3 साल बाद आया महासंयोग! जानें परमा एकादशी की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण का सटीक समय

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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वोच्च स्थान दिया गया है, लेकिन जब बात अधिकमास (मलमास) में आने वाली एकादशी की हो, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को 'परमा एकादशी' कहा जाता है। यह दुर्लभ व्रत हर तीन साल में सिर्फ एक बार आता है। इस साल परमा एकादशी के दिन 'शोभन' और 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का एक बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस महासंयोग में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से भक्तों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि इस बार यह व्रत किस दिन रखा जाएगा और पारण का सही समय क्या है।

जानिए किस दिन रखा जाएगा परमा एकादशी का व्रत

पंचांग गणना के अनुसार, इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जून 2026 को रात 09 बजकर 27 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 जून 2026 को शाम 07 बजकर 06 मिनट पर होगा। चूंकि सनातन धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है, इसलिए परमा एकादशी का मुख्य व्रत 11 जून 2026, दिन गुरुवार को ही रखा जाएगा। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण इस व्रत का फल और भी अधिक बढ़ गया है।

सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ पूजा के शुभ मुहूर्त

11 जून को व्रत के दिन कई बेहद कल्याणकारी मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें की गई पूजा सीधे नारायण तक पहुंचती है।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 44 मिनट से सुबह 05 बजकर 16 मिनट तक (अमृत वेला)

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 05 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 12 जून की रात 02 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस योग में शुरू किया गया कोई भी काम निश्चित ही सफल होता है।

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 18 मिनट से दोपहर 02 बजकर 23 मिनट तक।

राहुकाल (सावधान रहें): ध्यान रखें कि एकादशी के दिन दोपहर 03 बजकर 51 मिनट से शाम 05 बजकर 52 मिनट तक राहुकाल रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना गया है, इसलिए इस दौरान कोई भी नई पूजा या मांगलिक कार्य न करें।

द्वादशी के भीतर क्यों जरूरी है पारण और क्या है सही समय?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण (व्रत खोलना) हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर ही कर लेना चाहिए। द्वादशी बीत जाने के बाद व्रत खोलना दोषपूर्ण माना जाता है और इससे व्रत का पुण्य फल नष्ट हो सकता है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही हो, तभी सूर्योदय के ठीक बाद पारण किया जाता है। इस बार परमा एकादशी व्रत का पारण 12 जून 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। पारण का सबसे उत्तम और शुभ समय सुबह 05 बजकर 47 मिनट से लेकर सुबह 09:00 बजे तक रहेगा। इस दिन द्वादशी तिथि शाम को 04 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी।

इस दुर्लभ व्रत को रखने से चमक जाती है किस्मत

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत रखने से इंसान के जीवन से दरिद्रता और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। यह व्रत अनजाने में हुए सभी पापों को नष्ट कर देता है। शास्त्रों में तो यहाँ तक कहा गया है कि जो फल बड़े-बड़े अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है, वही फल सच्चे मन से परमा एकादशी का उपवास रखने से प्राप्त हो जाता है। इस व्रत के प्रभाव से जातक धरती पर सभी भौतिक सुखों का आनंद लेता है और अंत समय में उसे वैकुंठ (विष्णु लोक) में स्थान मिलता है।