नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से यूपी को कितना खतरा? जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिया बड़ा अपडेट; बोले- 'हर पल सतर्क है सरकार, सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित'
बलिया/लखनऊ: नेपाल के पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में बादल फटने व ग्लेशियर टूटने से आई भीषण जल त्रासदी ने भारत के तराई क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है। पड़ोसी देश में आई इस भयानक आपदा के बाद उत्तर प्रदेश की नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ को लेकर लोगों में तरह-तरह की आशंकाएं पैदा हो रही थीं। इस बीच उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्थिति पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ किया है कि नेपाल की बाढ़ से उत्तर प्रदेश को किसी तरह का बड़ा खतरा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार, सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन हर पल पूरी तरह सतर्क हैं और नदियों के डिस्चार्ज पर 24 घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है।
नेपाल की जल त्रासदी और यूपी पर असर: जल शक्ति मंत्री का बड़ा बयान
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बलिया में स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि नेपाल में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के चलते नदियों में भारी उफान देखा गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले पानी का प्रबंधन पूरी तत्परता से किया गया है।
मंत्री ने कहा कि नेपाल की जल त्रासदी अत्यंत दुखद है, लेकिन उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमा के भीतर इसका कोई विनाशकारी प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार और प्रशासनिक तंत्र 'जीरो कैजुअल्टी' और 'सुरक्षित जल निकासी' के मंत्र पर काम कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी मुस्तैदी से ग्राउंड जीरो पर तैनात है, जिससे किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
वाल्मीकि बैराज और गंडक (नारायणी) नदी से पानी का सुरक्षित डिस्चार्ज
नेपाल से निकलने वाली नारायणी नदी जब भारतीय सीमा में प्रवेश करती है, तो इसे गंडक नदी के नाम से जाना जाता है। इस जल त्रासदी के बाद आशंका जताई जा रही थी कि वाल्मीकि बैराज पर 3 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का दबाव बनेगा, जिससे महराजगंज, कुशीनगर और आसपास के निचले इलाकों में गंभीर जलभराव हो सकता है।
जल शक्ति मंत्री ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि अनुमान के विपरीत आधी रात के समय डिस्चार्ज लगभग 1.5 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया, जिसे वाल्मीकि बैराज और संबंधित नहर प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित तरीके से आगे निकाल दिया गया। कुशीनगर के खड्डा और सीमावर्ती क्षेत्रों से यह पानी बिना किसी तटबंध को नुकसान पहुंचाए बिहार और आगे की ओर प्रवाहित हो गया है। वर्तमान में किसी भी प्रमुख बैराज पर अतिरिक्त पानी का दबाव नहीं है और सभी नियामक गेट सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं।
2017 से पहले और अब: तटबंधों की मजबूती और 100% बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं
स्वतंत्र देव सिंह ने राज्य में बाढ़ नियंत्रण प्रणाली में आए बुनियादी बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले मानसून आते ही बांध और तटबंध कट जाते थे, जिससे लाखों लोग बेघर हो जाते थे और भारी जन-धन की हानि होती थी।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में कार्यभार संभालते ही बाढ़ सुरक्षा को प्राथमिकता सूची में रखा। राज्य सरकार ने मानसून से कई महीने पहले ही संवेदनशील तटबंधों की मरम्मत, ड्रेजिंग, जियो-बैग पिचिंग और एंटी-इरोजन (कटान रोधी) परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया है। मंत्री ने बताया कि इस वर्ष विभाग की 100 फीसदी बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं समय से पूरी हो चुकी हैं, यही वजह है कि अचानक पानी का दबाव बढ़ने के बावजूद प्रदेश का एक भी प्रमुख तटबंध नहीं टूटा और सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
नेपाल सीमा से सटे तराई जिलों में 24 घंटे हाई अलर्ट और कड़ा पहरा
यद्यपि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, फिर भी राज्य सरकार ने नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील तराई जिलों में हाई अलर्ट जारी रखा है। महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शारदा, घाघरा (सरयू), राप्ती, रोहिणी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर पर प्रति घंटा निगरानी रखें।
सिंचाई विभाग के इंजीनियरों और गश्ती दलों को बांधों पर 24 घंटे पेट्रोलिंग करने के आदेश दिए गए हैं। संवेदनशील स्परों (Spurs) और तटबंधों पर फ्लड फाइटिंग सामग्री जैसे बालू की बोरियां, बोल्डर, बांस-बल्ली और तार की जाली का पर्याप्त स्टॉक पहले से आरक्षित रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित दबाव की स्थिति में तुरंत सुरक्षा घेरा बनाया जा सके।
सीएम योगी का हवाई सर्वेक्षण और 26 प्रभावित जिलों में राहत-बचाव अभियान
उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों हुई स्थानीय मानसूनी बारिश और नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण प्रदेश के करीब 26 जिलों में आंशिक या मध्यम जलभराव देखने को मिला है। इससे लगभग 251 गांवों के 1 लाख 71 हजार से अधिक नागरिक प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद प्रभावित जनपदों, विशेष रूप से बलिया के बांसडीह और बैरिया क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण और स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी बाढ़ पीड़ित को राशन, पेयजल, तिरपाल या स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को सूखे राशन की किट, डिग्निटी किट और आर्थिक सहायता सीधे वितरित की जा रही है।
आपदा प्रबंधन, SDRF-NDRF की तैनाती और प्रशासनिक एक्शन प्लान
राज्य में आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और पीएसी की फ्लड यूनिट्स को बोट्स और लाइफ जैकेट्स के साथ अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है।
बाढ़ चौकियों और कंट्रोल रूम्स को सक्रिय कर दिया गया है। निचले और जलमग्न गांवों में रहने वाले लोगों को आवश्यकतानुसार सुरक्षित स्थानों व बाढ़ राहत शिविरों में शिफ्ट करने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन विभाग को पशुओं के टीकाकरण और हरे चारे की व्यवस्था करने तथा स्वास्थ्य विभाग को सर्पदंश की दवाओं, ओआरएस और एंटी-डायरिया दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
जल शक्ति मंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया है कि सरकार की अग्रिम तैयारियों, मजबूत तटबंधों और चौबीसों घंटे निगरानी के चलते नेपाल की बाढ़ का असर उत्तर प्रदेश पर बेअसर साबित हुआ है और जनता को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।