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July 16 2026 12:41 am

Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को मनेगी आषाढ़ पूर्णिमा, नोट कर लें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

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सनातन परंपरा और हिंदू कैलेंडर में पूर्णिमा तिथि का हमेशा से ही एक विशेष और पवित्र स्थान रहा है। लेकिन, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से सबसे उत्तम माना जाता है। इस पावन तिथि को देश भर में 'आषाढ़ पूर्णिमा' या 'गुरु पूर्णिमा' (Guru Purnima 2026) के महापर्व के रूप में बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह वही दिन है जब शिष्य अपने गुरुओं के चरणों में बैठकर उनका आशीर्वाद लेते हैं, पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करते हैं। इस साल आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी दोगुना हो गया है क्योंकि इसके ठीक अगले ही दिन से महादेव का प्रिय श्रावण (सावन) मास शुरू होने जा रहा है। आइए जानते हैं साल 2026 की आषाढ़ पूर्णिमा की सही तारीख, पूजा के शुभ मुहूर्त और इस दिन से जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में।

उदया तिथि के अनुसार 29 जुलाई को रखा जाएगा व्रत, शाम को होगा चंद्रोदय

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से हो जाएगी, जो अगले दिन यानी बुधवार, 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है, इसलिए आषाढ़ पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा का महापर्व बुधवार, 29 जुलाई 2026 को ही मनाया जाएगा। जो श्रद्धालु पूर्णिमा का पवित्र व्रत रखते हैं, वे भी इसी दिन उपवास रखेंगे। इस दिन शाम को चंद्रदेव की पूजा के लिए चंद्रोदय का समय शाम 07:20 बजे रहेगा। इसके ठीक अगले दिन यानी 30 जुलाई 2026 से भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना शुरू हो जाएगा।

ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होगा स्नान-दान, नोट करें पूजा के सबसे सटीक मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना या गोदावरी) में स्नान करने और भूखे-जरूरतमंदों को दान देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:46 बजे से सुबह 05:30 बजे तक।

स्नान-दान का सर्वोत्तम समय: 29 जुलाई को सूर्योदय से लेकर दोपहर तक का समय पुण्य कार्य के लिए सबसे उत्तम है।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:55 बजे से दोपहर 03:47 बजे तक।

विशेष नोट: ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस विशेष दिन अभिजीत मुहूर्त लागू नहीं रहेगा।

आषाढ़ पूर्णिमा पर क्या दान करना माना जाता है शुभ? इन चीजों से आएगी समृद्धि

शास्त्रों में वर्णित है कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन किया गया दान सीधे देवताओं और पितरों को तृप्त करता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और वस्त्र देना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। आमतौर पर इस दिन निम्नलिखित वस्तुओं के दान का विशेष महत्व है:

अन्न दान: नए चावल और गेहूं का दान।

पवित्र खाद्य पदार्थ: शुद्ध देसी घी और गुड़।

उपयोगी वस्तुएं: नए वस्त्र और वर्षा ऋतु को देखते हुए छाता (अम्ब्रेला) दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

क्यों कहा जाता है इसे गुरु पूर्णिमा? जानिए महर्षि वेदव्यास जयंती का विशेष कनेक्शन

आषाढ़ पूर्णिमा को ही 'गुरु पूर्णिमा' कहने के पीछे एक बेहद गहरा आध्यात्मिक कारण है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी पावन तिथि पर चारों वेदों के ज्ञाता, महाभारत, श्रीमद्भागवत गीता और 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास को मानव जाति का प्रथम और परम गुरु माना जाता है, जिन्होंने अज्ञानता के अंधकार को दूर कर संसार को ज्ञान का दिव्य प्रकाश दिया। इसी कारण इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' या 'व्यास पूजा' भी कहा जाता है। इस दिन सनातन धर्मावलंबी भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने जीवित या आध्यात्मिक गुरु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, उन्हें गुरु दक्षिणा अर्पित करते हैं और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं ताकि जीवन की राह सुगम हो सके।