महाराष्ट्र में 'लव जिहाद' और जबरन धर्मांतरण पर कसेगा शिकंजा: विधानसभा में 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक' पेश, दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा...

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India News Live,Digital Desk : महाराष्ट्र की राजनीति में शुक्रवार को उस समय एक बड़ा अध्याय जुड़ गया जब राज्य सरकार ने बहुप्रतीक्षित और चर्चित 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को विधानसभा के पटल पर रख दिया। गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच या केवल विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले मतांतरण (धर्मांतरण) पर पूरी तरह से रोक लगाना है। सरकार के इस कदम को राज्य में अवैध धर्मांतरण की बढ़ती शिकायतों और सुरक्षा चिंताओं के बीच एक बेहद सख्त और निर्णायक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

विधेयक के निशाने पर धोखाधड़ी और प्रलोभन

गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर ने सदन में विधेयक पेश करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध या उसे गुमराह करके धर्म परिवर्तन कराना अब अपराध की श्रेणी में आएगा। इस नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी को शादी का झांसा देकर, पैसे या नौकरी का लालच देकर या डरा-धमक कर धर्म बदलने के लिए मजबूर करता है, तो उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि मासूम लोगों को निशाना बनाने वाले गिरोहों को बेनकाब करने के लिए यह कानून समय की मांग है।

विवाह के नाम पर मतांतरण पर सख्त पहरा

'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' में विवाह के जरिए होने वाले धर्मांतरण को लेकर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। विधेयक के अनुसार, यदि यह पाया गया कि विवाह का एकमात्र उद्देश्य केवल धर्म परिवर्तन कराना था, तो ऐसी शादियों को अमान्य घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा, जो लोग स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें भी अब एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और संबंधित जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देनी होगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और 'लव जिहाद' जैसे गंभीर आरोपों वाली घटनाओं पर लगाम लग सकेगी।

सियासी गलियारों में चर्चा और विपक्ष का रुख

इस विधेयक के पेश होते ही महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां इसे नागरिक अधिकारों और सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसके प्रावधानों को लेकर बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। गृह राज्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि यह कानून समाज में सौहार्द बनाए रखने और गरीब व भोले-भाले लोगों के शोषण को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। विधानसभा में इस पर चर्चा के दौरान तीखी बहस होने की संभावना है, लेकिन सरकार ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि वह अवैध मतांतरण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलेगी।