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September 11 2026 06:02 pm

मध्यावधि चुनावों पर भारतीयों के सर्वे से डरे डोनाल्ड ट्रंप? निशाने पर आने के बाद हटाया 'मिस्टर सिंह' वाला नस्लभेदी

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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) की सरगर्मियों के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपने एक नस्लभेदी और विवादित कदम पर भारी फजीहत का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security - DHS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किए गए उस एआई-जनरेटेड विज्ञापन और वीडियो को डिलीट कर दिया है, जिसमें भारतीय और सिख समुदाय को आपत्तिजनक तरीके से सीधे टारगेट किया गया था।

इस विज्ञापन में 'ट्रांसफॉर्मर्स' कार्टून थीम की आड़ में एक दाढ़ी वाले सिख व्यक्ति को ट्रक चलाते हुए दिखाया गया था और साथ में संदेश लिखा था—"हमारी सड़कों से हट जाओ, 'मिस्टर सिंह' आपको गाड़ी चलाना नहीं आता"। इसके साथ ही 'सेल्फ डिपोर्ट' (खुद देश छोड़ो) का अल्टीमेटम भी दिया गया था।

इस पोस्ट के सामने आते ही अमेरिका भर के भारतीय-अमेरिकी संगठनों, सिख संस्थाओं और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप प्रशासन को आड़े हाथों लिया और इसे सरकारी स्तर पर खुलेआम फैलाया जाने वाला 'नस्लीय दुष्प्रचार' करार दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव और चुनाव में भारी नुकसान की आशंका को देखते हुए होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने बैकफुट पर आते हुए इस पोस्ट को हटा लिया।

मध्यावधि चुनाव से पहले आया सर्वे: 66% भारतीय वोटर डेमोक्रेट्स के पाले में

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वीडियो को आनन-फानन में हटाने की मुख्य वजह सिर्फ सामाजिक नाराजगी नहीं, बल्कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया एक बड़ा राष्ट्रीय चुनावी सर्वेक्षण (Survey) है।

एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह मूल (AAPI) के मतदाताओं के बीच किए गए ताजा सर्वेक्षण में ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजी है:

डेमोक्रेट्स को भारी बढ़त: सर्वेक्षण में शामिल 66 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने साफ किया है कि वे प्रतिनिधि सभा (House) और सीनेट (Senate), दोनों के चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने जा रहे हैं।

वोटिंग का जबरदस्त उत्साह: 90 फीसदी से अधिक पंजीकृत एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह मतदाता इन मध्यावधि चुनावों में मतदान करने का पक्का इरादा बना चुके हैं।

रिपब्लिकन की अनदेखी से नाराजगी: 58 फीसदी मतदाताओं ने शिकायत दर्ज कराई कि रिपब्लिकन पार्टी ने उनसे कोई ठोस जमीनी संवाद स्थापित करने की कोशिश नहीं की।

अमेरिका के स्विंग स्टेट्स (Swing States) में जहां कुछ हजार वोटों से जीत-हार तय होती है, वहां भारतीय-अमेरिकी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक संघीय एजेंसी द्वारा सीधे 'सिंह' उपनाम को खलनायक की तरह पेश करने से रिपब्लिकन पार्टी के रणनीतिकारों के होश उड़ गए।

कैलिफोर्निया के गवर्नर और भारतीय संगठनों का तीखा प्रहार

वीडियो सामने आते ही कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा, "यह बेहद घिनौना है। डोनाल्ड ट्रंप की सरकार सिख समुदाय को निशाना बनाकर खुला नस्लवादी दुष्प्रचार कर रही है"। सांसद राजा कृष्णमूर्ति और एडम शिफ समेत कई बड़े डेमोक्रेट सांसदों ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताया।

वहीं, 'हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन' (HAF), 'सिख कोएलिशन' और 'कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि लाखों सिख और हिंदू 'सिंह' उपनाम गर्व से लिखते हैं, वे देशभक्त अमेरिकी नागरिक हैं और देश की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में ट्रक ड्राइवर्स के रूप में दिन-रात योगदान दे रहे हैं। संगठनों ने सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को टैग करते हुए इस बात की उच्चस्तरीय जांच की मांग की कि एक संघीय एजेंसी इस तरह का भेदभावपूर्ण कंटेंट कैसे जारी कर सकती है।

'5 हजार डॉलर का दांव' बनाम 'इमिग्रेशन पर सख्ती': दोहरी चाल में फंसे ट्रंप

मध्यावधि चुनावों में संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण खोने के डर से ट्रंप प्रशासन इन दिनों कई विरोधाभासी कदम उठाता नजर आ रहा है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप मतदाताओं को लुभाने के लिए यह वादा कर रहे हैं कि अगर रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो प्रत्येक अमेरिकी वयस्क को सीधे 5,000 अमेरिकी डॉलर का चेक भेजा जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन लगातार प्रवासियों और गैर-आप्रवासी कुशल कामगारों के खिलाफ कड़े नियम ला रहा है। हाल ही में H-1B, L-1 और O-1 वीजा धारकों के लिए 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म कर नौकरी जाते ही तुरंत अमेरिका छोड़ने का प्रस्ताव लाया गया। एक तरफ भारतीय समुदाय के कुशल कामगारों और वीजाधारकों पर शिकंजा कसना और दूसरी तरफ चुनाव में उनके वोट बैंक से हाथ धोने का डर—ट्रंप प्रशासन की इसी घबराहट ने उन्हें 'मिस्टर सिंह' वाले वीडियो पर कदम पीछे खींचने को मजबूर कर दिया है।