भारत का कड़ा रुख: आतंकी हाफिज सईद पर चलेगा मुकदमा, BNSS के तहत समन जारी
लश्कर-ए-तैयबा के सरगना और 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ भारत सरकार ने कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी किए गए अदालती समन को अब विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से पाकिस्तान के लाहौर स्थित उसके पते पर भेजा जाएगा। इस बड़ी कानूनी कार्रवाई से सईद के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
विशेष अदालत का वारंट और कूटनीतिक प्रक्रिया
जम्मू की विशेष एनआईए अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद इस पूरी प्रक्रिया को कूटनीतिक चैनलों के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। एनआईए द्वारा तैयार इस समन को गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के रास्ते इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग भेजा जाएगा, जो इसे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के जरिए लाहौर में सईद तक पहुंचाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आरोपी को भारतीय अदालत में पेश होने का औपचारिक अवसर देना है। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो भारत उसकी गैर-मौजूदगी में भी कानूनी कार्यवाही जारी रखने में सक्षम होगा।
नए आपराधिक कानून BNSS का इस्तेमाल
जुलाई 2026 में एनआईए द्वारा दायर पूरक आरोप पत्र में हाफिज सईद को लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का प्रमुख साजिशकर्ता नामजद किया गया था। भारत के नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के अनुसार, यदि कोई घोषित अपराधी जानबूझकर अदालत के सामने पेश नहीं होता है और उसकी गिरफ्तारी तुरंत संभव नहीं है, तो उसकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा और निर्णय की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
इस प्रक्रिया से भारत के पास एक पुख्ता न्यायिक रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा, जो यह साबित करेगा कि पाकिस्तान के असहयोग के बावजूद भारत ने आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विदेशों में छिपे आतंकवादियों पर शिकंजा कसने में आ रही बाधाओं को दूर करेगा और इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस को अधिक तथ्यात्मक आधार प्रदान करेगा।
मेटा डिस्क्रिप्शन
भारत सरकार ने 2025 पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए BNSS के तहत समन भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।