यूपी में पति-पत्नी के झगड़े की सजा भुगती आम जनता ने: गुस्से में तिलमिलाए ऑपरेटर ने काटी सब-स्टेशन की मुख्य सप्लाई
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग और उसकी आपूर्ति व्यवस्था को लेकर अक्सर तकनीकी खराबी, लोकल फॉल्ट, ओवरलोडिंग या आंधी-बारिश के चलते बिजली गुल होने की खबरें सामने आती रहती हैं। लेकिन हाल ही में सामने आए एक बेहद विचित्र और चौंकाने वाले मामले ने आम जनता से लेकर शासन-प्रशासन तक सभी को हैरान कर दिया है। घर में पति-पत्नी के बीच हुई तीखी नोक-झोंक और विवाद का ऐसा खामियाजा पूरे इलाके को भुगतना पड़ा कि गुस्से से तमतमाए बिजली सब-स्टेशन ऑपरेटर ने अपनी निजी भड़ास पूरे शहर और दर्जनों गांवों पर निकाल दी। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने अपनी पत्नी से फोन पर हुए झगड़े के बाद आव देखा न ताव, गुस्से में आकर सब-स्टेशन के मुख्य फीडर्स का स्विच डाउन कर दिया। इसके बाद देखते ही देखते हजारों घरों की बत्तियां गुल हो गईं और पूरा इलाका अचानक घने अंधेरे और खामोशी में डूब गया।
गुस्से में काट दिया सब-स्टेशन का मेन फीडर: उमस और गर्मी से बेहाल हुए लोग
घटना देर शाम की है जब अधिकांश लोग अपने दफ्तरों और खेतों से लौटकर घरों में आराम कर रहे थे। उस समय मौसम में काफी उमस और गर्मी थी। अचानक बिना किसी आंधी, पानी या पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति ठप हो गई। शुरुआत में स्थानीय लोगों को लगा कि यह रोजमर्रा का कोई मामूली फॉल्ट या ट्रिपिंग होगी जो 10-15 मिनट में ठीक हो जाएगी।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया—एक घंटा, दो घंटे और फिर तीन घंटे—बिजली आने का कोई नामोनिशान नहीं दिखा। बिजली गुल होने से घरों में लगे इनवर्टर भी जवाब देने लगे, पंखे और कूलर बंद हो गए और छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग व मरीज उमस भरी गर्मी से तड़पने लगे। पीने के पानी की मोटरें बंद हो गईं, जिसके चलते कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों में हाहाकार मचने लगा।
शिकायत दर्ज कराने सब-स्टेशन पहुंचे ग्रामीण: खुलासे से उड़ गए सबके होश
जब घंटों बाद भी बिजली बहाल नहीं हुई, तो परेशान नागरिकों ने बिजली विभाग के स्थानीय जेई (Junior Engineer), एसडीओ (SDO) और उपकेंद्र के हेल्पलाइन नंबरों पर फोन मिलाना शुरू किया। लेकिन हमेशा की तरह पावर हाउस का आधिकारिक फोन या तो व्यस्त आता रहा या फिर लगातार बजने के बाद भी किसी ने नहीं उठाया।
परेशान होकर दर्जनों गांवों और कस्बों के आक्रोशित युवा, किसान और स्थानीय नागरिक इकट्ठा होकर सीधे विद्युत सब-स्टेशन जा पहुंचे। वहां पहुंचकर जो नजारा ग्रामीणों ने देखा, उसने उनके गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। सब-स्टेशन के कंट्रोल रूम का ऑपरेटर अपनी कुर्सी पर सिर पकड़कर बैठा हुआ था और मोबाइल फोन पर किसी से ऊंची आवाज में बहस कर रहा था। जब ग्रामीणों ने उससे बिजली कटने का तकनीकी कारण पूछा, तो शुरुआत में उसने गोल-मोल जवाब देने की कोशिश की। लेकिन भीड़ के कड़े दबाव और पूछताछ के बाद जो सच सामने आया, उसे सुनकर सभी सन्न रह गए। कर्मचारी ने स्वीकार किया कि घर पर उसकी पत्नी के साथ किसी घरेलू बात को लेकर फोन पर भयानक विवाद हो गया था, जिससे मानसिक तनाव और भयंकर गुस्से में आकर उसने पूरे क्षेत्र की मेन लाइन का स्विच ऑफ कर दिया था।
पावर हाउस पर जमकर हुआ हंगामा: उच्चाधिकारियों ने तुरंत लिया एक्शन
