नेपाल में सैलाब के बाद बड़ी गंडक नदी में भारी उफान: कुशीनगर के खड्डा रेता क्षेत्र में बाढ़ का खतरा, वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खुले
पड़ोसी देश नेपाल और तिब्बत के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश व ग्लेशियर जनित झीलों के फटने के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले कुशीनगर में बड़ी गंडक (नारायणी) नदी विकराल रूप धारण करने लगी है। नेपाल की त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों में आए भारी उफान के कारण भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर पानी का भारी दबाव बन गया है। बैराज से बड़ी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किए जाने के चलते कुशीनगर के तटीय और निचले इलाकों में एक बार फिर बाढ़ और नदी कटान की गंभीर विभीषिका मंडराने लगी है। जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में लगातार मुनादी कराई जा रही है।
गंडक नदी के अचानक बढ़े जलस्तर से जिले की खड्डा और तमकुहीराज तहसील के दर्जनों तटीय गांवों के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। नदी के उस पार स्थित दुर्गम रेता क्षेत्र, जो भौगोलिक रूप से मुख्य भूभाग से कटा हुआ है, वहां बाढ़ का पानी तेजी से फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई है। नदी की तेज धारा और जलप्रवाह की गति को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के अधिकारी 24 घंटे नदी के हर उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
वाल्मीकिनगर बैराज के खोले गए सभी 36 फाटक: छितौनी बांध और संवेदनशील ठोकरों पर बढ़ा दबाव
नेपाल से आ रहे पानी के भारी दबाव को नियंत्रित करने के लिए वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटकों को ऊपर उठा दिया गया है। बैराज से नदी में जलस्तर का डिस्चार्ज लगातार बढ़ रहा है, जिससे कुशीनगर में छितौनी तटबंध के भैंसहा गेज पर नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 सेंटीमीटर के बेहद करीब पहुंच गया है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, जलस्तर में हो रही इस बढ़ोतरी के कारण छितौनी बांध के भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन, वीरभार ठोकर और नरवा जोत एपी बांध के संवेदनशील स्परों पर नदी की मुख्य धारा का सीधा दबाव बनने लगा है।
बाढ़ खंड के अभियंताओं की टीमें तटबंधों पर संवेदनशील बिंदुओं की दिन-रात निगरानी कर रही हैं। नदी के कटान को रोकने के लिए बालू की बोरियों, जियो बैग्स और बोल्डर पिचिंग के जरिए आपातकालीन सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यद्यपि तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए सभी तकनीकी प्रबंध किए जा चुके हैं, लेकिन यदि नेपाल के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रही और बैराज से डिस्चार्ज और बढ़ा, तो तटबंधों की सुरक्षा पर भारी दबाव पड़ सकता है।
खड्डा रेता क्षेत्र और निचले इलाकों में सायरन: ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कवायद
बड़ी गंडक के उफनाने से सबसे अधिक खतरा खड्डा तहसील के अंतर्गत आने वाले रेता क्षेत्र के गांवों पर मंडरा रहा है। इस क्षेत्र के प्रमुख गांव शिवपुर, शाहपुर, गेडहवा, कटान टोला, कनमिसवां, मरचहवा और हरिहरपुर जैसे इलाकों में रहने वाले हजारों ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इन इलाकों में सायरन बजवाकर और लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी जारी की है। शाहपुर और निचले टापू नुमा इलाकों में रहने वाले परिवारों और उनके मवेशियों को नावों के जरिए सुरक्षित ऊंचे स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
रेता क्षेत्र के ग्रामीणों का मुख्य पेशा खेती और पशुपालन है, ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ते ही फसलों के जलमग्न होने और मवेशियों के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी गंडक उफान पर होती है, तो उनका संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न किट, तिरपाल, आवश्यक दवाइयां, क्लोरीन की गोलियां और मवेशियों के लिए चारे का अग्रिम भंडारण करने के निर्देश दिए हैं ताकि बाढ़ आने की स्थिति में किसी भी नागरिक को बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े।
प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ मुस्तैद: नावों, मोटरबोट और कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी
कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने प्रशासनिक अमले के साथ प्रभावित तटीय क्षेत्रों, तटबंधों और रेता क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) की विशेष टीमों को मोटरबोट्स और आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों के साथ मौके पर तैनात किया गया है। इसके साथ ही प्रांतीय सशस्त्र सीमा बल (PAC) की प्लाटून और स्थानीय गोताखोरों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
नदी के किनारे स्थित चार प्रमुख थानों—खड्डा, हनुमानगंज, तरयासुजान और सेवरही को पुलिस गश्त बढ़ाने और त्वरित राहत दल तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में 24 घंटे सक्रिय रहने वाला केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 05564-240590 जारी किया गया है। राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करते हुए उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उपस्थित रहने और पल-पल की रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजने का आदेश दिया गया है।
नदी में बहकर आ रहा मलबा और जान जोखिम में डालते लोग: प्रशासन की सख्त चेतावनी
नेपाल में आई तबाही के बाद गंडक नदी की तेज धारा में भारी मात्रा में जंगल की बेशकीमती लकड़ियां, पेड़, गैस सिलेंडर और अन्य घरेलू सामान बहकर भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। छितौनी बांध के किनारे और नदी के तटवर्ती गांवों में स्थानीय लोग और बच्चे इन सामानों और लकड़ियों को पकड़ने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी की तेज धारा में उतर रहे हैं।
जिला प्रशासन और पुलिस ने इसे अत्यंत खतरनाक बताते हुए नदी के किनारे लोगों के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। तटबंधों पर पुलिस और होमगार्ड के जवानों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय हादसे को रोका जा सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों से स्पष्ट अपील की है कि तेज बहाव वाली नदी के पास न जाएं और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देकर केवल प्रशासनिक सूचनाओं और निर्देशों का पालन करें।
बाढ़ विभीषिका से बचाव के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय और स्थानीय जनजीवन की स्थिति
गंडक नदी प्रतिवर्ष मानसून के दौरान कुशीनगर और महराजगंज के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाती है। नदी के मिजाज में आने वाला अचानक बदलाव लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है। राज्य सरकार ने इस वर्ष पहले से ही तटबंधों के सुदृढ़ीकरण और संवेदनशील स्परों की मरम्मत के लिए बजट जारी किया था, जिसके चलते कई स्थानों पर कटान को प्रभावी ढंग से थामा जा सका है।
प्रशासन का कहना है कि जब तक नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम पूरी तरह शांत नहीं हो जाता और वाल्मीकिनगर बैराज पर डिस्चार्ज का स्तर स्थिर नहीं होता, तब तक राहत व बचाव तंत्र पूरी मुस्तैदी से काम करता रहेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी कुशीनगर और महराजगंज के जिलाधिकारियों से सीधे संपर्क साधकर स्थिति की समीक्षा की जा रही है। राहत चौकियों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम इंजेक्शन, ओआरएस के पैकेट और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती कर दी गई है ताकि बाढ़ के साथ-साथ मौसमी बीमारियों से भी निपटा जा सके।