'मुझे लगा वह बहुत बड़ा रिस्क ले रहा है': 13 साल के वंडर किड वैभव सूर्यवंशी पर ईशान किशन का बड़ा खुलासा

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पटना/रांची: भारतीय क्रिकेट टीम के आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट और जूनियर सर्किट में तहलका मचाने वाले 13 वर्षीय वंडर किड वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को लेकर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला खुलासा किया है। बेहद कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाले वैभव की बल्लेबाजी शैली को देखकर शुरुआत में अनुभवी खिलाड़ी भी हैरान रह गए थे। एक हालिया खेल साक्षात्कार और बातचीत के दौरान ईशान किशन ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने पहली बार वैभव सूर्यवंशी को मैदान पर आक्रामक और जोखिम भरे शॉट्स खेलते देखा, तो उन्हें लगा कि यह युवा बल्लेबाज अपने करियर और विकेट के साथ बहुत बड़ा 'रिस्क' ले रहा है। ईशान ने माना कि उन्हें शुरुआत में वैभव के शॉट सेलेक्शन और टिकने की क्षमता पर पूरा भरोसा नहीं था, लेकिन कुछ ही ओवरों के भीतर जिस तरह इस नन्हे बल्लेबाज ने तेज गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाईं, उसने ईशान समेत पूरे ड्रेसिंग रूम को अपना मुरीद बना लिया।

'मुझे लगा यह लड़का बहुत बड़ा रिस्क ले रहा है': ईशान किशन का चौंकाने वाला खुलासा

घरेलू सर्किट और बिहार-झारखंड के क्रिकेटिंग संबंधों पर बात करते हुए ईशान किशन ने उस पल को याद किया जब उन्होंने पहली बार वैभव सूर्यवंशी को करीब से बल्लेबाजी करते देखा था। ईशान ने बताया कि जब एक 12-13 साल का बच्चा सीनियर गेंदबाजों के सामने क्रीज पर उतरता है, तो अमूमन सभी को उम्मीद होती है कि वह संभलकर खेलेगा, गेंद को छोड़ेगा और अपनी आंखें जमाने की कोशिश करेगा।

ईशान किशन ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो जब मैंने पहली बार वैभव को देखा, तो मुझे उसके खेलने के तरीके पर थोड़ा संदेह हुआ था। सामने 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले अनुभवी गेंदबाज थे और यह लड़का पहली ही गेंद से आगे बढ़कर मिड-विकेट और कवर्स के ऊपर से शॉट खेल रहा था। मुझे लगा कि वह गैर-जरूरी रिस्क ले रहा है और इस तरह के अनियंत्रित आक्रामक खेल से वह बहुत जल्दी अपना विकेट गंवा देगा। लेकिन जब मैंने देखा कि वह केवल आंख मूंदकर बल्ला नहीं चला रहा, बल्कि उसका हैंड-आई कोऑर्डिनेशन और टाइमिंग अविश्वसनीय स्तर की है, तो मेरी सोच पूरी तरह बदल गई। वह रिस्क नहीं ले रहा था, बल्कि वह उसका स्वाभाविक और आत्मविश्वास से भरा खेल था।"

13 साल के वैभव सूर्यवंशी का बेखौफ अंदाज: पहली ही गेंद से आक्रामक तेवर

बिहार के समस्तीपुर से ताल्लुक रखने वाले बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने बहुत ही छोटी उम्र में भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रणजी ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने के बाद वैभव ने भारत की अंडर-19 टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ चेन्नई में महज 58 गेंदों पर तूफानी शतक जड़कर इतिहास रच दिया था।

वैभव की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनका 'नो-फियर' (No-Fear) अप्रोच है। चाहे लाल गेंद का मैच हो या सफेद गेंद का प्रारूप, वे पहली गेंद से ही गेंदबाज पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाते हैं। शार्ट-पिच गेंदों पर उनके द्वारा खेले जाने वाले पुल शॉट्स और स्पिनरों के खिलाफ कदमों का इस्तेमाल करके लगाए जाने वाले गगनचुंबी छक्के यह दर्शाते हैं कि उनके अंदर शीर्ष स्तर के क्रिकेट के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल और निडरता कूट-कूट कर भरी है।

सीनियर-जूनियर का तालमेल और मैदान पर ईशान का भरोसा जीतना

ईशान किशन, जो खुद एक आक्रामक और निडर बाएं हाथ के बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं, ने बताया कि एक सीनियर खिलाड़ी के रूप में उनका पहला कर्तव्य था कि वे युवा खिलाड़ी को परिस्थितियों की गंभीरता समझाएं। ईशान ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में वैभव को थोड़ा रुककर और संभलकर खेलने की सलाह देने की सोची थी।

