इराक जैसा नहीं होगा ईरान का हश्र? खामेनेई और लारिजानी की हत्या के बाद भी क्यों नहीं रुका युद्ध, समझें क्या है 'मोजेक डिफेंस'...
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अली लारिजानी जैसे कद्दावर नेताओं की हत्या के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि ईरान भी सद्दाम हुसैन के बाद वाले इराक की तरह बिखर जाएगा। लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। नेतृत्व के शीर्ष स्तर पर इतने बड़े नुकसान के बावजूद ईरान की सैन्य मशीनरी और युद्ध की जिद थमी नहीं है। आखिर ईरान के पास ऐसी कौन सी शक्ति है जो उसे बिखरने से बचा रही है? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे ईरान की बेहद गोपनीय और अचूक 'मोजेक डिफेंस' (Mosaic Defense) रणनीति है।
सद्दाम के इराक और आज के ईरान में क्या है बुनियादी अंतर?
इतिहास गवाह है कि साल 2003 में जैसे ही सद्दाम हुसैन की सत्ता का पतन हुआ, इराक की पूरी सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। वहां सत्ता का केंद्रीकरण केवल एक व्यक्ति के हाथ में था। इसके विपरीत, ईरान ने दशकों की घेराबंदी और युद्धों से सीखते हुए अपनी रक्षा प्रणाली को 'विकेंद्रीकृत' (Decentralized) कर दिया है। ईरान की ताकत सिर्फ एक चेहरे में नहीं, बल्कि उसकी कई स्वतंत्र सैन्य इकाइयों में बसी है। यही कारण है कि शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाए जाने के बाद भी ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
क्या है 'मोजेक डिफेंस' और यह कैसे करता है काम?
ईरान की 'मोजेक डिफेंस' रणनीति दरअसल एक ऐसी सैन्य व्यवस्था है जिसमें पूरे देश को छोटे-छोटे रक्षा खंडों या 'मोजेक' में बांट दिया जाता है। इस तकनीक के तहत, अगर राजधानी तेहरान या मुख्य कमांड सेंटर से संपर्क टूट भी जाए, तो स्थानीय सैन्य कमांडर अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से युद्ध जारी रखने के लिए अधिकृत होते हैं। हर यूनिट के पास अपने हथियार, मिसाइलें और रसद की स्वतंत्र व्यवस्था होती है। इसका मतलब यह है कि दुश्मन भले ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दे, लेकिन उसे जमीन पर हजारों छोटे-छोटे मोर्चों से लड़ना होगा, जिन्हें पूरी तरह कुचलना लगभग असंभव है।
गुरिल्ला युद्ध और मिसाइल नेटवर्क का घातक मेल
ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए पहाड़ों और सुरंगों के अंदर मिसाइलों का जाल बिछा रखा है। 'मोजेक डिफेंस' के तहत ये मिसाइल यूनिट्स स्वायत्त तरीके से काम करती हैं। जानकारों का कहना है कि ईरान ने लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों में मौजूद अपने 'प्रॉक्सिस' को भी इसी तर्ज पर तैयार किया है। यही वजह है कि खामेनेई जैसे बड़े नाम के हटने के बाद भी ईरान की 'रेसिस्टेंस' (Resistance) की दीवार नहीं गिरी है। यह रणनीति ईरान को एक लंबी और थका देने वाली जंग लड़ने की ताकत देती है, जो किसी भी आधुनिक सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।