चुनावी रेवड़ी के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरीं मायावती: बोलीं- 'महिलाओं को नकद रुपये देने का वादा सिर्फ छलावा'

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चुनावी लाभ के लिए बांटी जाने वाली 'रेवड़ी संस्कृति' और मतदाताओं को दिए जाने वाले प्रलोभनों के खिलाफ जोरदार राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मायावती ने विपक्षी दलों द्वारा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को नकद रुपये बांटने और लोकलुभावन घोषणाएं करने की रणनीति को एक बड़ा 'चुनावी छलावा' और विश्वासघात करार दिया।

बसपा सुप्रीमो ने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिए मतदान से पहले महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निजी लाभ वाली रेवड़ियों और अवास्तविक योजनाओं का लालच देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनुचित ढंग से प्रभावित किया जा रहा है। मायावती के इस आक्रामक रुख को समाजवादी पार्टी द्वारा हाल ही में महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये नकद देने के ऐलान और अन्य दलों की फ्रीबीज (मुफ्त उपहार) राजनीति पर सीधे पलटवार के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव समाप्त होते ही ऐसी पार्टियां अपने वादों से मुकर जाती हैं और जनता ठगी की ठगी रह जाती है।

बसपाइयों को सख्त हिदायत: गांव-गांव जाकर मतदाताओं और खासकर महिलाओं को करें सतर्क

मायावती ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं और मंडल प्रभारियों के साथ मैराथन समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने जमीनी कैडर को सख्त निर्देश दिए कि वे विरोधी दलों के छल, प्रलोभन, दबाव और भेदभाव की राजनीति का पर्दाफाश करें। बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे पोलिंग बूथ और गांव स्तर पर जाएं और विशेषकर महिला मतदाताओं को जागरूक करें कि वे ऐसे अल्पकालिक लाभों के झांसे में न आएं, जिससे उनका और उनके बच्चों का दीर्घकालिक भविष्य दांव पर लग जाए।

बसपा कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के महत्व को हर चौपाल तक पहुंचाएं। मायावती ने कहा कि किसी भी लोक कल्याणकारी सरकार का संवैधानिक दायित्व होता है कि वह पांचों वर्ष लगातार जनहित, विकास और रोजगार के लिए काम करे, न कि केवल मतदान के महीने भर पहले खजाने का मुंह खोलकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास करे। सरकारी स्तर पर की जा रही वर्तमान तात्कालिक घोषणाओं को उन्होंने 'ऊंट के मुंह में जीरा' करार दिया।

'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' युवाओं की आवाज और बेरोजगारी पर सरकार की घेराबंदी

बैठक के दौरान मायावती ने केवल रेवड़ी राजनीति का ही विरोध नहीं किया, बल्कि देश और प्रदेश में युवाओं की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से 'जेन-जी' (Gen-Z) और 'जेन-अल्फा' (Gen-Alpha) पीढ़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी आज पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी, लगातार बढ़ती महंगाई और अवसरों की कमी से बुरी तरह त्रस्त है। जब ये युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार के लिए शांतिपूर्ण आवाज उठाते हैं, तो उन्हें पुलिस मुकदमों और प्रशासनिक दमन का सामना करना पड़ता है।

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश से रोजी-रोटी और रोजगार के अभाव में युवाओं और कामगारों का पलायन लगातार जारी है। खासकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इलाकों में गरीबी, कर्ज और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण जनता का जीवन अत्यंत दुरूह हो चुका है। उन्होंने मांग की कि राहत और आपदा प्रबंधन के नाम पर की जाने वाली घोषणाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरतमंद परिवारों तक तुरंत नकद सहायता और पुनर्वास के ठोस संसाधन पहुंचाए जाएं।

संगठन विस्तार, 40 सीटों पर प्रभारी और 9 अक्टूबर के महाआयोजन की तैयारी

मिशन 2027 के लिए बहुजन समाज पार्टी ने अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को नए सिरे से पुनर्गठित करना तेज कर दिया है। चुनाव आयोग के हालिया मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद बसपा ने सभी बूथ कमेटियों को सक्रिय कर दिया है। पार्टी अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य यूपी और पूर्वांचल की 40 से अधिक विधानसभा सीटों पर अपने संभावित प्रत्याशियों (प्रभारियों) के नाम तय कर चुकी है। बाकी बची सीटों पर भी सामाजिक समीकरणों और काडर की रिपोर्ट के आधार पर जल्द फैसले लिए जा रहे हैं।

इसके साथ ही, मायावती ने पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि (परिनिर्वाण दिवस) के कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। इस वर्ष यह आयोजन किसी जिले विशेष में अलग-अलग न होकर केवल राजधानी लखनऊ में राज्य स्तर पर एक बड़े सम्मेलन के रूप में होगा। लखनऊ के वीआईपी रोड स्थित भव्य 'मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल' (बौद्ध स्मृति उपवन के सामने) में पूरे प्रदेश से लाखों कार्यकर्ताओं का जुटान होगा। इस महासम्मेलन के जरिए बसपा अपने परंपरागत जनाधार के साथ-साथ पिछड़े, मुस्लिम और सर्वसमाज के मतदाताओं को साधकर शक्ति प्रदर्शन करेगी।

'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' बनाम रेवड़ी राजनीति: 2027 के रण में बसपा का क्या है रोडमैप?

मायावती ने अपने चार बार के मुख्यमंत्रित्व काल का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं को समझाया कि बसपा कभी भी लोकलुभावन घोषणाओं और छलावे की राजनीति में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारों में कानून-व्यवस्था की बहाली, सख्त प्रशासनिक नियंत्रण, स्थाई सरकारी नियुक्तियां, और 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति के तहत बुनियादी ढांचे का ऐतिहासिक निर्माण कराया गया था।

मायावती का स्पष्ट मानना है कि जनता को आत्मसम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता चाहिए, न कि हर महीने चंद रुपयों की खैरात, जिसे सरकारें अपनी सुविधानुसार कभी भी बंद कर सकती हैं। बसपा आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पक्ष की जनविरोधी नीतियों और मुख्य विपक्षी दल के हवाई वादों, दोनों को कठघरे में खड़ा करेगी। लखनऊ से शुरू हुआ मायावती का यह संदेश साफ संकेत देता है कि बसपा 2027 के चुनाव को पूरी आक्रामकता, कैडर की ताकत और वैचारिक स्पष्टता के साथ त्रिकोणीय बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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