अयोध्या राम मंदिर में बड़ा फर्जीवाड़ा: कंप्यूटर ऑपरेटरों की आईडी हैक कर बनाए गए निशुल्क दर्शन पास
अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला साइबर फर्जीवाड़ा सामने आया है। मंदिर परिसर में निशुल्क सुगम और विशिष्ट दर्शन के लिए तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों की डिजिटल आईडी को हैक कर अवैध रूप से दर्शन पास जारी किए जाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कुछ दर्शनार्थी इन संदिग्ध पासों के जरिए मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच से गुजर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। सॉफ्टवेयर सिस्टम में संभावित सेंधमारी की पड़ताल के लिए मंदिर के सॉफ्टवेयर का प्रबंधन देखने वाली एजेंसी टाटा इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी (टीईसी) को विस्तृत फॉरेंसिक और तकनीकी जांच सौंप दी गई है।
गेट पर चेकिंग के दौरान खुला राज: बिना मूल आवेदक के पहुंचे थे दर्शनार्थी
पूरा मामला जन्माष्टमी पर्व के ठीक बाद शनिवार का बताया जा रहा है। राम कोट स्थित तीर्थ क्षेत्र कार्यालय से किसी के रेफरेंस के आधार पर चार श्रद्धालुओं के नाम से विशिष्ट दर्शन पास जारी किए गए थे। जब यह दर्शनार्थी सुरक्षा जांच बिंदु (चेकिंग गेट) पर पहुंचे, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पास और पहचान पत्रों का मिलान शुरू किया। जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति की आधिकारिक आईडी पर दर्शन पास जारी हुआ था, वह स्वयं मौके पर मौजूद ही नहीं था। उसकी आईडी का उपयोग कर कोई अन्य व्यक्ति श्रद्धालुओं के समूह के साथ मंदिर में प्रवेश कराने की कोशिश कर रहा था।
संदेह होने पर सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत वायरलेस सेट के जरिए कंट्रोल रूम और संबंधित कोटा अधिकारियों से संपर्क साधा और पूछा कि क्या इस समूह के लिए कोई आधिकारिक सिफारिश भेजी गई थी। वहां से स्पष्ट जवाब मिला कि ऐसी कोई सिफारिश या अनुमति जारी नहीं की गई है। हालांकि, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा बलों ने श्रद्धालुओं को रोकने के बजाय उन्हें सामान्य दर्शन मार्ग से भेजकर रामलला के दर्शन कराए, लेकिन अवैध पास को तुरंत जब्त कर जांच शुरू कर दी गई।
टाटा इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी (TEC) कर रही है साइबर ऑडिट
प्रारंभिक विभागीय जांच में यह आशंका जताई गई है कि पास काउंटर पर बैठने वाले अधिकृत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स और आईडी को हैक किया गया या उनके पासवर्ड में सेंध लगाई गई। इसके बाद उसी ऑपरेटर आईडी का इस्तेमाल कर बैकएंड से कई विशिष्ट व वीआईपी पास जनरेट कर लिए गए।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस पूरे मामले की कमान सॉफ्टवेयर निर्माण एजेंसी टाटा इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी (TEC) को सौंप दी है। टीईसी की साइबर और टेक्निकल टीम अब सर्वर लॉग्स, आईपी एड्रेस, लॉगिन टाइम-स्टैम्प और सिस्टम डेटा का गहन विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि:
ऑपरेटरों की आईडी किस सिस्टम या लोकेशन से एक्सेस की गई?
क्या किसी बाहरी हैकर ने नेटवर्क में सेंध लगाई या फिर अंदरूनी कर्मचारियों की मिलीभगत से आईडी का दुरुपयोग हुआ?
इस तरीके से अब तक कुल कितने अवैध दर्शन पास जारी किए जा चुके हैं?
कैसे काम करती है राम मंदिर की पास प्रणाली और क्या है कोटा व्यवस्था?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम दर्शन कराने के लिए ट्रस्ट ने एक सख्त और सीमित पास व्यवस्था बना रखी है:
ऑनलाइन अग्रिम बुकिंग: श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 15 दिन पहले आरती और सुगम दर्शन के लिए सीमित संख्या में निशुल्क पास बुक कर सकते हैं। इसमें मंगला आरती, शृंगार आरती और शयन आरती के पास शामिल हैं।
दो-दो घंटे के स्लॉट और रेफरल कोटा: सुबह 7 बजे से रात 9 बजे के बीच दो-दो घंटे के कुल 6 अलग-अलग टाइम स्लॉट बनाए गए हैं। प्रत्येक स्लॉट में करीब 1500-1500 पास जारी किए जाते हैं, यानी प्रतिदिन लगभग 9000 पास बनते हैं।
विशिष्ट संस्थागत कोटा: ये सभी पास पूरी तरह रेफरल आधारित होते हैं, जिनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों, अयोध्या जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, भारतीय सेना और सीआरपीएफ (CRPF) के लिए अलग-अलग निर्धारित कोटा तय है। आरती दर्शन के पास बहुत सीमित होते हैं और वे केवल ट्रस्टियों के विशेष रेफरेंस पर ही जारी किए जाते हैं। हैकरों द्वारा इसी विशिष्ट कोटे और कंप्यूटर ऑपरेटरों की पहुंच का दुरुपयोग करने का प्रयास किया गया।
राम जन्मभूमि थाने में अब तक तहरीर नहीं, सुरक्षा सेल में फेरबदल
हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बावजूद बुधवार दोपहर तक संबंधित पक्ष या ट्रस्ट की ओर से पुलिस में कोई औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है। थाना राम जन्मभूमि के प्रभारी निरीक्षक सुमित श्रीवास्तव के अनुसार, पुलिस के पास अभी तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं पहुंची है।
इसी बीच प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के स्तर पर भी बदलाव देखने को मिला है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से तैनात जन्मभूमि चौकी इंचार्ज का तबादला प्रोटोकॉल सेल में कर दिया गया है और उनके स्थान पर सब-इंस्पेक्टर अखिलेश तिवारी को नया चौकी प्रभारी नियुक्त किया गया है, जिन्होंने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है।
नवनियुक्त सीईओ जीतेंद्र मिश्र के सामने सुरक्षा और पारदर्शिता की पहली बड़ी परीक्षा
हाल ही में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्र ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में विधिवत कमान संभाली है। उनके कार्यभार संभालते ही सॉफ्टवेयर हैकिंग और फर्जी पास जारी होने का यह मामला सामने आना मंदिर प्रशासन के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गया है। जानकारों का मानना है कि टीईसी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पास जारी करने की प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन, ओटीपी आधारित दोहरे प्रमाणीकरण (2-Factor Authentication) और क्यूआर कोड स्कैनिंग को और अधिक कड़ा किया जाएगा ताकि भविष्य में आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र की गरिमा और सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ न कर सके।