रूस-अमेरिका के बीच पिघलेगी बर्फ? पुतिन ने जिनपिंग संग बैठक में दिया बड़ा संकेत; क्या युद्ध का निकलेगा हल?

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India News Live,Digital Desk : चीन के बीजिंग में बुधवार को एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आमने-सामने बैठकर वैश्विक राजनीति के भविष्य पर चर्चा की। इस बैठक में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब पुतिन ने सार्वजनिक रूप से यह कहा कि रूस अमेरिका के साथ काम करने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वाशिंगटन और मॉस्को के रिश्ते पिछले कई दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं।

पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात: क्या है इसके मायने?

चीन के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल' में आयोजित इस द्विपक्षीय वार्ता में पुतिन और शी जिनपिंग ने यूक्रेन युद्ध, ईरान संकट और व्यापार जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। पुतिन की यह बीजिंग की 25वीं यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच 'असीमित रणनीतिक संबंधों' की गहराई को दर्शाती है।

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का अमेरिका के साथ काम करने का बयान कोई आकस्मिक टिप्पणी नहीं है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन की यात्रा की थी और जिनपिंग के साथ इन मुद्दों पर चर्चा की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजिंग, मॉस्को और वाशिंगटन के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं, ताकि यूक्रेन और मध्य-पूर्व के तनाव को कम किया जा सके।

कूटनीति के केंद्र में ईरान और तेल व्यापार

इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण एजेंडा ईरान संकट है। होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के बाद पैदा हुए वैश्विक तनाव ने चीन और रूस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन, जो अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना अपनी तेल जरूरतों का 90 प्रतिशत हिस्सा ईरान से आयात करता है, इस क्षेत्र में स्थिरता चाहता है। पुतिन और जिनपिंग की वार्ता में ईरान की स्थिति पर की गई चर्चा यह संकेत देती है कि ईरान के करीबी साझेदार होने के नाते, दोनों देश मिलकर इस तनाव को कम करने की दिशा में कोई संयुक्त रणनीति तैयार कर सकते हैं।

'असीमित क्षमता' और भविष्य की राह

पुतिन ने अपनी यात्रा से पूर्व दिए गए एक संबोधन में कहा था कि रूस और चीन के संबंध अभूतपूर्व स्तर पर हैं। दोनों नेताओं ने व्यापार और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक गहरा करने पर सहमति जताई है। पुतिन के अमेरिका के साथ सहयोग के बयान ने वैश्विक बाजार और कूटनीतिक गलियारों में नई उम्मीदों को जन्म दिया है। यदि रूस वास्तव में अमेरिका के साथ किसी प्रकार का संवाद स्थापित करता है, तो यह आने वाले समय में यूक्रेन युद्ध के खात्मे और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

क्या यह कूटनीतिक पहल शांति की दिशा में एक वास्तविक कदम है या मात्र रणनीतिक बयानबाजी? यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा, जब इन चर्चाओं का असर जमीन पर दिखाई देना शुरू होगा।