India-France AI Alliance: 'अमेरिका या चीन के भरोसे न रहें', दिल्ली में राष्ट्रपति मैक्रों ने भरी हुंकार; भारत-फ्रांस की नई रणनीतिक दोस्ती का आगाज़

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India News Live,Digital Desk : भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' के मंच से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक तकनीकी गलियारों में हलचल मचा दी है। मैक्रों ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत और फ्रांस जैसे देशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य के लिए अमेरिका या चीन जैसे देशों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। उन्होंने दोनों देशों के बीच 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) हासिल करने के जुनून पर जोर दिया।

हमें चाहिए अपना संतुलित मॉडल: मैक्रों

समिट को संबोधित करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, "मैं वास्तव में मानता हूं कि भारत, फ्रांस और पूरे यूरोप का एक ही सपना है। हम नहीं चाहते कि भविष्य की सबसे बड़ी ताकत यानी AI के लिए हमें वाशिंगटन या बीजिंग की ओर देखना पड़े। हमें एक ऐसा व्यापक और संतुलित मॉडल तैयार करना चाहिए जो हमारी अपनी जरूरतों और मूल्यों के हिसाब से हो।" उनका यह बयान उस समय आया है जब दुनिया के गिने-चुने तकनीकी दिग्गज एआई बाजार पर अपना एकाधिकार जमाने की कोशिश कर रहे हैं।

एआई की रेस में भारत और फ्रांस के पास बड़ा मौका

मैक्रों ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि फिलहाल एआई की दौड़ में अमेरिका और चीन आगे निकल चुके हैं, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत और फ्रांस के पास ऐसे 'एसेट्स' (संसाधन) हैं जो खेल पलट सकते हैं। उन्होंने कहा, "माना कि हम अभी थोड़ा पीछे हैं, लेकिन हम इस रेस से बाहर नहीं हैं। भारत की तकनीकी प्रतिभा और फ्रांस की इंजीनियरिंग क्षमता मिलकर दुनिया को एक नया विकल्प दे सकती है।"

आत्मनिर्भर बनने का रोडमैप पेश किया

एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए मैक्रों ने तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र किया:

पूंजी (Capital): तकनीक के विकास के लिए बड़े निवेश की जरूरत।

प्रतिभा (Talent): भारत और यूरोप के युवाओं को एआई के क्षेत्र में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देना।

क्षमता (Computing Power): अपने स्वयं के डेटा सेंटर और शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम का निर्माण करना।

संप्रभुता और सुरक्षा सबसे ऊपर

राष्ट्रपति मैक्रों ने जोर देकर कहा कि एआई सिर्फ एक तकनीक नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता का हिस्सा है। उन्होंने भारत और यूरोप को एकजुट होकर एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाने का आह्वान किया जो किसी भी देश या कंपनी पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे।