की सऊदी रणनीति मोचा में पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
हनिश और पेरीम द्वीप पर नजर: क्या पूरी तरह बंद हो जाएगा लाल सागर?
मोचा शहर हाथ में आने के बाद हूतियों का अगला स्पष्ट लक्ष्य बाब-अल मंडेब के बीचों-बीच स्थित पेरीम द्वीप (Perim Island) और पास के हनिश द्वीप समूह बताए जा रहे हैं। यदि हूती इन द्वीपों पर अपनी तोपें या मिसाइल बैटरियां तैनात करने में सफल हो जाते हैं, तो लाल सागर का पूरा दक्षिणी दरवाजा भौतिक रूप से सील हो जाएगा।
इस स्थिति में स्वेज नहर से होकर गुजरने वाला वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो जाएगा और दुनिया भर के जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' का 15 से 20 दिन लंबा और बेहद महंगा चक्कर लगाना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले ही कच्चे तेल के दामों में उछाल के संकेत दिखने लगे हैं, क्योंकि कोई भी शिपिंग बीमा कंपनी अब लाल सागर से गुजरने वाले टैंकरों का जोखिम उठाने को तैयार नहीं दिख रही है।
रियाद में आपात बैठक, आगे और भीषण हो सकता है युद्ध
मोचा पर कब्जे की खबरों के बाद सऊदी रक्षा मंत्रालय और यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठकें बुलाई हैं। सऊदी वायुसेना ने हुदैदाह और मोचा के बाहरी इलाकों में हूतियों के लॉजिस्टिक्स काफिलों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक शुरू कर दी हैं ताकि उन्हें शहर में पक्के बंकर बनाने से रोका जा सके।
हालांकि, हूतियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई, तो वे सीधे सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों और सैन्य ठिकानों पर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागने से नहीं हिचकेंगे। लाल सागर के किनारे छिड़ी यह नई जंग अब केवल यमन का आंतरिक संघर्ष नहीं रही, बल्कि इसने पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े और विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।