US CPT Rules Tightened: अमेरिका में भारतीय छात्रों को ट्रंप प्रशासन का बड़ा झटका; इंटर्नशिप और CPT नियमों पर चला हंटर
वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे और वहां इंटर्नशिप व नौकरियों के जरिए करियर संवारने का सपना देख रहे लाखों भारतीय छात्र-छात्राओं को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के तहत कार्यरत स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) ने एक सख्त मेमो जारी करते हुए 'करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (CPT) के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल उन्हीं इंटर्नशिप्स को कार्य प्राधिकरण (Work Authorization) दिया जाएगा जो छात्र की डिग्री और पाठ्यक्रम का अनिवार्य (Mandatory) हिस्सा हैं। वैकल्पिक या इलेक्टिव कोर्सेज के आधार पर दी जाने वाली ऑफ-कैंपस वर्क परमिट की अनुमति को तुरंत प्रभाव से अमान्य करार दिया गया है। इस कड़े कदम के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले (UC Berkeley), यूसीएलए (UCLA), यूसी डेविस, पर्ड्यू और यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस (UIUC) सहित कई शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के CPT आवेदनों को प्रोसेस करने पर अस्थाई रोक लगा दी है, जिससे अमेरिका में पढ़ रहे 3 लाख से अधिक भारतीय छात्रों के सामने भविष्य और एजुकेशन लोन चुकाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
CPT नियमों पर ट्रंप सरकार का हंटर: क्या है नया SEVP मेमो और क्यों मचा हड़कंप?
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) द्वारा जारी आधिकारिक मेमो में साफ कहा गया है कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा CPT का उपयोग अकादमिक प्रशिक्षण के बजाय 'बैकडोर वर्क परमिट' (चोरी-छिपे काम करने) के रूप में किया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने नियमों के सख्त अनुपालन का आदेश देते हुए चेतावनी दी है कि विश्वविद्यालयों द्वारा CPT की शर्तों में किसी भी प्रकार की ढिलाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संघीय कानून के तहत CPT केवल तभी अधिकृत किया जा सकता है जब वह कार्य अनुभव स्थापित पाठ्यक्रम का 'अभिन्न अंग' (Integral Part) हो। नए मेमो में विश्वविद्यालयों के 'डेजिग्नेटेड स्कूल ऑफिशियल्स' (DSO) को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया गया है। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या विश्वविद्यालय ने मानकों से बाहर जाकर किसी छात्र को CPT या I-20 वर्क ऑथराइजेशन जारी किया, तो अधिकारी पर झूठी गवाही (Perjury) और धोखाधड़ी के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा तथा संबंधित विश्वविद्यालय का विदेशी छात्रों को दाखिला देने का सरकारी लाइसेंस (SEVP सर्टिफिकेशन) हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा। इस सख्त कानूनी चेतावनी के बाद अमेरिकी यूनिवर्सिटीज के अंतरराष्ट्रीय कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।
इलेक्टिव कोर्सेज पर CPT बंद: जानिए किस नियम में हुआ सबसे बड़ा बदलाव
अब तक अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अपनी मास्टर या बैचलर डिग्री के दौरान किसी भी 'इलेक्टिव कोर्स क्रेडिट' (ऐच्छिक विषय) के साथ अपनी समर या विंटर इंटर्नशिप को जोड़कर CPT वर्क परमिट हासिल कर लेते थे। इस व्यवस्था से कंप्यूटर साइंस, डेटा एनालिटिक्स, फाइनेंस और इंजीनियरिंग के भारतीय छात्रों को टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स और बहुराष्ट्रीय फर्मों में काम करने और डॉलर में कमाई करने का कानूनी अधिकार मिल जाता था।
नए SEVP स्पष्टीकरण ने संघीय नियम 8 CFR 214.2(f)(10)(i) की व्याख्या को पूरी तरह संकुचित कर दिया है। अब 'अभिन्न अंग' (Integral) की नई परिभाषा के अनुसार, केवल वही कोर्स CPT का आधार बन सकते हैं जो डिग्री पूरी करने के लिए 'अनिवार्य ग्रेजुएशन शर्त' (Degree Requirement) हों। यदि कोई कोर्स केवल क्रेडिट जुटाने के लिए चुना गया ऐच्छिक विषय है, जिसे छोड़े बिना भी डिग्री पूरी हो सकती है, तो उस पर CPT की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इस एक बदलाव ने लाखों भारतीय मास्टर्स छात्रों के इंटर्नशिप ऑफर्स पर पानी फेर दिया है, क्योंकि अधिकांश अमेरिकी यूनिवर्सिटीज के एमएस प्रोग्राम्स में इंटर्नशिप अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक होती है।
'डे 1 सीपीटी' और बैकडोर वर्क परमिट पर कड़ा शिकंजा
