बाढ़ पीड़ितों के लिए सीएम योगी का सबसे बड़ा राहत अभियान: 17 जिलों में 3 लाख लंच पैकेट, 55 हजार खाद्यान्न किट वितरित

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उत्तर प्रदेश में प्रमुख नदियों के उफान और पड़ोसी राज्यों व नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान छेड़ दिया है। प्रदेश के 17 बाढ़ प्रभावित जनपदों में जनजीवन को सुरक्षित रखने और संकट में फंसे नागरिकों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए पूरी प्रशासनिक मशीनरी को 24 घंटे अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के तहत शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक समयबद्ध तरीके से भोजन, शुद्ध पेयजल, सुरक्षित आश्रय, दवाइयां और उनके मवेशियों के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के 17 जनपदों—अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, संतकबीरनगर, शाहजहांपुर और वाराणसी के लगभग 1.70 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच समय पर किए गए प्रभावी प्रबंधन और त्वरित बचाव कार्यों का ही नतीजा है कि प्रदेश में अब तक कोई जनहानि या पशुहानि नहीं होने पाई है। मुख्यमंत्री खुद प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारियों व मंत्रियों को फील्ड में कैंप करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

3 लाख से अधिक लंच पैकेट और 55 हजार खाद्यान्न किट: भूख मिटाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास

बाढ़ जैसी विषम परिस्थिति में सबसे बड़ी और तात्कालिक चुनौती प्रभावित परिवारों तक समय पर भोजन पहुंचाने की होती है। इस मोर्चे पर योगी सरकार ने अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय के ताजा बुलेटिन के अनुसार, प्रभावित इलाकों में अब तक 3 लाख 2 हजार से अधिक ताजा लंच पैकेट और 55,572 से अधिक संपूर्ण बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट सीधे पीड़ितों के घरों और राहत शिविरों तक पहुंचाए जा चुके हैं। प्रशासन द्वारा रोजाना हजारों नए पैकेट तैयार कर नावों और मोटरबोट्स के जरिए दूर-दराज के जलमग्न टोलों में वितरित किए जा रहे हैं।

सरकार द्वारा वितरित की जा रही प्रत्येक विशेष बाढ़ राहत खाद्यान्न किट में एक महीने की आवश्यक राशन सामग्री शामिल की गई है। इस किट में 10 किलोग्राम आटा, 10 किलोग्राम चावल, 10 किलोग्राम आलू, 2 किलोग्राम अरहर दाल, 2 किलोग्राम चना, 2 किलोग्राम भुना चना, 2.5 किलोग्राम लाई, 1 किलोग्राम चीनी, 1 किलोग्राम शुद्ध खाद्य तेल, 1 किलोग्राम नमक और सब्जी मसालों के पैकेट शामिल हैं। इसके साथ ही दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किट में 10 पैकेट बिस्कुट, माचिस, मोमबत्ती, नहाने और कपड़े धोने के साबुन, डेटॉल, सेनेटरी पैड्स, तौलिया, बाल्टी, मग, टॉर्च, तिरपाल और एक मजबूत छतरी भी प्रदान की जा रही है। इस व्यापक व्यवस्था से जलभराव से घिरे परिवारों को भोजन के लिए किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

1633 बाढ़ चौकियां और 254 शरणालय: सुरक्षित ठिकानों पर 24 घंटे बिजली, पानी और चिकित्सा सुविधा

बाढ़ के पानी से घिरे निचले इलाकों और कटान प्रभावित गांवों से नागरिकों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान संचालित किया जा रहा है। सरकार ने जलमग्न क्षेत्रों में आवागमन और राहत पहुंचाने के लिए 525 से अधिक नावों और मोटरबोट्स को तैनात किया है। इसके अतिरिक्त, नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और प्रांतीय सशस्त्र सीमा बल (PAC) की फ्लड यूनिट्स आधुनिक उपकरणों और लाइफ जैकेट्स के साथ ग्राउंड जीरो पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

