Major blow to Donald Trump: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'टैरिफ' को बताया अवैध, भारत के लिए खुला रिफंड और मुनाफे का रास्ता

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India News Live,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक नीतियों को न्यायपालिका ने बड़ा झटका दिया है। शुक्रवार (20 फरवरी, 2026) को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी वस्तुओं पर लगाए गए भारी-भरकम 'टैरिफ' (आयात शुल्क) को असंवैधानिक और अवैध घोषित कर दिया है। अदालत के इस फैसले से भारत समेत दुनिया के 100 से अधिक देशों के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है।

राष्ट्रपति बनाम संविधान: क्या रहा कोर्ट का रुख?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है। ट्रंप ने 1977 के 'अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम' (IEEPA) का हवाला देकर एकतरफा टैक्स थोपे थे, जिसे अदालत ने शक्तियों का दुरुपयोग करार दिया।

भारत के लिए क्या हैं इस फैसले के मायने?

ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर प्रभावित किया था। इस फैसले के बाद भारत को मिलने वाले लाभ कुछ इस प्रकार हैं:

50% जुर्माने से राहत: रूस से तेल खरीदने के कारण ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया था, जिसे बाद में समझौतों के जरिए 18% किया गया। अब ये सभी शुल्क अवैध हो गए हैं।

रिफंड की संभावना: भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी आयातकों को अब उन अरबों डॉलर के 'रिफंड' मिलने की उम्मीद है, जो उन्होंने अतिरिक्त शुल्क के रूप में चुकाए थे।

निर्यात में उछाल: टैक्स कम होने से भारतीय स्टील, एल्युमीनियम, आईटी और कपड़ों की मांग अमेरिकी बाजार में फिर से बढ़ेगी।

शराब से लेकर खिलौनों तक—सबने खोला था मोर्चा

ट्रंप के इस कड़े आर्थिक रुख के खिलाफ केवल देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी भारी गुस्सा था। दर्जनों राज्यों और छोटी कंपनियों (जैसे खिलौना और शराब आयातक) ने अदालत में गुहार लगाई थी कि इन शुल्कों के कारण अमेरिका में महंगाई बढ़ी है। निचली अदालतों के 7-4 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि व्यापारिक नियम मनमाने ढंग से नहीं बदले जा सकते।

अर्थव्यवस्था पर असर: 'महामंदी' या 'नया सवेरा'?

व्हाइट हाउस के सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी थी कि अगर ये शक्तियां छीनी गईं, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था 'महामंदी' की ओर जा सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से 'मुक्त व्यापार' (Free Trade) को बढ़ावा मिलेगा। आयातित सामान सस्ते होने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता आएगी।