हालांकि, जब वैभव ने अपनी धुआंधार पारी के दौरान लगातार तीन गेंदों पर तीन शानदार बाउंड्री जड़ीं, तो ईशान ने महसूस किया कि इस प्राकृतिक प्रतिभा को किसी तय ढांचे में बांधना गलत होगा। ईशान ने कहा, "कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो दबाव में बिखरने के बजाय और अधिक आक्रामक होकर खेलते हैं। वैभव उसी मिट्टी का बना है। उसने मुझे यह सिखाया कि कभी-कभी उम्र और अनुभव के चश्मे से परे जाकर किसी खिलाड़ी की सहज प्रतिभा पर भरोसा करना चाहिए। उसके शॉट्स में जो आत्मविश्वास और स्पष्टता है, वह 25-26 साल के मंझे हुए बल्लेबाजों में भी कभी-कभी देखने को नहीं मिलती।"

अंडर-19 से लेकर आईपीएल और घरेलू सर्किट तक: ऐतिहासिक सफर

वैभव सूर्यवंशी का क्रिकेटिंग सफर किसी परिकथा से कम नहीं रहा है। महज 4 साल की उम्र से अपने पिता संजीव सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में कड़ा अभ्यास करने वाले वैभव ने जिला और राज्य स्तर के जूनियर टूर्नामेंट्स में रनों का अंबार लगा दिया। वीनू मांकड़ ट्रॉफी और कूच बिहार ट्रॉफी में उनके असाधारण प्रदर्शन के बाद उन्हें सीधे बिहार की सीनियर रणजी टीम में चुन लिया गया था।

ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ उनका शतक किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा अंडर-19 टेस्ट इतिहास में लगाया गया सबसे तेज शतक था। उनके इस रिकॉर्ड-तोड़ खेल ने आईपीएल फ्रेंचाइजी और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को भी उनके नाम पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। बेहद कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद उनके पैर जमीन पर टिके हैं, जिसकी तारीफ ईशान किशन ने भी खुलकर की।

भारतीय क्रिकेट में नया 'वंडर किड': सचिन और सहवाग से होने लगी तुलना

क्रिकेट विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने वैभव सूर्यवंशी के खेल की तुलना भारत के महानतम बल्लेबाजों से करनी शुरू कर दी है। जिस तरह सचिन तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के खतरनाक बॉलिंग अटैक का सामना किया था, या जिस तरह वीरेंद्र सहवाग बिना किसी डर के पहली गेंद से प्रहार करते थे, वैभव के खेल में भी उसी आक्रामकता और दृढ़ संकल्प की झलक मिलती है।

ईशान किशन का मानना है कि आधुनिक टी-20 और टेस्ट क्रिकेट में जिस तरह की 'हाई-इंटेंट' बल्लेबाजी की मांग की जा रही है, वैभव उस खांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आगाह किया कि इतनी कम उम्र में अत्यधिक मीडिया चकाचौंध और हाइप से इस युवा खिलाड़ी को बचाना सबसे ज्यादा जरूरी है, ताकि वह अपने खेल के बेसिक्स और फिटनेस पर लगातार काम कर सके।

ईशान किशन की सलाह और भारतीय क्रिकेट का सुनहरा भविष्य

बातचीत के समापन पर ईशान किशन ने वैभव सूर्यवंशी को एक अनमोल सलाह दी। ईशान ने कहा कि क्रिकेट के सफर में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे और जब खराब दौर आएगा तो लोग उसी आक्रामक खेल की आलोचना करेंगे जिसे आज सराहा जा रहा है। इसलिए वैभव को केवल अपने प्रोसेस, अपनी मेहनत और अपने खेल के आनंद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

ईशान ने कहा, "वैभव भारतीय क्रिकेट का एक नायाब हीरा है। यदि उसे सही मार्गदर्शन, उचित वर्कलोड मैनेजमेंट और अच्छा माहौल मिले, तो वह आने वाले समय में देश के लिए कई बड़े रिकॉर्ड बनाएगा। मुझे गर्व है कि हमारे क्षेत्र से ऐसा असाधारण टैलेंट निकलकर सामने आ रहा है।" ईशान किशन के इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि भले ही शुरुआत में उन्हें इस युवा खिलाड़ी के रिस्क पर संदेह रहा हो, लेकिन आज वे वैभव सूर्यवंशी के सबसे बड़े प्रशंसकों में से एक बन चुके हैं।