प्रभावित जिलों में सूक्ष्म निगरानी बनाए रखने के लिए कुल 1,633 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जहां से स्थानीय स्तर पर राहत गतिविधियों को गति दी जा रही है। वहीं, बेघर हुए और पानी से घिरे ग्रामीणों को ठहराने के लिए प्रदेशभर में 254 विशाल बाढ़ शरणालय (राहत शिविर) स्थापित किए गए हैं। इनमें से 46 शरणालय वर्तमान में पूरी तरह सक्रिय हैं, जहां 1,150 से अधिक नागरिक सुरक्षित रूप से निवास कर रहे हैं। इन आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट्स, पंखे, महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा कक्ष और चौबीसों घंटे चालू रहने वाली सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) का संचालन किया जा रहा है।

पशुधन की सुरक्षा और चारे का मुकम्मल प्रबंध: 20 हजार से अधिक मवेशियों तक पहुंचा भूसा

बाढ़ के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन की रक्षा करना किसानों और पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी चिंता होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की सुरक्षा और उनके भरण-पोषण में तनिक भी लापरवाही न बरती जाए। इस नीति के तहत पशुपालन विभाग ने बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में विशेष पशु राहत शिविर स्थापित किए हैं।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में बाढ़ से प्रभावित 20,556 मवेशियों के लिए 425.89 क्विंटल से अधिक सूखा भूसा और पौष्टिक चारा वितरित किया जा चुका है। इसके साथ ही, पशु चिकित्सा अधिकारियों की सचल टीमें गांव-गांव जाकर मवेशियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं और गलघोंटू व खुरपका जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए अनिवार्य टीकाकरण कर रही हैं। बाढ़ के पानी से घिरे मवेशियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों और सरकारी गौशालाओं में स्थानांतरित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

महामारी से बचाव के लिए 200 मेडिकल टीमें तैनात: क्लोरीन और ओआरएस का घर-घर वितरण

बाढ़ के पानी के ठहराव से जलजनित और संक्रामक बीमारियों जैसे डायरिया, हैजा, डेंगू, मलेरिया, आई फ्लू और त्वचा संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संभावित खतरे से निपटने के लिए प्रभावित जिलों में 200 से अधिक विशेष मेडिकल टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में उतार दिया है। ये डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नावों के जरिए घर-घर जाकर पीड़ितों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं।

दूषित पानी के सेवन से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए अब तक प्रभावित बस्तियों में 5,432 से अधिक क्लोरीन टैबलेट और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए 5,441 से अधिक ओआरएस (ORS) पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, बाढ़ चौकियों और शिविरों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम (सर्पदंश की दवा), एंटी-रेबीज इंजेक्शन, पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और प्राथमिक चिकित्सा पट्टियां आरक्षित रखी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल एंबुलेंस यूनिट्स को भी तैयार रखा है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में गंभीर मरीजों को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में भर्ती कराया जा सके।

सीएम योगी की सीधी निगरानी और शून्य जनहानि का लक्ष्य: अधिकारियों को 24 घंटे फील्ड में रहने के सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं कई प्रभावित जनपदों, जैसे बलिया, गोरखपुर और तराई के क्षेत्रों का हवाई और स्थलीय निरीक्षण कर राहत कार्यों की हकीकत जांची है। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, मुख्य विकास अधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि कोई भी अधिकारी अपना मुख्यालय नहीं छोड़ेगा और राहत सामग्री के वितरण में किसी भी प्रकार की धांधली या विलंब को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी तत्परता दिखाई है। अब तक क्षतिग्रस्त हुए 12 मकानों में से 11 मामलों में पीड़ितों को तुरंत आर्थिक सहायता राशि सीधे बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। राजस्व विभाग की टीमें जलस्तर घटने के साथ ही फसलों के नुकसान का सर्वे करेंगी ताकि किसानों को उनकी नष्ट हुई फसलों का उचित मुआवजा तत्काल दिलाया जा सके। योगी सरकार का यह सर्वांगीण और मानवीय राहत मॉडल यह सुनिश्चित कर रहा है कि आपदा की इस घड़ी में हर प्रभावित नागरिक को सरकार की पूरी मदद और संबल मिल सके।