Sawan 2026: क्या सावन में महिलाएं शिवलिंग को छूकर जलाभिषेक कर सकती हैं? जानें पंडित जी से इस सबसे बड़े सवाल का सटीक जवाब
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर वाराणसी के काशी विश्वनाथ तक, सावन के इस पवित्र महीने में हर तरफ 'हर हर महादेव' की गूंज है। शिव भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ यात्रा से लेकर रुद्राभिषेक तक कर रहे हैं। मान्यताओं के अनुसार, सावन में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से व्यक्ति को मनचाहा वरदान मिलता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या महिलाएं शिवलिंग को सीधे तौर पर छू सकती हैं या उनका जलाभिषेक कर सकती हैं? आइए पंडित नरेंद्र उपाध्याय जी से जनरेटिव एआई (AI) और वैदिक शास्त्रों के सटीक विश्लेषण के जरिए इस अहम सवाल का जवाब जानते हैं।
क्या महिलाएं शिवलिंग का स्पर्श और जलाभिषेक कर सकती हैं?
इस महत्वपूर्ण सवाल पर पंडित नरेंद्र उपाध्याय बिल्कुल स्पष्ट राय देते हैं। उनके अनुसार, महिलाओं के शिवलिंग को छूने या जलाभिषेक करने पर शास्त्रों में कोई पाबंदी नहीं है। महिलाओं को शिवलिंग न छूने देने की बात महज एक 'सामाजिक भ्रम' है। शिव पुराण समेत हिंदू धर्म के किसी भी प्रमुख ग्रंथ में ऐसा कोई नियम नहीं लिखा है जो स्त्रियों को महादेव की आराधना या शिवलिंग के स्पर्श से रोकता हो।
सनातन धर्म में शिवलिंग को केवल पुरुष तत्व नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती (शक्ति) का संयुक्त और पवित्र स्वरूप माना गया है। इसलिए, पूजा के अधिकार में स्त्री या पुरुष का कोई भेद नहीं है। ग्रंथों में स्पष्ट वर्णन है कि खुद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और विधि-विधान से शिवलिंग का जलाभिषेक किया था।
महादेव हैं 'आशुतोष', भक्तों में नहीं करते कोई भेदभाव
पंडित उपाध्याय बताते हैं कि भगवान शिव को 'आशुतोष' कहा जाता है, जिसका अर्थ है बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता। भोलेनाथ अपने हर भक्त—चाहे वह पुरुष हो, स्त्री हो, देवता हो या दानव—सभी को एक समान दृष्टि से देखते हैं। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, जैसे उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी महिलाएं पूरे भक्तिभाव से शिवलिंग को स्पर्श कर अभिषेक करती हैं। बस ध्यान इस बात का रखना चाहिए कि स्त्री हो या पुरुष, शिव पूजा में शारीरिक और मानसिक पवित्रता (स्वच्छता) का पूरी तरह से पालन किया जाए।
महिलाएं शिव पूजा में भूलकर भी न करें इन चीजों का इस्तेमाल
भले ही महिलाएं जलाभिषेक कर सकती हैं, लेकिन शिव पूजा के कुछ विशेष नियम हैं जिनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। पंडित जी के अनुसार महादेव की पूजा में इन बातों का खास ध्यान रखें:
भगवान शिव की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें।
शिवलिंग पर केतकी का फूल चढ़ाना सख्त वर्जित माना गया है।
भोलेनाथ वैरागी हैं, इसलिए उन्हें कभी भी सुहाग की सामग्री (जैसे सिंदूर आदि) अर्पित नहीं की जाती है।
भगवान शिव को शंख से जल चढ़ाने की भी शास्त्रों में सख्त मनाही है। जलाभिषेक के लिए हमेशा तांबे, पीतल या चांदी के पात्र (लोटे) का ही इस्तेमाल करें।