एक सरकारी कर्मचारी के निजी गुस्से की सजा हजारों बेकसूर नागरिकों को मिलने की बात जैसे ही फैली, पावर हाउस परिसर में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद अन्य तकनीकी स्टाफ ने तुरंत घबराते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को फोन लगाया।
सूचना मिलते ही अधिशासी अभियंता (XEN) और सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट के स्तर पर मामले का संज्ञान लिया गया। उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देश पर तत्काल वैकल्पिक लाइनमैन और स्टाफ को भेजकर लगभग 4 से 5 घंटे बाद सब-स्टेशन के सभी फीडरों को दोबारा चालू करवाया गया, जिसके बाद आधी रात को जाकर पूरे इलाके की बिजली बहाल हो सकी और लोगों ने राहत की सांस ली।
लापरवाह कर्मचारी पर गिरी गाज: जांच और बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू
विद्युत वितरण निगम के आला अधिकारियों ने इस पूरे घटनाक्रम को सेवा नियमों का खुला उल्लंघन, घोर अनुशासनहीनता और आवश्यक सेवा अधिनियम (ESMA) के तहत गंभीर अपराध माना है।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि संबंधित संविदा कर्मी (Contractual Operator) को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया गया है और उसकी सेवाएं समाप्त करने के लिए संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को नोटिस थमा दिया गया है। इसके अलावा, सब-स्टेशन पर तैनात नियमित सुपरवाइजर और जेई से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आखिर ड्यूटी के दौरान संवेदनशील ग्रिड कंट्रोल को इस तरह गैर-जिम्मेदाराना हाथों में कैसे छोड़ दिया गया। विभाग ने मामले की औपचारिक जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक समिति का गठन किया है।
सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज की बाढ़: "घर का क्लेश, पूरे गांव में अंधेरा"
यह अजब-गजब मामला सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो गया। इंटरनेट यूजर्स इस खबर पर तरह-तरह के मजेदार और व्यंग्यात्मक कमेंट्स कर रहे हैं।
कई यूजर्स ने लिखा कि "यूपी में बिजली जाने के नए-नए तकनीकी कारण तो सुने थे, लेकिन पत्नी के गुस्से में ग्रिड ट्रिप हो जाना पहली बार देखा।" वहीं कुछ लोगों ने तंज कसते हुए लिखा कि "जब पति के हाथ में पूरे इलाके का स्विच बोर्ड हो, तो बीवी को कभी नाराज नहीं करना चाहिए।" हालांकि, हास्य से इतर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के कंट्रोल रूम में इस तरह का गैर-पेशेवर रवैया कभी भी किसी बड़े हादसे या अस्पताल जैसी जगहों पर मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकता है।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना भले ही सुनने में हास्यास्पद या अजीब लगे, लेकिन इसने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई बिजली उपकेंद्रों की सुरक्षा, निगरानी और संचालन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति, छोटे उद्योगों और आम जनजीवन से जुड़े बुनियादी ढांचे को केवल एक व्यक्ति की मानसिक स्थिति और सनक के भरोसे छोड़ देना सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी चूक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पावर ग्रिड और सब-स्टेशन के संचालन के लिए ऑटोमेटेड लॉगिंग, बायोमेट्रिक सुरक्षा और चौबीसों घंटे सुपरविजन जरूरी होना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत रंजिश या गुस्से का शिकार आम जनता को न बना सके। यह घटना लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और बिजली महकमे में एक सबक के रूप में याद की जाएगी।