दुनिया के सबसे बड़े गैस हब पर ईरान का भीषण हमला! रास लफान में मची तबाही, क्या अब भारत में भी बढ़ जाएंगे गैस के दाम...
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने अब दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) हब 'रास लफान' पर बड़ा हमला बोल दिया है। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। रास लफान न केवल कतर के लिए, बल्कि पूरी दुनिया और विशेष रूप से भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस हमले की खबर आते ही कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल की आशंका गहरा गई है, जिससे भारत जैसे देशों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
भारत के लिए क्यों काल बन सकता है रास लफान पर हमला?
भारत अपनी जरूरत की कुल LNG का एक बहुत बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है और इस आपूर्ति का मुख्य केंद्र रास लफान ही है। भारत की दिग्गज कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी का कतर के साथ लंबे समय का समझौता है, जिसके तहत इसी टर्मिनल से भारी मात्रा में गैस भारत के बंदरगाहों तक पहुंचती है। अगर इस हमले के कारण रास लफान से सप्लाई बाधित होती है, तो भारत में फर्टिलाइजर प्लांट्स, बिजली घरों और सीएनजी (CNG) की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचा, तो रसोई गैस से लेकर गाड़ियों के ईंधन तक सब कुछ महंगा हो सकता है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची भारी खलबली
रास लफान पर हुए इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा गलियारे में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस गैस हब को निशाना बनाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कतर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है और रास लफान उसकी रीढ़ की हड्डी है। इस प्लांट से सालाना करोड़ों टन गैस दुनिया भर में भेजी जाती है। हमले के बाद अब विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि उत्पादन और लोडिंग प्रक्रिया को कितना नुकसान पहुंचा है। यदि उत्पादन रुकता है, तो एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।