राजनाथ सिंह के दौरे पर राष्ट्रपति दिसानायके ने बीजिंग को दिया कड़ा संदेश, नई दिल्ली को दिया सुरक्षा का भरोसा
हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव और सामरिक खींचतान के बीच भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका ने नई दिल्ली को सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर सबसे बड़ा और ठोस भरोसा दिया है। कोलंबो पहुंचे भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने दो टूक शब्दों में बीजिंग की महत्वाकांक्षाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि श्रीलंका अपनी जमीन और समुद्री जलक्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी तीसरे देश द्वारा भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने देगा। 38 साल बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री के श्रीलंका दौरे के दौरान कोलंबो की यह प्रतिबद्धता सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
38 साल बाद भारतीय रक्षा मंत्री की ऐतिहासिक कोलंबो यात्रा
वर्ष 1988 में तत्कालीन रक्षा मंत्री के. सी. पंत के बाद राजनाथ सिंह श्रीलंका का आधिकारिक दौरा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री बने हैं।
नेबरहुड फर्स्ट और 'महासागर' विजन: यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और 'महासागर' (MAHASAGAR - क्षेत्रीय सुरक्षा व समग्र विकास) रूपरेखा के तहत हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।
हमबनटोटा और चीनी जासूसी जहाजों की पृष्ठभूमि: पूर्व में श्रीलंका के हमबनटोटा बंदरगाह (जिसे 99 साल की लीज पर चीन को दिया गया था) और कोलंबो बंदरगाह पर चीन के रिसर्च व जासूसी जहाजों (Spy Vessels) की बार-बार मौजूदगी से भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी थीं।
राष्ट्रपति दिसानायके ने राजनाथ सिंह के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशीलता का पूरा सम्मान करती है और किसी भी विदेशी ताकत को भारत के खिलाफ अड्डा बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रक्षा समझौतों पर मुहर: L-70 एयर डिफेंस तोपों के रखरखाव में मुफ्त मदद
राजनाथ सिंह की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सामरिक और सैन्य साझेदारी को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी:
वायु रक्षा तोपों की मेंटेनेंस: भारत ने वर्ष 2000 से 2006 के बीच श्रीलंका वायुसेना को 24 संख्या में 40 मिमी L-70 वायु रक्षा तोपें (Air Defence Guns) उपलब्ध कराई थीं। इनमें से 18 तोपों का निशुल्क रखरखाव भारत पहले ही कर चुका है। नए समझौते के तहत भारत शेष छह L-70 तोपों के रखरखाव के लिए भी श्रीलंका को पूर्ण रूप से निशुल्क सहायता और कलपुर्जे उपलब्ध कराएगा।
समुद्री निगरानी और कोस्ट गार्ड सहयोग: हिंद महासागर में समुद्री तस्करी, पायरेसी और संदिग्ध जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दोनों देशों की नौसेनाओं और तटरक्षकों के बीच रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग और संयुक्त गश्त को बढ़ावा दिया जाएगा।
सैन्य प्रशिक्षण का विस्तार: श्रीलंकाई सशस्त्र बलों के अधिकारियों के लिए भारतीय सैन्य अकादमियों में विशेष प्रशिक्षण सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
आर्थिक संकट से लेकर चक्रवात तक: भारत के संकटमोचक रुख का असर
बैठक के दौरान श्रीलंकाई नेतृत्व ने 2022 के भीषण आर्थिक संकट के समय भारत द्वारा दी गई 4 अरब डॉलर से अधिक की आपातकालीन वित्तीय मदद और मानवीय सहायता को कृतज्ञतापूर्वक याद किया। इसके अलावा 2025 में श्रीलंका में आए चक्रवात 'दितवा' के दौरान 'फर्स्ट रेस्पोंडर' बनकर सबसे पहले राहत पहुंचाने के लिए भी नई दिल्ली की भूमिका को सराहा गया।
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व में श्रीलंका द्वारा चीन की 'कर्ज जाल कूटनीति' (Debt Trap Diplomacy) की सीमाएं तय करना और भारत को सर्वोच्च सुरक्षा प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति सामरिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत और निर्णायक हो चुकी है।