चित्रकूट में मंदाकिनी का विकराल रूप: 90 साल में आई सबसे भीषण बाढ़ से जलमग्न हुआ रामघाट, दर्जनों आश्रम और सैकड़ों दुकानें डूबीं; प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट
चित्रकूट: भगवान श्रीराम की तपोभूमि धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी (पयस्विनी) नदी ने ऐसा प्रलयंकारी रूप धारण किया है जिसने पिछले 90 वर्षों के बाढ़ के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को कई मीटर पीछे छोड़ते हुए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। नदी की तेज लहरें धर्मनगरी के मुख्य घाटों, मंदिरों, संत निवासों और रिहायशी बस्तियों में प्रवेश कर चुकी हैं। चारों तरफ केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है और पूरा तीर्थ क्षेत्र बाढ़ के विकराल संकट से जूझ रहा है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में मंदाकिनी का ऐसा भयावह और आक्रामक रूप कभी नहीं देखा।
रामघाट से लेकर प्रमुख तीर्थ स्थलों तक जलप्रलय: तबाही का मंजर
मंदाकिनी नदी में आई इस ऐतिहासिक बाढ़ का सबसे ज्यादा असर चित्रकूट के प्रसिद्ध रामघाट पर देखने को मिला है। रामघाट की सभी सीढ़ियां, आरती स्थल, चेंजिंग रूम और घाट किनारे बने सैकड़ों छोटे-बड़े मंदिर पूरी तरह पानी में समा चुके हैं। भगवान कामतानाथ के दर्शन और मंदाकिनी स्नान के लिए देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
रामघाट के आसपास का बाजार, जहां कभी दिन-रात चहल-पहल रहती थी, अब पांच से आठ फीट गहरे पानी में डूबा हुआ है। पानी की तेज धार के कारण घाट किनारे बंधी नावें बह गईं और कई अस्थायी ढांचे ढह गए। मत्तगजेंद्र नाथ शिव मंदिर, राघव प्रयाग घाट और भरत मंदिर के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि घाट किनारे बने पक्के भवनों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच चुका है, जिसके चलते लोग अपनी छतों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
90 साल का टूटा रिकॉर्ड: सती अनुसूया और जंगलों में अतिवृष्टि
भूवैज्ञानिकों और स्थानीय जानकारों के अनुसार मंदाकिनी नदी का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मझगवां और सती अनुसूया के घने जंगलों में है। पिछले 48 घंटों में इन पहाड़ी क्षेत्रों और कैचमेंट एरिया में रिकॉर्ड तोड़ मानसूनी बारिश दर्ज की गई है। जंगलों और विंध्य पर्वतमाला से बहकर आने वाले बरसाती नालों ने मंदाकिनी के जलस्तर को कुछ ही घंटों में कई गुना बढ़ा दिया।
वर्ष 1930 के दशक के बाद चित्रकूट में इस स्तर की बाढ़ पहली बार दर्ज की गई है। नदी का बहाव इतना तीव्र है कि सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गए तटबंध और सुरक्षा दीवारें भी पानी के दबाव को नहीं झेल पाईं। अनुसूया आश्रम, स्फटिक शिला और गुप्त गोदावरी जाने वाले कई मुख्य संपर्क मार्ग पानी में डूब जाने से धर्मनगरी का संपर्क कई प्रमुख तीर्थ स्थलों से पूरी तरह कट गया है।
दर्जनों आश्रम जलमग्न: संतों और व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान
चित्रकूट को संतों और तपस्वियों की भूमि माना जाता है, जहां मंदाकिनी के तट पर सैकड़ों प्राचीन आश्रम और गुरुकुल स्थित हैं। बाढ़ का पानी अचानक बढ़ने के कारण दर्जनों आश्रमों में पानी भर गया है। कई आश्रमों के अन्न क्षेत्र (भंडारे), गौशालाएं और पुस्तकालय बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। संतों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए स्थानीय लोग और नाविक आगे आए हैं, जबकि गौवंश को बचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, रामघाट, प्रमोद वन, सीतापुर और कर्वी के बाजारों में व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि दुकानदारों को अपनी दुकानों से सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला। प्रसाद, धार्मिक साहित्य, लकड़ी के खिलौने, कपड़े और आयुर्वेदिक दवाओं की सैकड़ों दुकानें जलमग्न हो गईं, जिससे करोड़ों रुपये का माल पानी में बह गया या भीगकर पूरी तरह नष्ट हो गया।
प्रशासन का हाई अलर्ट: NDRF, SDRF और प्रशासनिक अमला मैदान में
बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश (चित्रकूट जिला प्रशासन) और मध्य प्रदेश (सतना जिला प्रशासन) दोनों ही राज्यों के आला अधिकारी अलर्ट मोड पर आ गए हैं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने खुद मोटरबोट से बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया।
बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए NDRF और SDRF की टीमों को तुरंत तैनात किया गया है। स्थानीय गोताखोरों और पीएसी की मोटरबोट्स के जरिए निचले इलाकों से परिवारों और साधु-संतों को निकालकर सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने स्कूलों, धर्मशालाओं और कम्युनिटी सेंटरों को अस्थाई राहत शिविरों में तब्दील कर दिया है, जहां बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है।
बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित: महामारी से बचाव की तैयारी
बाढ़ के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों के कई बिजली सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मरों में पानी भर गया है, जिसके चलते एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। पेयजल की पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त होने और बोरवेल डूबने के कारण धर्मनगरी में शुद्ध पेयजल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ के पानी के उतरने के साथ फैलने वाली संक्रामक बीमारियों जैसे हैजा, डायरिया, डेंगू और त्वचा रोगों से निपटने के लिए डॉक्टरों की विशेष टीमें गठित की हैं। प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस के पैकेट और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
श्रद्धालुओं और नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी
प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में मंदाकिनी नदी के घाटों, पुलों और जलमग्न सड़कों के नजदीक न जाएं। सेल्फी लेने या बाढ़ देखने के लिए घाटों पर जुटने वाली भीड़ को हटाने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। बाहरी जनपदों और राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को फिलहाल अपनी चित्रकूट यात्रा टालने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाले जिला आपदा कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।