ट्रंप प्रशासन के इस कदम का एक बड़ा निशाना अमेरिका में तेजी से फल-फूल रहे 'Day 1 CPT' कॉलेज और प्रोग्राम्स हैं। 'डे 1 सीपीटी' उन कार्यक्रमों को कहा जाता है जहां छात्र दाखिला लेते ही पहले दिन से फुल-टाइम नौकरी शुरू कर देते हैं। H-1B वीजा लॉटरी में चयन न होने के बाद कानूनी रूप से अमेरिका में रुककर काम जारी रखने के लिए हजारों भारतीय और विदेशी प्रोफेशनल्स इन डे 1 CPT कॉलेजों का सहारा लेते थे।
नए नियमों के बाद ICE ने ऐसे तमाम संस्थानों पर ऑडिट और जांच की तलवार लटका दी है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कॉलेज वास्तविक कक्षा प्रशिक्षण के बिना केवल वर्क ऑथराइजेशन बेचने के उद्देश्य से कार्यक्रम चला रहा है, तो उसे वीजा फ्रॉड माना जाएगा। इस सख्ती के कारण डे 1 CPT के जरिए अमेरिका में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के वीजा स्टेटस और भविष्य की ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
बर्कले, यूसीएलए समेत टॉप यूनिवर्सिटीज ने रोकी इंटर्नशिप: छात्रों में असमंजस
संघीय सरकार की सख्त चेतावनी के तुरंत बाद कैलिफोर्निया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज ने अपने छात्रों को ईमेल भेजकर CPT आवेदनों को फ्रीज करने की सूचना दी है। यूसी बर्कले के इंटरनेशनल ऑफिस ने छात्रों को बताया कि नया मेमो पहले से कहीं अधिक कठोर है और कानूनी सलाह पूरी होने तक वे गैर-अनिवार्य कोर्स क्रेडिट वाले CPT आवेदनों को प्रोसेस नहीं कर पाएंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स (UCLA) और यूसी डेविस ने भी तत्काल प्रभाव से कोर्स-क्रेडिट CPT को सस्पेंड कर दिया है।
यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस अर्बाना-शैंपेन (UIUC) ने भारतीय छात्रों को सीधे तौर पर सतर्क करते हुए कहा है कि जिन छात्रों को फॉल या स्प्रिंग सेमेस्टर के लिए कंपनियों से इंटर्नशिप ऑफर लेटर मिल चुके हैं, वे बिना नए अपडेटेड I-20 फॉर्म के काम पर न जाएं। विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपने लीगल सलाहकारों और एकेडमिक विभागों के साथ मिलकर यह जांचने में जुटा है कि क्या डिग्री करिकुलम में आपातकालीन संशोधन करके इंटर्नशिप को अनिवार्य विषय बनाया जा सकता है या नहीं।
भारतीय छात्रों के करियर और एजुकेशन लोन पर गहरा संकट
ओपन डोर्स रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जिनकी संख्या 3.3 लाख से ऊपर है। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक छात्र एसटीईएम (STEM - साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ) और मैनेजमेंट के पीजी कोर्सेज में नामांकित हैं। अधिकांश छात्र भारत से 40 लाख से 80 लाख रुपये तक का भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका जाते हैं।
छात्रों की योजना होती है कि वे पढ़ाई के दौरान CPT इंटर्नशिप के जरिए 20 से 40 डॉलर प्रति घंटे कमाकर अपने रहने का खर्च और लोन की शुरुआती किस्तें चुकाएंगे, और इसके बाद 3 साल के STEM OPT (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) के जरिए फुल-टाइम नौकरी हासिल करेंगे। इंटर्नशिप पर रोक लगने से न केवल उनके अमेरिकी कॉरपोरेट नेटवर्क और अनुभव पर ताला लग गया है, बल्कि उनके लिए कंपनियों से प्री-प्लेसमेंट ऑफर (PPO) हासिल करना भी लगभग नामुमकिन हो जाएगा। बिना इंटर्नशिप अनुभव के डिग्री पूरी होने के बाद प्रतिस्पर्धी अमेरिकी जॉब मार्केट में फुल-टाइम नौकरी पाना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
F-1 वीजा छात्रों के लिए जरूरी सावधानियां और कानूनी सलाह
इमिग्रेशन वकीलों और छात्र सलाहकारों ने भारतीय छात्रों को सख्त हिदायत दी है कि वे नियमों का उल्लंघन करने की कोई भी गलती न करें:
बिना वैध और CPT-एंडोर्स्ड नए I-20 फॉर्म के किसी भी कंपनी या संस्थान में काम (पेड या अनपेड) कतई शुरू न करें। अनधिकृत काम करने पर वीजा तुरंत टर्मिनेट हो सकता है।
अपने विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल स्टूडेंट एडवाइजर (DSO) से संपर्क कर यह प्रमाणित करवाएं कि आपकी इंटर्नशिप डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता है या नहीं।
केवल कैंपस के अंदर लीगल 20 घंटे प्रति सप्ताह वाले पार्ट-टाइम जॉब्स (लाइब्रेरी, लैब असिस्टेंट, डाइनिंग हॉल) पर ध्यान दें, जिनके लिए विशेष CPT की आवश्यकता नहीं होती।
यदि यूनिवर्सिटी CPT देने में असमर्थ है, तो प्री-कंप्लीशन OPT के विकल्पों पर विचार करें, हालांकि इससे पोस्ट-ग्रेजुएशन OPT की अवधि कम हो सकती है।
भविष्य के किसी भी विवाद से बचने के लिए अपने प्रोफेसर, एकेडमिक एडवाइजर और डीएसओ के साथ हुए सभी पत्राचार व ईमेल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।