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August 04 2026 06:44 pm

ट्रंप की नई टैरिफ नीति पर कानूनी शिकंजा: 25 अमेरिकी राज्यों ने अदालत में दी चुनौती, भारत समेत 60 देशों पर लगा है आयात शुल्क

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर बड़े कानूनी विवाद में फंस गई है। अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक-शासित राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में भारत समेत करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों से होने वाले आयात पर लगाए गए नए शुल्कों को चुनौती दी गई है।

ट्रेड एक्ट की धारा 301 और 'जबरन श्रम' का मुद्दा

नया आयात शुल्क: पिछले महीने लागू किए गए 10 से 12.5 प्रतिशत तक के इन नए टैरिफ को 'ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301' के तहत लागू किया गया है।

प्रशासन का तर्क: ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह शुल्क उन देशों पर लगाया गया है जो जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।

भारत पर प्रभाव: इस नीति के तहत भारत और कई अन्य देशों पर शुरुआती प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया, क्योंकि भारत ने अपने विदेशी व्यापार नियमों में संशोधन कर जबरन श्रम से जुड़े आयातों पर प्रतिबंध मजबूत किए थे।

राज्यों का गंभीर आरोप: अदालत के फैसलों को दरकिनार करने की कोशिश

ओरेगन, न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया समेत 25 डेमोक्रेटिक राज्यों के महाधिवक्ता (Attorneys General) और गवर्नरों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों के पुराने फैसलों को दरकिनार करने के लिए 'जबरन श्रम' का बहाना बना रहा है:

अवैध करों का आरोप: न्यूयार्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से झटका खाने के बाद प्रशासन एक बार फिर नए रूप में नागरिकों और व्यवसायों पर अवैध टैक्स थोपने की कोशिश कर रहा है।

धारा 301 का दुरुपयोग: राज्यों का तर्क है कि सेक्शन 301 का उपयोग विशिष्ट अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के लिए होता है, न कि लगभग पूरी दुनिया से होने वाले आयात पर व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने के लिए।

अदालती इतिहास और व्हाइट हाउस का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला: इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि राष्ट्रपति के पास असीमित वैश्विक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद प्रशासन ने अन्य विकल्पों के तहत टैरिफ लागू किए थे, जिन्हें लेकर कानूनी संघर्ष जारी है।

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया: दूसरी ओर, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने बचाव करते हुए कहा है कि अमेरिका अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल कर अमेरिकी वाणिज्य और श्रमिकों को नुकसान पहुँचाने वाली अनुचित नीतियों और प्रथाओं को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।