डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर पहुंचे सैकड़ों युवा, 'सब्र का बांध टूटा, नियुक्ति दो या इच्छा मृत्यु' के नारों से गूंजी राजधानी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। प्राथमिक शिक्षक भर्ती के विज्ञापन और लंबे समय से लंबित नियुक्तियों की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों टीईटी और सीटीईटी पास अभ्यर्थी अचानक उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर पहुंच गए। अभ्यर्थियों ने आवास के मुख्य द्वार के सामने जोरदार नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। अचानक इतनी बड़ी तादाद में युवाओं के जुटने से शासन और पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आवास के बाहर गूंजते 'रोजगार दो या इच्छा मृत्यु दो', 'टीईटी पास अभ्यर्थी करें पुकार, प्राथमिक शिक्षक भर्ती दे सरकार' के नारों से पूरा इलाका थर्रा उठा।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से शिक्षक बनने की योग्यता पूरी करके सरकार के वादों और आश्वासनों के भरोसे बैठे हैं। कई वर्षों से नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती (Super TET) का विज्ञापन जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते लाखों योग्य युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो चुका है। परिवार का दबाव, आर्थिक तंगी और उम्र बीतने की चिंता ने इन युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए विवश कर दिया है। आवास के बाहर बैठे अभ्यर्थियों ने दो टूक चेतावनी दी कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती और लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
'वर्षों से कर रहे इंतजार, अब सब्र का बांध टूटा': अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें और आंखों में छलके आंसू
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की व्यथा अत्यंत हृदयविदारक थी। हाथों में डिग्री और टीईटी-सीटीईटी उत्तीर्ण करने के प्रमाणपत्र लेकर पहुंचे छात्र-छात्राओं के चेहरों पर निराशा और आक्रोश साफ झलक रहा था। कई महिला अभ्यर्थी प्रदर्शन के दौरान भावुक होकर रो पड़ीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन शासन स्तर से केवल समितियां गठित करने और समीक्षा करने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त पड़े सवा लाख से अधिक शिक्षक पदों पर तत्काल नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करना, पूर्व की भर्तियों में आरक्षण और मेरिट के विवादों को शीघ्र निस्तारित कर चयनितों को नियुक्ति पत्र देना और टीईटी प्रमाणपत्र की आजीवन मान्यता के अनुरूप भर्ती चक्र नियमित करना शामिल है। अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते-करते कई साथियों की उम्र सीमा समाप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार मानसिक अवसाद से घिर चुके हैं।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक: आवास के बाहर भारी सुरक्षा घेरा
उप मुख्यमंत्री के आवास पर अभ्यर्थियों के जुटने की सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का भारी अमला मौके पर पहुंच गया। हजरतगंज, कैंट और आसपास के थानों की पुलिस फोर्स के साथ-साथ पीएसी (PAC) के जवानों को तुरंत तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को समझाने और वहां से हटने का प्रयास किया, लेकिन अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
पुलिस ने वीआईपी सुरक्षा का हवाला देते हुए आवास के सामने बैरिकेडिंग कर दी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर गाड़ियों में भरकर प्रदर्शन स्थल से हटाना शुरू किया। महिला पुलिसकर्मियों ने महिला अभ्यर्थियों को जबरन हटाने की कोशिश की, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे कोई अपराधी नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक और रोजगार की मांग करने आए हैं। वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी पीड़ा सरकार के वरिष्ठ मंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का आश्वासन और वार्ता: क्या निकला इस टकराव का नतीजा?
बढ़ते हंगामे और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल की उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से वार्ता कराने का प्रयास किया। प्रतिनिधियों ने उप मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के रिक्त पदों का ब्योरा और युवाओं की वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण दर्ज था।
वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अभ्यर्थियों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार युवाओं के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि मामला बेसिक शिक्षा विभाग और शासन के संज्ञान में लाया जाएगा और नियमों के तहत उचित समाधान का रास्ता निकाला जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें पहले भी कई बार ऐसे मौखिक आश्वासन मिल चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही शिक्षक भर्ती की आधिकारिक विज्ञप्ति जारी नहीं हुई, तो पूरे प्रदेश भर के लाखों युवा लखनऊ में अनवरत महा-आंदोलन शुरू करेंगे।
यूपी में शिक्षक भर्ती को लेकर गहराता विवाद और लाखों युवाओं का अधर में लटका भविष्य
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती का मुद्दा पिछले कई वर्षों से सबसे बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में से एक बना हुआ है। 69,000 शिक्षक भर्ती का विवाद, आरक्षण विसंगतियों की कानूनी लड़ाई और बेसिक शिक्षा परिषद में नई भर्तियों का अभाव प्रदेश के लाखों प्रशिक्षित बीटीसी, डीएलएड और बीएड डिग्रीधारकों के लिए गले की फांस बन चुका है। प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात और रिक्त पदों को लेकर समय-समय पर विधानसभा और संसद में भी सवाल उठते रहे हैं।
विपक्षी दल समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरती रही हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही युवाओं का यह आक्रोश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। लाखों बेरोजगार युवा अब केवल वादों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं हैं। लखनऊ के इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि रोजगार का सवाल युवाओं के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन चुका है, और इसका समयबद्ध समाधान निकाले बिना राजधानी की सड़कों पर यह असंतोष शांत होना मुश्किल है।